सर्दी में बुलेट राजा

सुधीर विद्यार्थी Updated Tue, 17 Dec 2013 06:35 PM IST
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bullet raja in winter

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साधो, इस बार गरीबों के लिए सर्दी में अलाव नहीं जल रहे। उन्हें बुलेट राजा फिल्म दिखाए जाने की बात चल रही है। बुलेट राजा आएंगे, तो गर्मी बढ़ेगी। इससे गरीब लोगों को ठंड नहीं सताएगी। बुलेट राजा के हाथ में हर वक्त तमंचा रहता है। गोली, बंदूक से उसका दिली रिश्ता है। वह बुलेट मोटर बाइक पर चलता है और धूम-धड़ाका करता है। उसके लिए यह सब खेल है। ऐसे खेल में सर्दी नहीं सताती।
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सरकारें इस नुस्खे को आजमाएं, तो देश का बड़ा भला हो। इस फिल्म के साथ यह हुआ कि इसका टाइटल पहले आया। बाद में कहानी बुनी गई। एक समाजसेवी ने सुना, तो बोले, इस पटकथा को हिंसक होना ही था। सामने खड़े दूसरे खुर्राट ने दम भरा, तुम हर वक्त उल्टा ही सोचते हो। टाइटल निगेटिव नहीं, रोचक है। समाजसेवी का मुंह चुसे आम की तरह लटक गया।
वैसे भी इन दिनों की बात कुछ और है। आज आधुनिक पिता अपने लाड़ले को बेशर्म होते देख खुश होता है कि आगे चलकर बेटा बड़ी उड़ान भरेगा। पिताओं की पसंद अब दबंग संतानें हैं। वे उसकी रगों में उबाल देखना चाहते हैं। बेटा चार हफ्तों में कृष-3 के 300 करोड़ के कलेक्शन की बात बताता है। कहता है कि रामलीला उसे पछाड़ नहीं पाएगी। मां-बाप बेटे की जनरल नॉलेज पर मुदित हैं। अब पिताओं के भविष्य के सपनों की जमीन यही है। लड़कों की पसंद भी फिल्मी हीरोइनें हैं। तूफान तक इस जमाने में कटरीना और हेलेन बन गए। वे आते हैं, तो मौसम विभाग भी हैरान रह जाता है।
फिल्म वाले इस सच को जानते हैं। लोग साधारण दिखने वाले किसी आदमी को जमीन पर चलते, संघर्ष करते देखना पसंद नहीं करते। उन्हें दौड़ती रेल पर छलांगें लगाते, आसमान में उड़ते और पुलिस पर गोलियों की बौछार करने वाले असामाजिक नायक चाहिए। प्रेम दृश्य देखना अब किसी को पसंद नहीं। आइटम नंबर के चटपटे तड़के के बिना सब कुछ बेस्वाद। सड़क पर चलते-दौड़ते युवा तेज आवाज में फिल्मी गानों में मस्त हैं। संगीत के लिए ऐसा प्रेम इस मुल्क में पहले कभी नहीं था।

फिल्म वाले जानते हैं कि दर्शक को फुल टाइम मसाले की जरूरत है। जबर्दस्त ऐक्शन देखकर तालियां और आइटम नंबर पर सीटियां बजाने के लिए वे रणवीर बने बैठे हैं। उनके लिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि फिल्म का नाम रामलीला है या रासलीला । बुलेट राजा की गोलियां दर्शकों के लिए ही हैं।
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