{"_id":"0ff754e0-7b73-11e2-9052-d4ae52bc57c2","slug":"be-eligible-to-enlightenment","type":"story","status":"publish","title_hn":"आत्मज्ञान पाने के लिए सुपात्र बनो","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
आत्मज्ञान पाने के लिए सुपात्र बनो
शिवकुमार गोयल
Updated Wed, 20 Feb 2013 09:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक धनिक सेठ भगवान बुद्ध के पास पहुंचा। उसने हाथ जोड़कर कहा, महाराज, मैं आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए साधना का प्रयास करता हूं, परंतु मेरा मन ध्यान में एकाग्र नहीं हो पाता। भगवान बुद्ध ने कहा, मैं कल तुम्हारे घर आ रहा हूं। वहीं ज्ञान प्राप्ति का सरल साधन बताऊंगा। सेठ यह सुनकर गद्गद हो उठा। घर पहुंचते ही पत्नी को आदेश दिया, भगवान बुद्ध के लिए स्वादिष्ट खीर बनाना। यह हमारा सौभाग्य है कि तथागत हमारे निवास स्थान पर पधार रहे हैं।
विज्ञापन
भगवान बुद्ध कमंडल लिए अगले दिन सेठ के यहां जा पहुंचे। पूरे परिवार ने श्रद्धा भावना से उनका हार्दिक स्वागत किया। कुछ ही देर बाद पत्नी सोने की थाली में खीर परोस कर वहां ले आई। सेठ ने हाथ जोड़कर तथागत से खीर ग्रहण करने की प्रार्थना की। तथागत ने सेठ के सामने कमंडल रखकर कहा, खीर इसमें डाल दो।
विज्ञापन
सेठ ने देखा कि कमंडल में गोबर भरा हुआ है। यह देखकर वह बोला, भगवन, गोबर भरे कमंडल में खीर डालने से तो खीर खराब हो जाएगी। तथागत यह सुनकर बोले, वत्स, तुम ठीक कहते हो। सबसे पहले पात्रता विकसित करो, तभी तो आत्मज्ञान के योग्य बन पाओगे। यदि मन-मस्तिष्क में विकार तथा कुसंस्कार भरे हैं, तो वे आत्मज्ञान को आत्मसात कैसे कर पाएंगे? सेठ जी ने उसी समय संकल्प ले लिया कि वह शुद्ध आचरण तथा परोपकार के जरिये सबसे पहले सुपात्र बनेंगे, ताकि उन्हें आत्मज्ञान सहजता से प्राप्त हो सके।
विज्ञापन