आकलन: पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं, अब पड़ेगी मुद्रा और मौसम की मार
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विस्तार
भारत और पाकिस्तान युद्ध विराम पर सहमत हो गए हैं, जो लागू भी हो गया है। हालांकि अपनी आदत से बाज नहीं आने वाला पाकिस्तान संघर्ष विराम के कुछ ही घंटों बाद उसका उल्लंघन करने लगा, लेकिन भारत की ओर से करारा जवाब मिलने पर अब फिलहाल शांति है। उम्मीद है कि दोनों डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच संभवतः अटारी सीमा पर आज दुबारा बातचीत होगी, जो केवल युद्ध विराम बनाए रखने और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर केंद्रित होगी। कोई दूसरा विषय नहीं उठाया जाएगा। यदि आगे कोई बातचीत होगी भी, तो राजनीतिक स्तर पर होगी। डीजीएमओ के बीच ऐसी आखिरी बैठक दिसंबर, 2013 में हुई थी, जब भारत ने पाकिस्तान द्वारा लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। तब संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, जो मौजूदा संकट तक कायम रहा।
वर्तमान बैठक दोनों पक्षों की ओर से कुछ दिनों तक रणनीतिक उद्देश्यों के लिए चले गहन सैन्य अभियानों के बाद हो रही है। पाकिस्तान की ज्यादातर मिसाइलें और ड्रोन नष्ट कर दिए गए, जबकि भारतीय मिसाइलें खुलेआम अपना लक्ष्य भेदती रहीं। भारत द्वारा उसके कई हवाई अड्डों को निशाना बनाए जाने के बाद पाकिस्तान में दहशत फैलनी शुरू हो गई, जिससे वे अस्थायी रूप से बेकार हो गए। इसके अलावा, कुछ पाकिस्तानी विमान भी नष्ट कर दिए गए।
पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने केवल सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, पर हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी। उसने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया, जिससे निर्दोष नागरिक प्रभावित हुए, जिसके कारण भारत को उनके ड्रोन लॉन्च पैड को निशाना बनाना पड़ा। भारत ने आम नागरिकों को काफी हद तक क्षति से बचा लिया है।
किसी भी संघर्ष को जारी रखने के लिए अर्थव्यवस्था, तेल और गोला-बारूद भंडार जरूरी है। यहीं पर पाकिस्तान पिछड़ जाता है। ऐसी खबरें हैं कि उसके तेल भंडार तेजी से कम हो रहे हैं और उसने अपने लोगों को तेल की बिक्री सीमित कर दी है। हिंद महासागर पर हावी भारतीय नौसेना पाकिस्तानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर सकती है, जिससे तेल ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही बाधित हो सकती है। पश्चिम एशियाई देश, जो पहले उन्हें असीमित तेल की आपूर्ति करते थे, अब ऐसा नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान जैसा कर्ज में डूबा देश संघर्ष में उलझने पर और भी डूब जाएगा, जिससे उबरना मुश्किल हो जाएगा। अगर सैन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो पाकिस्तान लंबे समय तक युद्ध में टिक नहीं सकता है। साथ ही, पाकिस्तान अपनी विचारधारा से बंधा हुआ है। उसने अपने नागरिकों के सामने खुद को भारत से बेहतर बताया है, जबकि इसके सैन्य और असैन्य, दोनों नेता अपनी कमियों से वाकिफ हैं। यह तब है, जब पाकिस्तान भारत से हर युद्ध हारता रहा है। पहलगाम आतंकी हमले से ठीक पहले दो राष्ट्र सिद्धांत पर जनरल असीम मुनीर का बयान इसका उदाहरण है। पाकिस्तान के पास एक संगठित फर्जी मीडिया नेटवर्क है, जिसे उसकी सेना की मीडिया सेल (डीजीआईएसपीआर) नियंत्रित करती है, जबकि