खलनायक ब्लाटर हैं या कोई और
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फुटबॉल जैसे खूबसूरत खेल के बहाने विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीति की जाती रही है, मगर अब यह राजनीति शीतयुद्ध के स्तर तक पहुंच चुकी है। विगत हफ्ते हुआ फीफा का चुनाव अब तक का सबसे विवादास्पद चुनाव था। 209 सदस्य देशों वाली यह संस्था दो समूहों में बंटी थी-एक समूह में यूरोप (रूस और स्पेन शामिल नहीं) और उत्तर अमेरिका थे, तो दूसरे समूह में शेष दुनिया के सदस्य देश। पर सेप ब्लाटर और प्रिंस अली बिन अल-हुसैन के बीच मुकाबले से ठीक दो दिन पहले अमेरिका ने अपनी ताकत दिखाई और संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) ने फीफा के सात वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया। उन्हें 'अपराधी' बताते हुए अमेरिकी एटॉर्नी जनरल ने तत्काल रूस (2018) और कतर (2022) को आवंटित किए गए फीफा विश्व कप को रद्द करने की मांग कर दी। मगर अमेरिकी एटॉर्नी जनरल का फीफा और ब्लाटर के खिलाफ किए गए विषवमन के 24 घंटे के अंदर ही स्विस फुटबॉल प्रशासक (ब्लाटर) सत्ता में आ गया।
यह रहस्य छिपा नहीं है कि फीफा में हर स्तर पर भ्रष्टाचार है। यह भी रहस्य नहीं है कि निजी क्लब की तरह फीफा काम करता है, जिसमें पारदर्शिता नाममात्र की है। हालांकि सभी फुटबॉल फेडरेशन और अधिकारियों को यह पता था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच कर रही है। लेकिन किसी को यह इल्म नहीं था कि खुफिया एजेंसी अहले सुबह इस तरह होटल में छापा मारकर फीफा के वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार करेगी। छापेमारी का वक्त कूटनीतिक तौर पर तय किया गया था, मगर यदि इस गिरफ्तारी का मकसद ब्लाटर के समर्थकों को किनारे करना था, तो यह अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा रहा। ब्राजील फुटबॉल फेडरेशन के एक अधिकारी का कहना था, 'अधिकारियों को चुनाव से 24 घंटे पहले क्यों गिरफ्तार किया गया? वे भाग तो नहीं रहे थे।'
जैसे ही यह खबर ज्यूरिख के होटल में एकत्र प्रतिनिधिमंडलों तक पहुंची, विभिन्न फेडरेशन के अधिकारियों ने आपात बैठक की। ज्यूरिख में मौजूद ब्राजील के प्रतिनिधि ने कहा, 'यूरोप के पास इतनी ताकत नहीं थी कि वह किसी को गिरफ्तार कर सके। लिहाजा प्रिंस अली के पक्ष में वोट देने के लिए सभी को मजबूर करने के लिए उसने अमेरिका को बुलाया। स्पष्ट था कि वे ब्लाटर को पद से हटाना चाहते थे। नतीजतन हम जैसे प्रतिनिधियों ने भी, जिन्होंने ब्लाटर के पक्ष में राय नहीं बनाई थी, ब्लाटर को ही वोट देने का फैसला किया।' सवाल यह है कि ब्लाटर आखिर यूरोप और अमेरिका की नजरों में खलनायक क्यों बन गए। क्या उन्होंने फुटबॉल को अपने पूर्ववर्तियों से अधिक नुकसान पहुंचाया? अमेरिकियों ने इस खेल को 'स्वच्छ' करने में अचानक इतनी रुचि क्यों दिखाई, जबकि इसके प्रशासक अधिकतर यूरोपीय ही रहे हैं?
ब्लाटर का मुख्य अपराध भ्रष्टाचार नहीं हो सकता। दरअसल यूरोप और अमेरिकी उनसे जिस भू-राजनीतिक खेल की मांग कर रहे थे, उससे ब्लाटर के इन्कार करने के फैसले ने ही उन्हें खलनायक बनाया होगा। अमेरिका के साथ ब्लाटर के मतभेद 2005 में तब शुरू हुए, जब उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस की उस मांग को ठुकरा दिया था, जिसमें उन्होंने 2006 के विश्व कप से ईरान को बाहर करने की बात कही। यह मांग ईरान पर लगे प्रतिबंधों की वजह से की गई थी। स्थिति तब और बिगड़ गई, जब फलस्तीन को फीफा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई। एक ब्राजीली अधिकारी की मानें, तो ब्लाटर फुटबॉल को और व्यापक बनाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि यूरोप को उस पर अपना नियंत्रण खत्म होने की चिंता थी। अमेरिका के लिए फुटबॉल उसकी राजनीति का एक हिस्सा है और ब्लाटर उसमें बाधा बन रहे थे।
209 सदस्यों की विशाल संख्या के कारण फीफा इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी और संयुक्त राष्ट्र से भी बड़ा संगठन है। अब तक इसमें यूरोप का ही वर्चस्व रहा था। पर ब्लाटर के नेतृत्व में स्थिति बदल रही थी। वह फुटबॉल विश्व कप को नए और उभरते देशों में ले गए। एक ब्राजीली लेखक के मुताबिक, 'पिछला दो विश्व कप दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में खेला गया, जबकि अगला आयोजन रूस में होने वाला है। ये तीनों देश ब्रिक्स का हिस्सा हैं। इससे पश्चिमी देशों की नाराजगी स्वाभाविक है। भ्रष्टाचार के बहाने यूरोप और अमेरिका फीफा पर फिर से अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहे हैं। यूरोप के फुटबॉल संगठनों में भी काफी भ्रष्टाचार है, मगर वे इस पर चर्चा नहीं करते।'
ब्लाटर पश्चिम की नजर में इसलिए भी खलनायक बने, क्योंकि उनके नेतृत्व में ही फीफा ने अफ्रीका और एशिया में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए लाखों डॉलर का निवेश किया। यह कहना कठिन है कि 2018 और 2022 के विश्व कप की मेजबानी के फैसले में भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, पर इस आरोप में सच्चाई है कि पश्चिम की सरकारें और फुटबॉल संघ साथ मिलकर उस प्रक्रिया को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके तहत रूस और कतर ने विश्व कप आयोजन करने का अधिकार जीता है। चूंकि क्रीमिया पर नियंत्रण के बाद रूस पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, लिहाजा अमेरिका नहीं चाहता कि रूस टेलीविजन पर अरबों दर्शकों के सामने ताकत के रूप में दिखे।
इसके अलावा फुटबॉल विश्व कप आर्थिक मोर्चे पर सबसे फायदेमंद आयोजन है। विश्व कप के कारण ब्राजील के लघु उद्योग और पर्यटन को संजीवनी मिली तथा उसकी छवि भी बेहतर हुई। रूस में विश्व कप होने से उसकी अर्थव्यवस्था और छवि को भी ऐसी संजीवनी मिल सकती है, जिससे पश्चिम द्वारा उसे अलग-थलग करने के प्रयास महत्वहीन हो सकते हैं। ब्लाटर भ्रष्ट हैं अथवा नहीं, यह एक ईमानदार जांच से ही पता चल सकता है। मगर फिलहाल वैश्विक फुटबॉल पर ब्लाटर का नियंत्रण है, क्योंकि अधिकतर देशों का मानना है कि 'पश्चिमी देश' जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह गलत है।
-रियो डी जेनेरियो, ब्राजील स्थित स्वतंत्र पत्रकार