फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   caste system is related to women's freedom

वर्ण व्यवस्था से जुड़ी है स्त्रियों की आजादी

Thu, 25 Aug 2016 06:17 PM IST
सुभाषिनी सहगल अली
सुभाषिनी सहगल अली Updated Thu, 25 Aug 2016 06:17 PM IST
विज्ञापन
caste system is related to women's freedom
सुभाषिनी सहगल अली

दो साल पहले, यूरोप में पढ़ रही तमिलनाडु की एक युवती का मेल मिला। दो साल के बाद उसे भारत आने का मौका मिल रहा था। वह अपने परिवार से मिलना तो बहुत चाहती थी, लेकिन उसे डर था कि वे उसे बंधक बनाकर उसे यूरोप लौटने से रोक देंगे। आश्चर्य तो हुआ, पर पता था कि हमारे देश में ऐसी बातें होती रहती हैं, तो हमारी अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की तमिलनाडु इकाई ने उसकी पूरी मदद की और वह यूरोप सुरक्षित लौट गई। अब उसे यूरोप में ही अच्छी नौकरी मिल गई है, लेकिन उसके मां-बाप अब भी उसे अपने जीवन और जीवनसाथी के बारे में फैसला करने का अधिकार देने के लिए तैयार नहीं हैं। पांच साल से उसकी दोस्ती तमिलनाडु के ही एक नौजवान से है। वह शिक्षित है। उसका परिवार भी शिक्षित और खुले दिमाग का है। उन्हें वह युवती भी पसंद है। लेकिन लड़की के परिवार का बस चले, तो वह उसे जबरदस्ती लड़के और नौकरी, दोनों से ही अलग कर दें, सिर्फ इसलिए कि लड़का दूसरी जाति का है। दोनों पिछड़ी जाति के हैं, लेकिन अलग-अलग पिछड़ी जातियों के।

विज्ञापन


बहुत से लोग युवती के मां-बाप को ही सही ठहराते हैं। उनका मानना है कि समाज को बचाने का यही तरीका है। वरना हमारा समाज भी पश्चिम के पतनशील समाज की तरह हो जाएगा। वर्ण व्यवस्था को बचाए रखने से ही समाज और परंपराओं को बचाया जा सकता है। कमाल की बात तो यह है, कि ऐसे तर्क देने वाले लोग पुरुषों पर समाज को बचाए रखने का कोई दायित्व नहीं डालते!
विज्ञापन


हाल की बात है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ जिले की इगलास आरक्षित विधानसभा सीट के तीन नेताओं ने जनता की सेवा करने का कैसा विचित्र रास्ता चुना है! वे खुद गैर-दलित हैं, पर उन्होंने दलित पत्नियों का इंतजाम कर उन्हें चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। पत्नी जीत गई, तो विधायकी पति संभालेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य मेघराज सिंह, जो अपने को राम मंदिर आंदोलन का योद्धा बताते हैं, ने अपनी सहजातीय पत्नी को तलाक देकर एक दलित महिला से शादी कर ली है। लोकदल के नेता, रवींद्र सिंह ने विज्ञापन निकाला है, जनता मुझे अपने चुने हुए प्रतिनिधि के रूप में देखना चाहती है, इसलिए मैं बिना दहेज लिए एक ऐसी दलित महिला के साथ विवाह करना चाहता हूं, जो सुशील हो, पढ़ी लिखी हो और जिसकी ऊंचाई पांच से साढ़े पांच फुट हो। राष्ट्रीय लोक दल के नेता हरचरण सिंह ने चुनाव के मद्देनजर कई साल पहले ही एक दलित महिला से शादी कर ली थी। केवल राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए अंतरजातीय विवाह करना, चुनाव में जीतने वाली महिलाओं को अपना मोहरा बनाना, बिना कारण अपनी पत्नी को तलाक देना – इन तमाम काली करतूतों का जरा-सा धब्बा भी इन जनसेवकों के उजले कुर्तों पर नहीं लगता। समाज, परंपरा, संस्कार – इनमें से किसी एक की रखवाली इनके जिम्मे नहीं।


दूसरी तरफ, समाज को बचाने और परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए वर्ण व्यवस्था को बनाए रखना महिलाओं का कर्त्तव्य माना गया है। साफ है कि अपनी आजादी को पाने के लिए और अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए, महिलाओं को वर्ण व्यवस्था के अस्तित्व को खत्म करने की लड़ाई भी लड़नी होगी।

माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed