फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   award was given by the sage

अंधेरे में पत्थर समझकर जिसे जेब मे रखा वह उजाले में हीरा निकला

Thu, 18 Jun 2015 04:07 PM IST
जानकीनाथ शर्मा
जानकीनाथ शर्मा Updated Thu, 18 Jun 2015 04:07 PM IST
विज्ञापन
award was given by the sage

ऋषि चैतन्य गुरुकुल में बालकों को शिक्षित किया करते थे। उस दिन समावर्तन समारोह था। विद्यार्थी शिक्षा पूरी कर अपने-अपने घर लौटने की तैयारी कर रहे थे। तभी ऋषिवर ने सबको मैदान में आने को कहा। मैदान में शिष्यों से ऋषि ने कहा, यहां से जाने से पहले आप एक बाधा दौड़ में हिस्सा लें, जिसके आखिरी हिस्से में आपको एक अंधेरी सुरंग से गुजरना पड़ेगा।

विज्ञापन


देखें, सांपों के यह 17 रहस्य जानकर आपके होश उड़ जाएंगे
विज्ञापन


दौड़ शुरू होते ही शिष्य तेजी से भागने लगे। भागते हुए वे अंत में सुरंग के पास पहुंचे। सुंरग में बहुत अंधेरा था, और उसमें जगह-जगह नुकीले पत्थर भी पड़े थे, जो चुभ रहे थे। जैसे-तैसे सबने दौड़ खत्म की, और ऋषि चैतन्य के सामने एकत्रित हुए। ऋषि ने किसी के बहुत जल्दी दौड़ पूरा कर लेने और कुछ के अधिक समय लेने का कारण पूछा।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक शिष्य ने जवाब देते हुए कहा, गुरुदेव, हम सभी लगभग साथ-साथ दौड़ रहे थे, पर सुरंग में पहुंचते ही स्थिति बदल गई। कोई दूसरे को धक्का देकर आगे निकला, तो कोई संभल-संभल कर आगे बढ़ा। कुछ ने तो पैरों में चुभ रहे पत्थरों को उठाकर अपनी जेब में रख लिया, ताकि पीछे आने वाले साथियों को पीड़ा न सहनी पड़े।


ऋषि ने ऐसे छात्रों को आगे आकर पत्थर दिखाने को कहा। कुछ शिष्य सामने आए और जेब से पत्थर निकालने लगे। मगर जिन्हें वे पत्थर समझ रहे थे, वे बहुमूल्य हीरे थे। सभी आश्चर्य से ऋषिवर की ओर देखने लगे।

ऋषिवर ने कहा, आश्चर्य करने की जरूरत नहीं। इन्हें मैंने ही सुरंग में डाला था, और यह दूसरों के लिए सोचने वाले शिष्य को मेरा पुरस्कार है। संसार में हर कोई कुछ न कुछ पाने के लिए भाग रहा है। मगर अंत में वही समृद्ध होता है, जो दूसरों के बारे में सोचने और उनका भला करने से नहीं चूकता।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed