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बढ़ती ताकत: वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की सुस्ती; भारत के लिए अवसरों का नया दौर

Mon, 07 Aug 2023 07:05 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Mon, 07 Aug 2023 07:05 AM IST
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सार
चीन की आउटलुक रेटिंग गिरना इसका संकेत है कि उसके बाजारों में निवेश के अवसरों में कमी आने की आशंका बनी हुई है। चीन के बाजार में सुस्त उपभोक्ता खर्च, निर्यात में गिरावट, संकटग्रस्त संपत्ति बाजार, बढ़ती बेरोजगारी, भारी स्थानीय सरकारी ऋण, घरेलू मांग में कमी, कमोडिटी की कीमतों से लेकर इक्विटी बाजारों तक गिरावट, कर्मचारियों की छंटनी जैसी आर्थिक मुश्किलों का परिवेश दिखाई दे रहा है।
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China's slowdown in global economy has become a new era of opportunities for India
भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : पीटीआई

विस्तार

इन दिनों प्रकाशित हो रही वैश्विक आर्थिक-वित्तीय संगठनों की रिपोर्टों में दो महत्वपूर्ण बातें उभरकर दिखाई दे रही हैं। एक, वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की सुस्ती का दौर है। दो, चीन की बढ़ती हुई आर्थिक समस्याओं और आपदाओं के बीच भारत के लिए आर्थिक अवसरों का नया दौर आकार लेते दिखाई दे रहा है। चीन-ताइवान के बीच चरम पर पहुंची तनातनी और चीन द्वारा अपनाई जा रही अमेरिका विरोध की रणनीति के कारण एप्पल और सैमसंग जैसी कई बड़ी कंपनियां चीन से निकल भारत में काम शुरू कर चुकी हैं। विगत तीन अगस्त को दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मोर्गन स्टेनली द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की विकास दर चालू वित्त वर्ष में 6.2 फीसदी के साथ चीन से अधिक है। इस दशक के अंत तक जहां भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत पर रहेगी, वहीं चीन 3.9 फीसदी की सुस्त दर से विकास करेगा। मोर्गन स्टेनली ने भारत की इकोनॉमिक आउटलुक रेटिंग बढ़ाकर ओवरवेट, तो चीन की घटाकर इक्वलवेट की है। 



चीन की आउटलुक रेटिंग गिरना इसका संकेत है कि उसके बाजारों में निवेश के अवसरों में कमी आने की आशंका बनी हुई है। चीन के बाजार में सुस्त उपभोक्ता खर्च, निर्यात में गिरावट, संकटग्रस्त संपत्ति बाजार, बढ़ती बेरोजगारी, भारी स्थानीय सरकारी ऋण, घरेलू मांग में कमी, कमोडिटी की कीमतों से लेकर इक्विटी बाजारों तक गिरावट, कर्मचारियों की छंटनी जैसी आर्थिक मुश्किलों का परिवेश दिखाई दे रहा है। कुछ साल पहले तक कहा जा रहा था कि चीन 2028 तक दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन जाएगा। पर अब अमेरिका की बराबरी करने में चीन को अधिक समय लगेगा। 


अमेरिका की इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के मुताबिक, चीन को अमेरिका से आगे निकलने के लिए 2040 के दशक तक इंतजार करना होगा। दूसरी ओर, भारत में ढांचागत विकास की तेजी, बढ़ते विदेशी निवेश, बढ़ते शेयर बाजार, मजबूत राजनीतिक नेतृत्व, मध्यवर्ग की ऊंची क्रय शक्ति, कॉरपोरेट टैक्स में कटौती, प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (पीएलआई) स्कीम तथा बढ़ते हुए कामकाजी उम्र वाले लोग अर्थव्यवस्था की ताकत बढ़ा रहे हैं।

एक वर्ष पहले कहा जा रहा था कि पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, पर अब आईएमएफ और अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक मोर्गन स्टेनली जैसे कई वैश्विक संगठनों की रिपोर्ट बता रही है कि भारत 2027 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था के तेजी से आगे बढ़ने में बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में आई क्रांति अहम भूमिका निभा रही है। पिछले नौ साल में बुनियादी ढांचे के निर्माण पर 34 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उद्योग-कारोबार को आसान बनाने के लिए 1,500 से अधिक पुराने कानूनों के अनावश्यक अनुपालन को खत्म किया गया है। श्रम लागत में तेजी से कमी आई है।

वर्ष 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावनाओं को साकार करने के लिए कई बातों पर ध्यान देना होगा। जैसे कि नई लॉजिस्टिक नीति और गति शक्ति योजना के कारगर कार्यान्वयन पर अधिक ध्यान देना होगा। कोशिश करनी होगी कि देश की ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षित कार्यबल में परिणत किया जाए। बड़ी संख्या में युवाओं को डिजिटल कारोबार के दौर की और नई तकनीकी योग्यताओं के साथ एआई, क्लाउड कम्प्यूटिंग, मशीन लर्निंग एवं अन्य नए डिजिटल कौशल से लैस करना होगा। विभिन्न देशों के साथ एफटीएके लिए वार्ताएं तेजी से पूरी करनी होंगी। रुपये को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में स्थापित करने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे तथा मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने पर ध्यान देना होगा।

चूंकि वर्ष 2050 तक भारत की ऊर्जा मांग दोगुनी बढ़ जाएगी, ऐसे में इसके लिए भारत को अपने पारंपरिक और गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना होगा। इससे देश के आम आदमी, उद्योग-कारोबार तथा संपूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए विकास का नया दौर निर्मित होते हुए दिखाई देगा।

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