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भैंस के आगे बीन!

Thu, 08 Jan 2015 07:21 PM IST
पूरन सरमा
पूरन सरमा Updated Thu, 08 Jan 2015 07:21 PM IST
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Bean in front buffalo

भैंस के आगे मैंने बीन बजाई, तो उसने अपना सिर हिलाकर मना कर दिया। मैंने कहा, क्यों, बीन अच्छी नहीं लगती? इस बार भैंस कोई जवाब न देकर जोर से रंभाई, तो उसकी आवाज सुनकर ज्ञानी जी प्रकट हुए। वह मुझसे बोले, क्यों भैंस को परेशान कर रहे हो, बोलो क्या बात है? मैंने कहा, आप अकस्मात यहां कैसे? वह बोले, भाई शर्मा, मैं वहां-वहां हूं, जहां-जहां भैंस के आगे बीन बजाई जा रही है। भैंस बेचारी क्या जाने कि बीन में कौन-सा राग बजाया या गाया जा रहा है? मुझसे पूछो, मैं बताता हूं। मैं बोला, तो बताओ, मैंने बीन क्यों बजाई? ज्ञानी जी बोले, तुम अपने आप से परेशान हो, तुम्हारी समझ में नहीं आ रहा कि इस देश का क्या होगा। मेरा मतलब बिगड़ती कानून-व्यवस्था तुम्हारी परेशानी का सबब है।

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मैं अचंभित रह गया कि ज्ञानी जी ने मन की बात कैसे जान ली। वह आगे बोले, देखो शर्मा, भैंस के आगे मूर्ख लोग ही बीन बजाते हैं और वे ही सदैव परेशान रहते हैं। वे अपनी चिंता न करके देश की चिंता करते हैं। अरे भाई, देश के दुख से दुर्बल क्यों हो रहे हो? देश को नेता संभालेंगे, हमने उनको सत्ता सौंप रखी है। वे हमे पाताल में नहीं ले जाएंगे।
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मैंने कहा, पर देश पाताल में ही जा रहा है। दिनों-दिन व्यवस्था और अवस्था बिगड़ती जा रही है। नेता देश को लूट रहे हैं। गबन-घोटाने कर रहे हैं। ज्ञानी जी बोले, इसका जवाब भी मेरे पास है। इसके लिए भला भैंस का माथा क्यों चाट रहे हो? मैं बोला-‘सर, मैं अवाम में जागृति लाना चाहता हूं। अब हर नागरिक को जागना होगा, वरना वे लोग देश बेच खाएंगे। बताइए आखिर ऐसा क्या है कि इतने सत्तालोलुप बढ़ रहे हैं?
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वह बोले, भाई, यह लोकतंत्र है। इसमें ऐसे ही होड़ मचती है। तभी लोकतंत्र पल्लवित होता है। कल तुम तो कहोगे कि वोट तुम्हें मिल जाए, तो बताओ भला तुम्हें कौन वोट देगा। आखिर तुम्हारे पास है ही क्या? चुनाव में हथकंडे काम आते हैं। आम आदमी को तो केवल वोट देने का अधिकार है। हालांकि आजकल आम आदमी भी पार्टी बनाने लगा है। मगर इससे होगा क्या? ईमानदारी तो धूल चाट रही है। यही ज्ञान की बात है, शर्मा। इसलिए अब तुम भैंस के आगे बीन बजाना बंद कर दो। क्यों सिर-फोड़ी करते हो? देखो कितना चैन मिलेगा। चुनाव हो तो अपना वोट दे आना।

मुझे भी लगा, ज्ञानी जी ठीक कह रहे हैं। देश की चिंता मैं अकेला क्यों करूं और भैस के आगे बीन भी क्यों बजाऊं?

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