फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Central government gave message of moving forward on old economic policies only

Union Budget: आत्मविश्वास से भरी सरकार ने दिया पुरानी आर्थिक नीतियों पर ही आगे बढ़ने का संदेश

Wed, 24 Jul 2024 03:15 AM IST
दीपक कुमार शर्मा लॉर्ड मेघनाद देसाई
लॉर्ड मेघनाद देसाई Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 24 Jul 2024 03:15 AM IST
विज्ञापन
सार
इस आम बजट को आप मोदी सरकार के पिछले दो कार्यकालों में पेश अन्य बजटों की तरह ही ले सकते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.5 से 7 फीसदी है। यह संतोषजनक स्थिति है। 
loader
Central government gave message of moving forward on old economic policies only
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले आम बजट में कुछ अहम नीतिगत बदलावों की उम्मीद थी। भाजपा के अपने दम पर बहुमत हासिल करने से चूकने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहली बार गठबंधन सरकार की अगुवाई करने को देखते हुए रेवड़ियां बरसने की उम्मीद से कोई इन्कार नहीं कर रहा था। हालांकि, आम बजट में ऐसा कुछ नहीं दिखा। तो संदेश साफ है, मोदी सरकार आत्मविश्वास से भरी है। उसने अपनी पुरानी आर्थिक नीतियों पर ही आगे बढ़ने का फैसला किया है।



इस आम बजट को आप मोदी सरकार के पिछले दो कार्यकालों में पेश अन्य बजटों की तरह ही ले सकते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.5 से 7 फीसदी है। यह संतोषजनक स्थिति है। मुझे लगता है कि इसीलिए सरकार ने कोई विशेष या नया प्रयोग कर बेवजह घबराहट पैदा करने की कोशिश नहीं की। स्वरोजगार हो या आर्थिक सुधार अथवा कृषि क्षेत्र या कौशल विकास, सरकार ने पहले की तरह ही धीरे-धीरे आगे बढ़ने का फैसला किया।


रही बात बिहार और आंध्रप्रदेश को विशेष सौगात देने की तो यह स्वभाविक ही है। जदयू और टीडीपी सरकार के अहम सहयोगी हैं। इनको साधे रखने की रणनीति के तहत इन राज्यों का विशेष ख्याल रखने में कुछ नया नहीं है। भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों में पहले भी सहयोगी समर्थन की कीमत वसूलते रहे हैं। फिर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि ये दोनों दल अलग-अलग राज्यों में सरकार चला रहे हैं। इनके सामने भी अपने राज्यों के मतदाताओं को संदेश देने की जरूरत है।

हां, अहम सवाल रोजगार को लेकर है। आम चुनाव के नतीजे ने बताया कि बेरोजगारी पर युवा मोदी सरकार से नाराज थे। मध्य वर्ग बचत न होने के कारण परेशान होकर नाराज हुआ। मध्य वर्ग के एक बड़े हिस्से को आयकर में राहत की फुहार मिली। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि अपने दम पर बहुमत हासिल न होने के बावजूद सरकार के आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पुरानी आर्थिक नीतियों के जरिये ही अच्छे परिणाम हासिल करने के प्रति आश्वस्त दिखती हैं। उन्हें लगता है कि पुरानी नीतियों से ही निवेश की स्थिति बेहतर होगी और राजकोषीय घाटे पर भी लगाम लगेगी।

रोजगार पर अहम घोषणाएं तो कीं, लेकिन नतीजे स्पष्ट नहीं
रोजगार के परिप्रेक्ष्य में सरकार ने कई अहम घोषणाएं तो की हैं, मगर फिलहाल यह पूरी तरह से अस्पष्ट है। अगले पांच साल में 4.1 करोड़ युवाओं को रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। वहीं, 500 शीर्ष कंपनियों में एक करोड़ युवाओं के लिए इंटर्नशिप का प्रस्ताव है। सवाल है कि इसकी प्रक्रिया क्या होगी? यह किस तरह का रोजगार होगा? इसके नियम और शर्तें क्या होंगी? चूंकि इस बारे में सरकार ने कुछ साफ-साफ नहीं कहा है, इसलिए इस पर कुछ भी कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed