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कृत्रिम मेधा: मशीन हमें ज्यादा मानवीय बनाएगी

Mon, 25 Dec 2023 07:34 AM IST
Andrew Golis एंड्र्यू गोलिस
Updated Mon, 25 Dec 2023 07:34 AM IST
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सार
पहली बात यह कि ये बड़े सोशल प्लेटफॉर्म्स से मौलिक और रचनात्मक वेब समुदायों के बीच हमारे जाने की प्रक्रिया को गति देंगे। हम पहले ही उन फीड से थक चुके हैं, जो हमारी दुश्चिंता और बढ़ाती है, जबकि इसके एल्गोरिदम (कलन विधि) क्रूरता को बढ़ावा देते हैं।
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Artificial Intelligence: Machines will make us more human
एआई टूल्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कृत्रिम मेधा को न तो मैं चमत्कारी बदलाव लाने वाला मानता हूं और न ही विनाशकारी। इंटरनेट, स्मार्टफोन और बदलाव लाने वाली दूसरी तकनीकों की तरह कृत्रिम मेधा का भी असर अच्छा और खराब, दोनों होगा। हमें बस इसमें संतुलन बनाने का काम करना होगा। अलबत्ता इसी दौरान हमने स्तब्ध करने वाली घटनाएं देखी हैं, जो हालांकि प्रत्याशित ही थीं। हमने पाया कि लालची प्रकाशकों और प्रोपोगैंडा रचने वाले कुटिल लोगों ने कृत्रिम मेधा के जरिये नकली और औसत कंटेट रचकर पूरे वेब को जैसे भर दिया है।


इस होड़ में कुछ अच्छी चीजें भी होंगी। जैसे, यह होड़ हमें स्वस्थ सोच वाले ऑनलाइन समुदायों के बीच ले जाएगी। यह लेखकीय रचनात्मकता को रेखांकित करेगी और उसे बढ़ावा देगी। और यह अगर स्वतंत्र मीडिया की नई पीढ़ी के जन्म लेने में मदद करे, तो भी आश्चर्य नहीं। रोबोट अंततः इंटरनेट को ज्यादा  मानवीय बनाएंगे।


पहली बात यह कि ये बड़े सोशल प्लेटफॉर्म्स से मौलिक और रचनात्मक वेब समुदायों के बीच हमारे जाने की प्रक्रिया को गति देंगे। हम पहले ही उन फीड से थक चुके हैं, जो हमारी दुश्चिंता और बढ़ाती है, जबकि इसके एल्गोरिदम (कलन विधि) क्रूरता को बढ़ावा देते हैं। कृत्रिम मेधा एल्गोरिदम से चालित डिजिटल पब्लिशिंग की अंधी दौड़ को उसके प्राकृतिक निष्कर्ष तक पहुंचाएगी : नतीजतन बड़ी फीड वाले सोशल प्लेटफॉर्म्स कभी न खत्म होने वाले शोर-शराबे के मंच के रूप में रह जाएंगे। जब हम इन सोशल प्लेटफॉर्म्स को हमेशा के लिए छोड़ देंगे, तब निश्चित तौर पर कुछ समय के लिए हमें खालीपन महसूस होगा, क्योंकि अब तक इसके हम आदी हो चुके हैं। लेकिन जैसे ही हम ऐसे प्लेटफॉर्म का हिस्सा बनेंगे, जहां समझदारी की उम्मीद की जाती है, और जहां मात्रा पर गुणवत्ता को तरजीह दी जाती है, वैसे ही हमें इस बात की खुशी होगी कि हम वास्तविक दुनिया के अनुभवों से जुड़ रहे हैं।

दूसरी बात यह कि लेखकहीन कंटेट की बहुलता वास्तविक रूप से लेखकीय रचनात्मकता के चमकने और सामने आने में मददगार साबित होगी। अंतत: कृत्रिम मेधा चालित यह तीव्र रूपांतरण मीडिया आर्थिकी के साथ मिलकर स्वतंत्र मीडिया के एक नए दौर का सूत्रपात करेगा। हमने पिछले कुछ वर्षों में समुदायों द्वारा वित्तपोषित स्वतंत्र पत्रकार देखे हैं। इनमें से कुछ विफल हुए, तो कुछ की ऊर्जा चुक गई। इसके बावजूद इस क्षेत्र में फलते-फूलते उद्यमियों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। कुछ प्रतिभाशाली पत्रकार हाल के दौर में कम्युनिटी फंडिंग से संभव हुई सफलता की कहानियां देखेंगे, वे कृत्रिम मेधा के जरिये समझदार प्लेटफॉर्म पर पहुंचेंगे और लेखकीय रचनात्मकता को परखेंगे, स्थापित मीडिया में अपनी संभावनाओं का आकलन करेंगे। अगर हम भाग्यशाली हुए, तो हम स्वतंत्र मीडिया व्यवसाय की नई पीढ़ी को पनपते देखेंगे, जिसका काम मनोरंजक भी होगा और अजीब भी, भंगुर भी होगा और रचनात्मक भी, जैसा कि इनके रचयिता इन्हें बनाना चाहेंगे।  
 
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