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डिजिटल भुगतान की चुनौतियां

Wed, 21 Dec 2016 07:50 PM IST
उमेश चतुर्वेदी
उमेश चतुर्वेदी Updated Wed, 21 Dec 2016 07:50 PM IST
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Challenges of Digital payment
उमेश चतुर्वेदी

नोटबंदी के खिलाफ विपक्ष के हंगामे से संसद का समूचा शीत सत्र धुल गया। संसद के आंकड़े बताते हैं कि इस बार सिर्फ 16 प्रतिशत ही कामकाज हो पाया। इसके बावजूद नोटबंदी के अपने फैसले पर सरकार अड़ी हुई है। वैसे इस मसले पर सरकार इतना आगे बढ़ गई है कि उसके लिए पीछे लौटना अब राजनीतिक हाराकिरी ही होगी। इसलिए नोटबंदी को कामयाब बनाने के अलावा उसके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार ने ऑनलाइन लेन-देन और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई इनामों की घोषणा की है।

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नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने ऑनलाइन लेन-देन और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं की घोषणा की। इसके तहत डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों को इनाम दिया जाएगा। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 50 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक रोजाना भुगतान करने वाले लोगों को इस पुरस्कार योजना में शामिल किया जा रहा है। सरकार की इन योजनाओं से लोग आकर्षित होंगे। दिल्ली सरकार ने टैक्स भुगतान के साथ खरीददारी करने पर जब इनामों की घोषणा की, तो इसका फायदा भी नजर आया और लोग ऐसे भुगतान करने के लिए आगे भी आए। इसके तहत लोगों को पुरस्कार भी दिए गए।
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लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या पूरे देश में अबाध डिजिटल गेटवे तैयार हो चुका है। निश्चित तौर पर इसका जवाब न में है। आज भी गांवों को तो छोड़ दीजिए, शहरों तक के कुछ मोहल्लों और गलियों में इंटरनेट और मोबाइल फोन की अबाध सेवा नहीं है। गांवों में आज भी लोगों को मोबाइल फोन से बात करने के लिए उन जगहों पर जाना पड़ता है, जहां नेटवर्क की पहुंच सहज हो। इसलिए जरूरी यह भी है कि डिजिटल गेटवे की व्यवस्था को भी समानांतर तरीके से सुलभ और मजबूत किया जाए। जब तक इंटरनेट की अबाध सेवा नहीं होगी, डिजिटल गेटवे की सहज सहूलियतें नहीं दी जाएंगी, डिजिटल भुगतान को कामयाबी के साथ लागू नहीं किया जा सकेगा।
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जिन देशों में तकनीकी सहूलियतें और डिजिटल गेटवे व्यवस्था बेहतरीन है, वहां भी डिजिटल भुगतान सेवा पूरी तरह कामयाब नहीं है। भारत में नोटबंदी लागू होने के बाद मशहूर आर्थिक न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने आस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में एक सर्वे किया, जिसके मुताबिक जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में बड़े भुगतान तक के लिए नोट का चलन ज्यादा है। अमेरिका में अब भी 46 प्रतिशत भुगतान नकद में होता है। अमेरिका और यूरोप के जिन देशों में ब्लूमबर्ग ने सर्वे किया, उन देशों में ई-वालेट, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और बिटकाइन जैसी सहूलियतें मौजूद हैं। इसके बावजूद नार्वे को छोड़कर, बाकी जगहों पर नोट का ही ज्यादा इस्तेमाल चलन में है।


ई-भुगतान और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार योजनाएं एक हद तक ही कामयाब हो पाएंगी। डिजिटल भुगतान को लेकर लोगों की ललक तभी बढ़ पाएगी, जब भुगतान के लिए उन्हें फीस न देनी पड़े। डिजिटल भुगतान के लिए पेमेंट गेटवे वाली कंपनियां जिस तरह मोटी फीस वसूल रही हैं, उससे लोगों में गुस्सा है और वे इसे अपनी मेहनत की कमाई की बर्बादी ही मान रहे हैं। इसलिए मुफ्त भुगतान सेवा वाले डिजिटल गेटवे भी मुहैया कराने होंगे। अन्यथा लोगों को डिजिटल भुगतान के लिए आकर्षित कर पाना आसान नहीं होगा।

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