एक लोकतंत्र होने के नाते भारत के पास ऐसी कोई संगठित संस्था नहीं है। पाकिस्तान के डीजीआईएसपीआर में सैकड़ों ऐसे इंटर्न हैं, जिनका एकमात्र काम फर्जी खबरें फैलाना है, जिसमें उनके सशस्त्र बलों की सफलता और भारत की विफलता को उजागर किया जाता है। पिछले कई वर्षों से यही उनका रवैया रहा है। इनमें से कई हैंडल भारतीय नामों से हैं, जिससे भारतीय पाठकों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इन हैंडल के पिछले पोस्ट की छानबीन करने पर ही वास्तविकता का पता चलता है, जो आमतौर पर कभी नहीं किया जाता। एक ही हैंडल द्वारा आगे बढ़ाया गया प्रत्येक संदेश कई लोगों के समर्थन से प्रामाणिक-सा दिखने लगता है और नवीनतम जानकारी चाहने वाले आम सोशल मीडिया फॉलोअर को भ्रमित करता है।
एक्स (ट्विटर) पर कई चीनी ट्विटर अकाउंट उभर कर सामने आ रहे हैं, जो मौजूदा संघर्ष में पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं। चीनी हैंडल, जिनमें ग्लोबल टाइम्स जैसे उनके आधिकारिक सरकारी मुखपत्र भी शामिल हैं, इस्लामाबाद के विचारों और तथाकथित सफलताओं की जानकारियों को पेश करने के अलावा, पाकिस्तान को बीजिंग द्वारा आपूर्ति किए गए उपकरणों की विफलताओं को छिपाने के लिए बेताब हैं, जिनमें उनके प्रसिद्ध एचक्यू-9पी और एचक्यू-16 शामिल हैं।
एक बार जब चीनी उपकरणों की विफलता उजागर होती है, तो ये अकाउंट बहस में कूद पड़ते हैं और अपने उत्पादों का बचाव करते हैं। भारत के एस-400 एंटी-मिसाइल सिस्टम को नष्ट करने के उनके दावे, जिसका भारतीय सशस्त्र बलों ने खंडन किया है, इसका एक उदाहरण है। वास्तविकता यह है कि इस ताजा संघर्ष में चीनी उपकरण विफल हो गए हैं। चीनी एयर डिफेंस सिस्टम भारत द्वारा दागी गई एक भी मिसाइल का पता नहीं लगा सका और न ही उसे नष्ट कर सका।
यहां तक कि भारत द्वारा दागे गए ड्रोन भी पाकिस्तान के भीतर तक पहुंच गए, लेकिन चीनी वायु रक्षा प्रणाली उन्हें नहीं पकड़ पाई, जबकि पाकिस्तान द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइलों का पता लगाकर भारत ने उसे नष्ट कर दिया। भारत की घरेलू वायु रक्षा प्रणाली और एस-400 का संयोजन एक शानदार सफलता रही है। चीनी प्रणालियों की कमियां भारत के अलावा ताइवान और अमेरिका के लिए भी बहुत फायदेमंद होंगी। कुल मिलाकर, भारत ने पाकिस्तान को कई क्षेत्रों में निशाना बनाया। वैश्विक आतंकवादियों के साथ उसकी सेना की तस्वीरें प्रदर्शित करके आतंकवाद को पाकिस्तान का समर्थन दर्शाने के अलावा, भारत ने पाकिस्तान से व्यापार बंद कर दिया। इससे वहां दवाइयां महंगी हो जाएंगी, क्योंकि उनकी कीमत भारतीय एपीआई के कारण कम थीं, जिससे आम पाकिस्तानियों को परेशानी होगी। विश्व बैंक द्वारा सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) मामले में हस्तक्षेप करने से इन्कार करने के कारण पाकिस्तान को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है, खासकर आगामी खरीफ सीजन में।
इसके अलावा, भले ही युद्ध विराम जारी रहे, भारत आईडब्ल्यूटी को मौजूदा स्तर पर रखने से इन्कार कर देगा, खासकर तब, जब उसे अब वैश्विक समर्थन प्राप्त है। पाकिस्तान की जल आपूर्ति हमेशा भारत के नियंत्रण में रहेगी। पाकिस्तान ने निर्दोष भारतीय पर्यटकों को निशाना बनाकर गलती की। इससे उसे रणनीतिक नुकसान होगा। इसकी कीमत उसे कई पीढ़ियों तक अपनी अर्थव्यवस्था पर चुकानी पड़ेगी। युद्ध विराम भले हो जाए, लेकिन पाकिस्तान ने पहले ही भारी कीमत चुका दी है।