औद्योगिक बदहाली दूर करने की चुनौती

हरिराम पाण्डेय Updated Fri, 23 Nov 2012 10:59 PM IST
challenge to avoid industrial collapse
पश्चिम बंगाल में औद्योगिक वातावरण सुधारने और पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई बार शीर्ष उद्योगपतियों से मिल चुकी हैं। पर आश्वासन के बावजूद पूंजी निवेश को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा। बात जमीन के मसले पर अटक रही है। उद्योगपति चाहते हैं कि जमीन सरकार मुहैया कराए, जबकि सरकार का कहना है कि बाजार दर पर जमीन वे खुद खरीदें। पर उद्योगपति इसके लिए तैयार नहीं, क्योंकि जमीन के प्लॉट खरीदना बहुत कठिन है।

बीती सदी के साठ के दशक तक यह काम आसान था, क्योंकि तब जमीन के मालिकान कम थे। उस दौर में बंगाल में जूट, इंजीनियरिंग, चाय उद्योग, खनिज तथा दस्तकारी के काम प्रचुर थे, और रोजगार के लिए बंगाल की शोहरत थी। तब वहां के कुल रोजगार की 90 प्रतिशत हिस्सेदारी इंजीनियरिंग क्षेत्र में थी। पर पिछले तीस वर्षों में उद्योग बड़ी तेजी से बंद होने शुरू हुए।

समाजशास्त्री और अर्थशास्त्री इस स्थिति के लिए खराब ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर), निर्णयहीनता, दिशाहीन ट्रेड यूनियनबाजी, राजनीतिक अदूरदर्शिता और कार्यसंस्कृति को दोषी बताते हैं। वहां के उद्योगों पर मारवाड़ी समुदाय का प्रभुत्व है। पर उद्योगों के पूंजीहीन होने एवं मारवाड़ी उद्योगपतियों का ट्रेडिंग व्यवसाय में कदम रखने का मुख्य कारण सरकारी उदासीनता नहीं, बल्कि पूंजी की असुरक्षा, नए जमाने के अनुरूप उद्योग विकसित न कर पाने की मजबूरी और प्रबंधन में पेशेवर लोगों को शामिल करने में हिचक है। मारवाड़ी समुदाय सरकारी अवरोधों की परवाह नहीं करता।

इतिहास गवाह है कि प्रथम विश्वयुद्ध के अंत में जब ब्रिटिश शाही सूरज कोलकाता में अपने शिखर पर था, तब मारवाड़ी व्यवसायियों का अंगरेजों से तगड़ा व्यापारिक मुकाबला था। उस समय ब्रिटिश प्रबंध एजेंसियों-एंड्रयू यूल, बर्ड ऐंड हिल्जर्स और डंकन ब्रदर्स के दफ्तर शहर की महत्वपूर्ण इमारतों में से थे। तब डलहौजी स्क्वॉयर शहर का आर्थिक-राजनीतिक केंद्र था तथा जूट उद्योग एकमात्र लोकप्रिय उद्योग था। धीरे-धीरे जूट उद्योग में मारवाड़ियों या राजस्थानियों का प्रभाव बढ़ता गया, और अंत में उन्होंने अपनी जूट मिलें ही शुरू कर दीं।

व्यापारी के रूप में आए ये लोग समय और पूंजी के निवेश में चातुरी के फलस्वरूप उद्योगपति बन गए। जो नहीं बन सके, वे व्यापारी के तौर पर फलते-फूलते रहे। दो-एक को छोड़कर किसी ने नए उद्योग का विकास नहीं किया। यही हाल चाय उद्योग का हुआ, जिस कारण बागानों तथा पत्तियों की गुणवत्ता कम हो गई और वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा का मुकाबला नहीं कर सका। इंजीनियरिंग उद्योग रेलवे की खरीद पर टिका था और जैसे ही रेलवे ने खरीद घटानी शुरू की, इसकी कमर टूट गई।

बीती सदी के साठ के दशक के अंत तक पश्चिम बंगाल में कुल जमीन के मालिक कुछ ही लोग थे। बाकी लोग या तो रैयत थे या बटाईदार। भूमि सुधार के पूर्ववर्ती सरकार के प्रयास और अन्य सामाजिक-आर्थिक कारणों से जमीन के छोट-छोटे टुकड़े हो जाने के फलस्वरूप उस समय के रैयत, बटाईदार और खेत मजदूर जमीन के मालिक हो गए। सरकार द्वारा उन जमीन का अधिग्रहण किए जाने का व्यापक राजनीतिक असर पड़ेगा।

सिंगुर और नंदीग्राम का उदाहरण सबके सामने है। पूर्ववर्ती वाम मोरचा सरकार के चुनाव में पराजित होने के मुख्य कारणों में से एक जमीन भी था। अतएव सरकार द्वारा उद्योगपतियों को जमीन देने का कदम आत्मघाती हो सकता है। निवेश के मूल्य पर सरकार सत्ता का दांव नहीं खेल सकती। इसलिए उद्योगपतियों को जमीन आवंटित नहीं किए जाने के लिए सरकार को दोषी बताना या राजनीतिक परिस्थितियों की ओर उंगली उठाना सही नहीं कहा जा सकता।

लेकिन निवेश के प्रति उदासीनता के कारण अब कोलकाता की अर्थव्यवस्था ट्रेडिंग पर निर्भर हो चुकी है तथा पूंजी के उत्पादन में उद्योगों की भूमिका शून्य हो गई है। आज नॉलेज ब्रांडिंग, कस्टमर केयर, लीज, फ्रेंचाइजी वगैरह की ज्यादा मांग है। लिहाजा पश्चिम बंगाल में उद्योग का नया नजरिया यदि विकसित नहीं किया गया, तो औद्योगिक विकास के मौके लगभग समाप्त होने की कगार पर हैं।

Spotlight

Most Read

Opinion

सुशासन में नागरिक समाज की भूमिका

सुशासन को अमल में लाने के लिए नागरिक समाज का अहम स्थान है, क्योंकि यही समाज की क्षमता में वृद्धि करते हैं और उसे जागरूक बनाते हैं। यही सरकार या राज्य को आगाह करते हैं कि कैसे नागरिकों की भागीदारी से उनका संपूर्ण विकास किया जाए।

20 जनवरी 2018

Related Videos

कुएं में गिरे कुत्ते की सूझबूझ से बच्ची जान, लोग देखकर हो गए हैरान

सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक कुत्ता कुएं में गिरा हुआ है, लेकिन फिर भी उसकी जान बच गई..देखते हैं कैसे...

21 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper