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आशा: 2025 में जिन पर्यावरणीय बदलावों की उम्मीद है, उनके लिए जरूरी है सामूहिक प्रयास
Tue, 31 Dec 2024 06:38 AM IST
शिव शुक्ला
आदित्य पटेल
आदित्य पटेल
Published by: शिव शुक्ला
Updated Tue, 31 Dec 2024 06:38 AM IST
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जलवायु परिवर्तन।
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ani
विस्तार
वेनेजुएला के आखिरी ग्लेशियर, हंबोल्ट ग्लेशियर ने वर्ष 2024 की शुरुआत में अपना ग्लेशियर होने का दर्जा खो दिया, उसे अब बर्फ के मैदान के रूप में वर्गीकृत कर दिया गया है। ग्लेशियर 450 हेक्टेयर से सिकुड़कर सिर्फ दो हेक्टेयर का रह गया। अन्य देशों ने भी दशकों पहले अपने ग्लेशियर खोए थे, लेकिन वेनेजुएला आधुनिक समय में उन्हें खोने वाला पहला देश बन गया है। महासागरीय अम्लीकरण अपनी सीमा के करीब पहुंच रहा है। दूसरी तरफ, बाकू में हुए कॉप-29 जलवायु शिखर सम्मेलन को विफल माना जा रहा है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर इस परिदृश्य में हम वर्ष 2025 में किन पर्यावरणीय बदलावों की उम्मीद कर सकते हैं?
उत्सर्जन और गर्मी : आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट के अनुसार, यदि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी नहीं की जाती है, तो 2030 तक वैश्विक औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस वृद्धि की संभावना है। 2025 तक वैश्विक तापमान में करीब 1.2 डिग्री तक वृद्धि का अनुमान है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, भारत में औसत तापमान में 0.6 डिग्री की वृद्धि हुई है, 2025 तक इसके और बढ़ने के आसार हैं। हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे, जिससे गंगा व ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के जल प्रवाह में अस्थायी वृद्धि होगी। गर्मियों में अत्यधिक हीट वेव, कृषि उत्पादन में कमी और जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
कोयले पर निर्भरता में कमी : अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन 50 फीसदी तक बढ़ सकता है। सौर व पवन ऊर्जा के संयोजन से करीब 60 फीसदी वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य है। भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 2025 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 280 गीगावाट पहुंच सकती है। इसका परिणाम कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भरता में कमी और कार्बन उत्सर्जन में कमी के रूप में होगा।
जैव विविधता की दिशा में : संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के अनुसार, 2025 तक दस लाख प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है। भारत सरकार ने प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट जैसे संरक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया है। भारत ने बीते दस वर्षों में रामसर स्थलों की संख्या 26 से बढ़ाकर 85 कर दी है, जिसे 100 तक ले जाने का उद्देश्य है। 2025 तक भारत में संरक्षित क्षेत्र 1,000 से अधिक हो सकते हैं।
शुद्ध हवा और हौसला : विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल 70 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण मरते हैं। भारत में 2024 तक पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर को 20-30 फीसदी तक कम करने का लक्ष्य है। दिल्ली, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में वायु गुणवत्ता सुधार का हौसला दिखाते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों और सख्त प्रदूषण मानकों को अपनाया जा रहा है।
घर-घर पानी : यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक दुनिया में 1.8 अरब लोग जल संकट से प्रभावित हो सकते हैं। भारत में बारह नदी घाटियों में रहने वाले करीब 82 करोड़ लोगों के पास प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1,000 घनमीटर या उससे कम है-जो जल की कमी के लिए आधिकारिक सीमा है। भारत में 2025 तक, सभी ग्रामीण घरों में पाइप के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।
भारत राह दिखाएगा : पेरिस समझौते के तहत, 2025 तक ज्यादातर देशों का लक्ष्य अपने निर्धारित राष्ट्रीय योगदान को पूरा करना है। भारत ने 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन व 2030 तक कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को 45 फीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है। अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में भारत ने जो भूमिका निभाई है, उससे उम्मीद है कि इस क्षेत्र में भी भारत ही दुनिया को राह दिखाएगा।
मिल कर लड़ेंगे, तो जीतेंगे : 2025 में पर्यावरण क्षेत्र में दिखने वाले महत्वपूर्ण बदलाव जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण, और प्रदूषण नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावी होंगे। भारत, अपने नीतिगत सुधारों और कार्यक्रमों के माध्यम से, इन बदलावों में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। वैश्विक रिपोर्टों और प्रामाणिक आंकड़ों के आधार पर, यह स्पष्ट है कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
(लेखक डीआरडीओ में उप-निदेशक हैं।)