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रंग का भी एक रंग होता है: इस होली याद रखें... सशक्त राष्ट्र बनने के लिए विभिन्नताओं का सौहार्दपूर्ण समावेश अहम
Fri, 14 Mar 2025 03:21 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला
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Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 14 Mar 2025 03:21 AM IST
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होली के कई रंग
- फोटो :
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विस्तार
आज जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति अस्थिरता से जूझ रही है, व्यापार युद्ध की आशंकाएं गहरा रही हैं, वैश्विक ध्रुवीकरण की नई परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं और समाज में वैमनस्य एवं टकराव की प्रवृत्ति गहरा रही है, ऐसे वक्त में रंगों का यह उत्सव एक बार फिर हमें उन मूल्यों की याद दिलाने के लिए आया है, जो हमें सिखाते हैं कि पारस्परिक मतभेदों को भुलाकर हम एकजुटता और प्रेम की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे न केवल हमारा समाज, बल्कि समूचा विश्व अधिक सौहार्दपूर्ण बन सकता है।होली के इस मौसम की खासियत ही यह है कि यह सौहार्द प्रकृति में भी हर ओर दिखने लगता है। जब वसंत अपनी पूर्ण आभा के साथ धरती की हरीतिमा का शृंगार करता है, पेड़ों पर नव पल्लव खिल उठते हैं, तब होली का आगमन मनुष्य के हृदय में एक नई ऊष्मा, नई ऊर्जा और नए रंग भर देता है। हालांकि, यह पर्व रंगों का जरूर है, लेकिन यह रंगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे अर्थ और संदेश भी हो सकते हैं।
सोशल मीडिया के दौर में जब पारिवारिक संबंधों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं और सामाजिक ताने-बाने कमजोर हो रहे हैं, तब होली ही हमें क्षमा करने और गैरों को भी गले लगाने का मूल्य सिखाती है। आखिर यही तो हमारे संस्कृतिबहुल जीवन की विशेषता भी रही है। होली का दिन नई पीढ़ी के लिए अपनी परंपराओं को याद करने का एक अवसर भी होना चाहिए। किसी को भी यह नहीं भूलना चाहिए कि अपनी भाषा, बोली, खान-पान, तीज-त्योहार और सभ्यता के जिस शिखर पर हम आज खड़े हैं, वह एक दिन में नहीं बना है। यह परंपराओं का प्रवाह ही है, जो हमारी जिंदगियों में बह रहा है।
आज जब समाज में तनाव व विभाजन की खबरें आम हैं, तब होली के मर्म को समझे जाने की और भी ज्यादा जरूरत है, जिसमें भाईचारा छिपा है। होली ही हमें याद दिलाती है कि कोई रंग स्वयं में श्रेष्ठ नहीं है, बल्कि जब वे आपस में मिलते हैं, तभी एक सुंदर इंद्रधनुषीय छवि बनती है। ध्यान रहे, विभिन्नताओं का जब सौहार्दपूर्ण ढंग से समावेश होता है, तभी सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव होता है। इस होली हम याद रखें कि रंगों की यह विरासत केवल बाहरी आनंद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे के रंग भी भरने का संदेश देती है।