समकालीन तेलुगु कहानी

प्रकाश अमर Updated Sun, 04 Nov 2012 01:34 PM IST
book review by prakash amar
झरोखा वह जगह होती है जहां से ताजा हवा आती है। जहां से बाहर की दुनिया देखी जा सकती है। कहानी संग्रह झरोखा भी एक ऐसा वातायन है, जिससे तेलुगु कथा साहित्य के समूचे परिदृश्य की एक झलक नजर आती है। इस संग्रह में तेलुगु के 23 प्रमुख समकालीन कहानीकारों की कहानियां हैं। 1931 में जन्मे और गत वर्ष ही दिवंगत हुए अवसराला रामकृष्ण राव से लेकर संग्रह में शामिल सबसे युवा कथाकार बी. अजय प्रसाद तक की इन कहानियों में कथ्य और शिल्प की पर्याप्त विविधता है।

समाज पर भूमंडलीकरण, कंप्यूटरीकरण के प्रभाव और वक्त के साथ बदलते मानवीय संबंध को व्यक्त करतीं ये कहानियां उड़िया मन को खोल कर रख देती हैं। इन कहानियों में धर्म-भाषा के पचड़े हैं, तो किसानों की आत्महत्या के सवाल भी हैं। ऐता चंद्रैय्या की कहानी एक गांव की मौत में पूरे तेलंगाना के दर्द को समझा जा सकता है। पिछले पैंतीस सालों से अनुवाद के क्षेत्र में सक्रिय आर.शांता सुंदरी ने इन कहानियों का प्रवाहपूर्ण अनुवाद किया है। समकालीन तेलुगु कथा साहित्य का यह महत्वपूर्ण संग्रह है।

झरोखा (तेलुगु कहानियां)
अनुवादः आर. शांता सुंदरी
प्रकाशकः मंजुल पब्लिशिंग हाउस, भोपाल
मूल्यः १७५ रुपए

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