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क्रिकेट: अश्विन के हाथ में बल्ला.. गेंदबाजों को ब्लू कॉलर के रूप में इस्तेमाल करते हैं बल्लेबाज, ऐसा क्यों है?

Sun, 14 Jul 2024 06:39 AM IST
Ramchandra Guha रामचंद्र गुहा
Updated Sun, 14 Jul 2024 06:39 AM IST
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सार
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अश्विन को उनकी ‘बॉलिंग स्किल’ के लिए अधिक याद किया जाएगा। लेकिन क्रिकेट पर उनके संस्मरणों की किताब के कवर पर वह हाथ में बल्ला पकड़े हुए क्यों हैं?
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Bat in Ashwin's hand Ram Chandra Guha Explains Memoir of Spinner and Indian Cricket
एक टेस्ट मैच के दौरान रविचंद्रन अश्विन (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

जब मैंने क्रिकेट पर आर अश्विन के संस्मरणों की किताब का कवर देखा तो इस बात से चकित रह गया कि उसमें लेखक बल्ले के हैंडल को उम्मीद से अपने हाथों से पकड़े सफेद कपड़ों में बैठा है। ऐसा लग रहा है, जैसे वह विकेट गिरने का इंतजार कर रहा हो और ड्रेसिंग रूम से मैदान पर जाने के बारे में सोच रहा हो।


हालांकि मैं यह जानता हूं कि अश्विन बल्लेबाजी कर सकते हैं, लेकिन उनके संस्मरणों की किताब के प्रकाशित होने से काफी पहले लोग उन्हें स्कूली क्रिकेट में विकेट लेने के बजाय रन बनाने की क्षमता के लिए जानते थे। मैंने अश्विन को ज्यादा खेलते नहीं देखा है। मैं आमतौर पर टेस्ट क्रिकेट देखता हूं। फिर भी मैंने टीवी पर उन्हें हाथ में बल्ला लेकर खेलते हुए देखा है। मैं अपनी स्मृति में उन्हें एक तेज गेंदबाज के सामने खड़ा और गेंद को शानदार तरीके से पॉइंट के पार पहुंचाते देखता रहा हूं या मैं उन्हें स्पिनर की तरफ तेजी से ट्रैक पर कूदते और गेंदबाज के सिर के ऊपर से गेंद को साइट स्क्रीन पर उछालते देखता रहा हूं।


टेस्ट क्रिकेट में अश्विन द्वारा खेली गई दो सबसे महत्वपूर्ण पारियों में इन दोनों में से कोई भी शॉट ज्यादा मायने नहीं रखता। ये पारियां वर्ष 2021 के जनवरी और फरवरी, लगातार दो महीनों में अलग-अलग मैदानों पर अलग-अलग टीमों के खिलाफ खेली गई थीं। इनमें से पहली पारी में अश्विन ने हनुमा विहारी के साथ मिलकर सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण को विफल करते हुए 40 ओवर तक एक साथ खेलकर अपनी टीम को एक ऐतिहासिक ड्रॉ तक पहुंचाया। उस पारी में अश्विन या तो फ्रंट फुट पर मजबूती से प्रहार करते दिखे या बैक फुट पर चतुराई से बचाव करते। दो ओवरों के बीच में भारत के इन दो खिलाड़ियों के बीच लंबी बातचीत होती थी।

दूसरी पारी अश्विन के घरेलू मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई थी। भारत ने पहली पारी में अच्छी बढ़त हासिल की थी, फिर भी दूसरी पारी में 106 रन पर 6 विकेट खो दिए थे। तब अश्विन आए और कोहली, कुलदीप, इशांत और सिराज के साथ साझेदारी करके भारत को 286 के कुल स्कोर तक पहुंचाया, जहां से आसानी से जीत मिल सकती थी। अश्विन ने खुद शतक बनाया, जिसमें ऑफ साइड पर कोई बैकफुट फोर्स नहीं थी, केवल कुछ डिफेंसिव प्रोड्स और एकाध लॉफ्टेड शॉट थे, लेकिन स्क्वायर के पीछे और सामने बहुत सारे शानदार स्वीप थे।

सिर्फ मैं ही नहीं, जो लोग उनकी किताब खरीदेंगे, वे भी जानते हैं कि अश्विन बल्लेबाजी कर सकते हैं। फिर भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अश्विन को उनकी ‘बॉलिंग स्किल’ के लिए अधिक याद किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि 500 से अधिक टेस्ट विकेट लेने वाले अनिल कुंबले के अलावा किसी अन्य की तुलना में भारत के लिए सबसे अधिक टेस्ट मैच जीतने वाले व्यक्ति ने अपने संस्मरणों की किताब क्यों प्रकाशित की, उसे प्रचारित किया और उसके कवर पर खुद को बल्ला पकड़े हुए क्यों दिखाया?

मैं अश्विन से कभी नहीं मिला, लेकिन मैंने उनके बारे में जो कुछ पढ़ा और सुना है, उससे लगता है कि वह दृढ़ और विचारवान व्यक्ति हैं। इसलिए यह काफी हद तक निश्चित है कि यह तस्वीर प्रकाशक या लेखक के लेखन सहयोगी सिद्धार्थ मोंगिया द्वारा नहीं, बल्कि अश्विन द्वारा ही चुनी गई होगी। फिर वह गेंद के बजाय बल्ला पकड़े कवर क्यों चाहते होंगे? मैं इस सवाल का कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकता (शायद समय के साथ अश्विन दे सकें)। मैं अनुमान लगा सकता हूं। क्या उस तस्वीर में कोई एक या उससे अधिक छिपा हुआ संदेश है? क्या अश्विन हमारा ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे थे कि विश्व और भारतीय क्रिकेट की दुनिया में गेंदबाजों की तुलना में बल्लेबाजों को अधिक पैसा, प्रसिद्धि, प्रशंसक, टीवी विज्ञापन, ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ एवं ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ पुरस्कार, सेल्फी और ऑटोग्राफ के लिए अधिक अनुरोध मिलते हैं?

