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भरोसे में सेंध: पीएनबी मामला देश की बैंकिंग व्यवस्था के लिए आत्ममंथन का अवसर, ग्राहकों का भरोसे ही बुनियाद
Sat, 31 Oct 2026 05:43 AM IST
न्यूज डेस्क
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: न्यूज डेस्क
Updated Sat, 31 Oct 2026 05:43 AM IST
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पीएनबी घोटाला
- फोटो : पीटीआई
बैंक में जमा धन केवल खाताधारकों की वर्षों की मेहनत से अर्जित बचत ही नहीं, बल्कि उनकी भविष्य की उम्मीदों और आर्थिक सुरक्षा का आधार भी होता है। ऐसे में, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की ग्रेटर नोएडा शाखा में बचतकर्ताओं के खातों से करोड़ों रुपयों की कथित हेराफेरी का मामला बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता और ग्राहकों के धन की सुरक्षा के संबंध में गंभीर सवाल खड़े करता है।
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यह मामला इसलिए भी चिंताजनक है कि जिन लोगों ने रकम गायब होने की शिकायत की है, उनमें से कई ऐसे किसान हैं, जिन्हें नोएडा एयरपोर्ट के लिए जमीन के मुआवजे में बड़ी धनराशि मिली थी। शुरुआत में यह मामला करीब 35 करोड़ रुपये की हेराफेरी का बताया जा रहा था, लेकिन अब यह 350 से भी अधिक खाताधारकों और करीब 200 करोड़ रुपये तक पहुंचता दिख रहा है।
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दरअसल, यह घटनाक्रम सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान की कहानी नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही और निगरानी की कमी का स्पष्ट प्रमाण भी है। यह आशंका भी जताई जा रही है कि बैंक के कुछ कर्मचारी और प्रबंधक साइबर ठगी के किसी गिरोह के संपर्क में हों। आरोप है कि शाखा कर्मचारियों ने बगैर खाताधारकों की सहमति के, सावधि जमा (एफडी) समय से पहले ही तोड़ दी और बचत खातों से बड़ी रकम अन्य खातों में हस्तांतरित कर दी।
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उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष कोटा में एक अन्य बैंक में ऐसी ही घटना हुई थी, जब ग्राहकों के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। यह बेहद चिंताजनक है कि एक तरफ जहां बैंक खातों को एआई एजेंटों से खतरा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बैंक का आंतरिक तंत्र ही ग्राहकों की जमा पूंजी को जोखिम में डाल रहा है।
डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन के विस्तार के दौर में साइबर सुरक्षा के साथ-साथ बैंक के भीतर होने वाली अनियमितताओं पर निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। पीएनबी के मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस कथित हेराफेरी में किन लोगों की भूमिका रही, रकम कहां हस्तांतरित की गई और बैंक की आंतरिक निगरानी
व्यवस्था इस पर समय रहते अंकुश क्यों नहीं लगा सकी। बैंक ने खाताधारकों की पूरी रकम लौटाने का आश्वासन दिया है। यह जरूरी भी है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी बैंक की जिम्मेदारी है कि ग्राहकों को अपनी ही जमा पूंजी वापस पाने के लिए लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। देश की बैंकिंग व्यवस्था के लिए यह आत्ममंथन का अवसर होना चाहिए, क्योंकि उसकी बुनियाद ही ग्राहकों के भरोसे पर टिकी है।