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अवसर का लाभ : रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते खाद्यान्न निर्यात बढ़ाने का मौका

Sat, 12 Mar 2022 03:06 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Sat, 12 Mar 2022 03:06 AM IST
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सार
कृषि मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत खाद्यान्न उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2021-22 में देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 31.60 करोड़ टन पर पहुंच जाने का अनुमान है, जो पिछले फसल वर्ष में 31.07 करोड़ टन रहा था। इस वर्ष गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.13 करोड़ टन रहने का अनुमान है। गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष 10.95 करोड़ टन रहा था।
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Benefit of opportunity: Opportunity to increase food exports due to war between Russia and Ukraine
गेहूं की फसल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ मार्च को वित्त मंत्रालय के एक वेबिनार में कहा कि रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते भारत गेहूं के निर्यात की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के अवसर का लाभ उठा सकता है। उल्लेखनीय है कि रूस और यूक्रेन मिलकर वैश्विक गेहूं आपूर्ति के लगभग एक चौथाई हिस्से का निर्यात करते हैं। लेकिन युद्ध के चलते इन देशों से गेहूं की वैश्विक आपूर्ति रुक गई है। ऐसे में भारत सहित अन्य देशों से गेहूं और अन्य कृषि उत्पादों की निर्यात मांग बढ़ गई है। 



भारत ने फरवरी, 2022 के अंत तक करीब 66 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। अनुमान है कि मार्च, 2022 के अंत तक कुल 70 लाख टन से अधिक गेहूं का निर्यात हो सकता है। चूंकि इस समय वैश्विक स्तर पर गेहूं के दाम दस साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं और भारत के गेहूं के दाम भी करीब 320 डॉलर से बढ़कर 360 डॉलर प्रति टन हो गए हैं, ऐसे में यह परिदृश्य भारतीय गेहूं निर्यातकों के लिए एक अवसर है। 


यह भी लाभप्रद है कि गेहूं के अन्य वैश्विक उत्पादकों की तुलना में देश में गेहूं की नई फसल मार्च, 2022 से उपलब्ध हो जाएगी। इसलिए इस समय जो वैश्विक बाजार में गेहूं की भारी कमी निर्मित हुई है, उसे भारत तेजी से भर सकता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि इस समय भारत के करीब 2.5 करोड़ टन से अधिक के विशाल गेहूं भंडार से अधिक निर्यात की संभावनाओं को मुट्ठियों में लिया जा सकता है। साथ ही यदि खाद्यान्न के वैश्विक बाजार की स्थिति इसी तरह बनी रहती है, तो भारत का गेहूं निर्यात 2022-23 में एक करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। 

निस्संदेह जिस तरह कोविड-19 की आपदाओं के बीच भारत ने वैश्विक स्तर पर दुनिया के जरूरतमंद देशों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई, उसी तरह एक बार फिर रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते भारत से गेहूं सहित अन्य खाद्यान्नों की मांग कर रहे जरूरतमंद देशों को खाद्यान्नों के अधिक निर्यात का मौका उभरकर दिखाई दे रहा है। ज्ञातव्य है कि देश में गेहूं सहित खाद्यान्नों के रिकॉर्ड उत्पादन के मद्देनजर भी कृषि निर्यात की नई संभावनाएं बढ़ गई हैं। 

कृषि मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत खाद्यान्न उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2021-22 में देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 31.60 करोड़ टन पर पहुंच जाने का अनुमान है, जो पिछले फसल वर्ष में 31.07 करोड़ टन रहा था। इस वर्ष गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.13 करोड़ टन रहने का अनुमान है। गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष 10.95 करोड़ टन रहा था। 2021-22 के दौरान चावल का कुल उत्पादन 12.79 करोड़ टन रिकॉर्ड अनुमानित है। 

साथ ही, इस साल तिलहन उत्पादन 3.71 करोड़ टन रह सकता है, जो पिछले साल के 3.59 करोड़ टन से ज्यादा है। इस समय देश के कृषि निर्यात परिदृश्य पर विभिन्न अनुकूलताएं हैं, लेकिन कृषि निर्यात को देश की नई आर्थिक शक्ति बनाने के लिए कई बातों पर विशेष ध्यान देना होगा। सरकार द्वारा कृषि उपज का अच्छा विपणन सुनिश्चित करने की जरूरत है। कृषि पदार्थों के निर्यात बढ़ाने में भारत के कृषि अनुसंधान और कृषि मानकों की भूमिका को और प्रभावी बनाना होगा। खराब होने वाले कृषि उत्पादों जैसे फलों और सब्जियों के लिए लॉजिस्टिक्स सुदृढ़ करने की भी जरूरत है। 

हम उम्मीद कर सकते हैं कि रूस-यूक्रेन संकट से भारतीय खाद्यान्न निर्यातकों के लिए निर्मित खाद्यान्न निर्यात की नई मांग के कारण 31 मार्च तक चालू वित्त वर्ष 2021-22 में कृषि निर्यात के 43 अरब डॉलर के लक्ष्य को सरलता से प्राप्त कर लिया जाएगा तथा आगामी वित्त वर्ष 2022-23 में कृषि निर्यात के 60 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को भी हासिल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा जा सकेगा। कृषि निर्यात बढ़ने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इससे ग्रामीण भारत की समृद्धि बढ़ने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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