क्रिकेट के खेल में बल्लेबाज लाड़-प्यार से पाले जाने वाले अभिजात वर्ग की तरह हैं और गेंदबाज अतिश्रम से पीड़ित अधीनस्थ। क्या अश्विन तस्वीर के चयन और खेल में अपनी बेहतर स्थिति के माध्यम से अपनी बात को अधिक सूक्ष्मता और संवेदनशीलता से कह रहे हैं? मैंने इस बारे में लिखा है कि क्रिकेट के खेल में मैच जिताने वाले बल्लेबाज, मैच जिताने वाले गेंदबाजों की तुलना में कहीं ज्यादा लाभ प्राप्त करते हैं। निराशाजनक रूप से यह भेदभाव सिर्फ पैसे के मामले में नहीं, उससे कहीं आगे तक जाता है।

बल्लेबाज स्टीव वॉ और रिकी पोंटिंग ने क्रमशः 57 और 72 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की, जबकि शेन वॉर्न को कभी भी यह जिम्मेदारी नहीं दी गई। वॉर्न एक शानदार क्रिकेट रणनीतिकार थे और मुझे कोई संदेह नहीं है कि वे वॉ या पोंटिंग से भी अधिक सफल टेस्ट कप्तान होते। यह पूर्वाग्रह भारतीय कप्तान के चयन में भी मौजूद है। विराट कोहली ने 68 और रोहित शर्मा ने 16 टेस्ट मैचों में भारत का नेतृत्व किया है, जबकि अश्विन ने कभी भारत की कप्तानी नहीं की है। इसका आंशिक कारण यह भी हो सकता है कि पहले वाले दोनों बल्लेबाज हैं, जबकि अश्विन मुख्य रूप से एक गेंदबाज हैं।

हम जानते हैं कि अश्विन देश के सबसे बुद्धिमान क्रिकेटरों में से एक हैं। यह निश्चित रूप से तय है कि अगर चेन्नई के इस खिलाड़ी को अपने देश की कप्तानी करने का मौका मिलता तो वह इसमें अच्छा प्रदर्शन करते, क्योंकि इंग्लैंड के रे इलिंगवर्थ और ऑस्ट्रेलिया के रिची बेनॉड के उदाहरण बताते हैं कि स्पिन गेंदबाज बेहतरीन टेस्ट कप्तान बन सकते हैं।

मुझे नहीं लगता है कि अश्विन द्वारा कवर पर फोटो का चयन उनकी कप्तानी की महत्वाकांक्षाओं के बारे में किसी तरह का संकेत है। ऐसा लगता है कि वह हमें मैदान पर और मैदान के बाहर बल्लेबाजों और गेंदबाजों के साथ व्यवहार करने के तरीकों में सामान्य पूर्वाग्रहों के बारे में जागरूक कर रहे हैं। एक तीसरा कारण यह हो सकता है कि अश्विन को वास्तव में बल्लेबाजी करना पसंद है।

वैसे, शेन वॉर्न और अनिल कुंबले को भी बल्लेबाजी करना पसंद था। शेन वार्न को इस बात का हमेशा अफसोस रहा। उन्होंने 12 टेस्ट में अर्धशतक बनाए, लेकिन उनका उच्चतम स्कोर 99 रन रहा। हालांकि लोगों को यह बात जरूर याद रखनी चाहिए कि उन्होंने कम से कम एक बार ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे उनके महान ऑस्ट्रेलियाई समकालीन हासिल करने में असफल रहे। ध्यान देने योग्य बात यह है कि वॉर्न द्वारा लिखी गई पांच पुस्तकों में से केवल दो में उनका चेहरा है, जबकि तीन में उन्हें गेंदबाजी करते या विकेट लेते दिखाया गया है। हम कुंबले द्वारा लिखे गए संस्मरण का इंतजार कर रहे हैं। जब भी वह आएगा तो उसके कवर पर 619 टेस्ट विकेट लेने वाले खिलाड़ी की तस्वीर बल्ला थामे हुए होने की संभावना नहीं है।

अब जबकि मैंने इसे पढ़ लिया है, मैं पुष्टि कर सकता हूं कि कम से कम एक अंश मेरे विश्लेषण की पुष्टि करता है कि पुस्तक का कवर ऐसा क्यों है। लेखक की बातों से वह अंश शुरू होता है, “आखिरकार गेंदबाज से बल्लेबाज बने और फिर कोच बने डब्ल्यूवी रमन के साथ एक और बातचीत होती है। मैं उन्हें वही बताता हूं, जो मैं ईमानदारी से महसूस करता हूं। गेंदबाजों को बल्लेबाजों द्वारा ब्लू कॉलर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा क्यों है कि अगर कोई गेंदबाज खराब गेंद फेंकता है तो उसे नेट्स में बल्लेबाज से माफी मांगती पड़ती है और अगर बल्लेबाज खराब शॉट खेलता है तो वह माफी नहीं मांगता है?”
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