{"_id":"657e56b9af23bde985015077","slug":"brainstorm-can-money-buy-happiness-and-also-satisfaction-2023-12-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंथन: क्या पैसों से खुशियां खरीदी जा सकती हैं, और संतुष्टि भी?","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
मंथन: क्या पैसों से खुशियां खरीदी जा सकती हैं, और संतुष्टि भी?
Sun, 17 Dec 2023 07:32 AM IST
यशोधन शर्मा
एलिजाबेथ डन, न्यूयॉर्क टाइम्स
एलिजाबेथ डन, न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sun, 17 Dec 2023 07:32 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
happiness
विस्तार
तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहोनातिमानिता।
भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत।।
अर्थात् तेज, क्षमा, धैर्य, पवित्रता एवं किसी में भी शत्रुभाव का न होना और अपने में पूज्यता के अभिमान का अभाव, हे अर्जुन! ये सभी दैवी सम्पदा को लेकर उत्पन्न हुए पुरुष के लक्षण हैं।
भीष्म पर्व, गीता 16/3
(अर्जुन के प्रति साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का गीतोपदेश)
खुश रहने के लिए आपको कितने पैसों की जरूरत है? हालांकि यह धारणा कि पैसे से खुशियां खरीदी नहीं जा सकतीं, काफी लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आरामदायक जीवन स्तर वाले लोग गरीबी में रहने वाले लोगों की तुलना में ज्यादा खुशहाल होते हैं। लेकिन, एक बार जब हम उस आरामदायक स्तर पर पहुंच जाते हैं, तो अतिरिक्त आय हमें कोई अतिरिक्त खुशी नहीं देती। हालांकि यह 'आरामदायक स्तर' का पैमाना, हर देश के लिए अलग- अलग हो सकता है। लेकिन यही सच है, तो ज्यादातर लोग खुश रहने के लिए पर्याप्त आय स्तर तक पहुंचने के बाद भी इतनी मेहनत क्यों करते हैं?
इसकी एक वजह यह है कि पैसे और खुशी के संबंध के बारे में हमारे विचार गलत हैं। एक अमेरिकी शोध में शामिल लोगों ने सोचा कि अगर वे 25 हजार डॉलर की जगह 55 हजार डॉलर कमाते हैं, तो उनकी खुशियां भी दोगुनी हो जाएंगी। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जिन लोगों ने 55 हजार डॉलर कमाए, वे 25 हजार डॉलर कमाने वालों की तुलना में केवल नौ फीसदी ज्यादा संतुष्ट थे। व्यक्ति अमूमन सोचता है कि ज्यादा पैसा होने पर वह अपने लिए ज्यादा से ज्यादा चीजें खरीद सकता है। लेकिन ज्यादा चीजें खरीदना और केवल अपने लिए खरीदना, पैसे को खुशी में बदलने में अप्रभावी भी हो सकता है।
एक दशक के शोध से पता चलता है कि खुद के बजाय दूसरों पर खर्च करके आप ज्यादा संतुष्ट महसूस कर सकते हैं। दरअसल, अति उपभोग से कभी संतुष्टि नहीं मिल सकती। एक हालिया प्रयोग में चॉकलेट प्रेमियों के दो समूह बनाए गए। एक समूह से जी भरकर चॉकलेट खाने को कहा गया। जबकि, दूसरे समूह से थोड़ी चॉकलेट खाने को कहा गया। फिर दोनों समूहों ने एक सप्ताह तक चॉकलेट न खाने का संकल्प दोहराया।
एक सप्ताह बाद जब दोनों समूहों को फिर चॉकलेट खाने को मिली, तो पहले समूह को चॉकलेट देखकर कम खुशी हुई, जबकि दूसरे समूह ने चॉकलेट का उतना ही आनंद लिया। निष्कर्ष यह निकला कि अति उपभोग की तुलना में कम उपभोग संतुष्टि के स्तर से जुड़ा होता है। कम उपभोग को बढ़ावा देने के लिए अपने पैसे का उपयोग करने के लिए निश्चित रूप से व्यवहार में बदलाव की जरूरत होती है। लेकिन पैसे से मिलने वाली खुशी को बढ़ाने का एक दूसरा भी उपाय है कि उसे दूसरों पर खर्च किया जाए।
पिछले दस वर्षों में किए गए प्रयोगों से पता चलता है कि नया मोबाइल, लैपटॉप, नए कपड़े इत्यादि खरीदने के बजाय, जिन्हें खरीदने के लिए आप पागल हुए जाते हैं, दूसरों पर खर्च करने में वाकई ज्यादा संतुष्टि मिलती है। संतुष्टि की कुंजी पैसा नहीं है, बल्कि यह है कि जो पैसा आपके पास है, उसे आप खर्च किस तरह से करते हैं।