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मशीनें मौलिक कहानियां नहीं सुना सकतीं: फिलहाल मानवीय रचनाधर्मिता की बराबरी कठिन... चूक की आशंका भी बनी रहती है
Sat, 25 Oct 2025 05:19 AM IST
ज्योति भास्कर
मार्गरेट रेनकल, द न्यूयॉर्क टाइम्स
मार्गरेट रेनकल, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 25 Oct 2025 05:19 AM IST
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अमर उजाला प्रिंट / एआई
विस्तार
वर्ष 2022 के अंत में, जब चैटजीपीटी जारी किया गया, तो मुझे इस बात की चिंता नहीं थी कि इससे मुझे और ज्यादातर लोगों को व्यक्तिगत रूप से कितनी परेशानी हो सकती है। मैंने सोचा कि कोडिंग जैसे कुछ व्यवसायों पर बुरा असर पड़ेगा, लेकिन मानवीय गुण-जैसे, गर्मजोशी, सहानुभूति और रचनात्मकता निश्चित रूप से मशीनों की ठंडी उंगलियों से अछूते रहेंगे। चैटबॉट्स को भले ही एक मजेदार ट्रिक के तौर पर पेश किया जाता हो, लेकिन ये कभी भी शिक्षकों, चिकित्सकों या कलाकारों की जगह नहीं ले पाएंगे।
मैंने 2022 में चैटजीपीटी से कहा, ‘मार्गरेट रेनकल की शैली में मॉकिंगबर्ड्स पर एक निबंध लिखें।’ उसने जो लिखा, वह एक निबंध नहीं, बल्कि एक ऐसे निबंध की नकली आलोचना थी, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। उसके निबंध की शुरुआत देखिए, ‘साहित्य और संस्कृति में मॉकिंगबर्ड्स को अक्सर मासूमियत और पवित्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, और ये लंबे समय से लेखकों और पाठकों, दोनों की कल्पना पर छाए हुए हैं। अपने निबंध ‘ऑन मॉकिंगबर्ड्स’ में, मार्गरेट रेनकल इन आकर्षक पक्षियों के अनेक अर्थों और उनसे जुड़े संबंधों की पड़ताल करती हैं, और हमारी सांस्कृतिक कल्पना में उनके स्थायित्व पर विचार करती हैं।’
एक दसवीं कक्षा का छात्र भी ऐसी सामान्य बातों और घिसे-पिटे मुहावरों से बचना जानता होगा। मैं उस ‘निबंध’ को पढ़ते हुए पूरे समय हंसती रही। लेकिन अब मैं हंस नहीं रही हूं। ई-बुक्स और ऑडियोबुक्स द्वारा कॉपीराइट सामग्री की चोरी को सरल बनाने से पहले ही, वर्ड प्रोसेसिंग प्रोग्रामों में कॉपी-पेस्ट को संभव बना दिया था, जिससे लेखकों और संपादकों के लिए आर्थिक संकट पैदा हो गया है। लेकिन एआई ने जो किया है, उसके सामने इस तरह की चोरी कुछ भी नहीं है। एआई के जरिये कोई भी किसी भी लेखक की शैली में किताबें और निबंध लिख सकता है, जिसका काम मशीन लर्निंग के विशाल पेट में डाल दिया गया हो। पिछले हफ्ते मैंने चैटजीपीटी को वही प्रॉम्प्ट दिया, जो मैंने लगभग तीन साल पहले दिया था। इस बार उसने जो लिखा, वह बेहतरीन निबंध तो नहीं है, लेकिन निबंध जरूर है। यह एक ऐसे रूपक का आविष्कार करता है, जिसका मैंने पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन जो उस रूपक से काफी मिलता-जुलता है, जिसका मैं अक्सर इस्तेमाल करती हूं।
अगस्त 2023 में, द अटलांटिक ने पायरेटेड किताबों की एक सूची प्रकाशित की, जिनका इस्तेमाल मेटा ने अपने वृहद भाषा मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया था। मेरी पहली किताब लेट माइग्रेशन्स उस सूची में थी। लेट माइग्रेशन्स लिखना रिश्ते का एक मूर्त अनुभव था। यह मेरी मां के जन्म से शुरू होकर उनकी मृत्यु पर समाप्त होता है। यह प्रेम, दुख और प्राकृतिक संसार के सांत्वना के बारे में है। मैंने इसे अन्य लेखकों के समूह के साथ मिलकर लिखा, जिनमें मैरी लॉरा फिल्पोट भी शामिल हैं। मैरी लॉरा की पहली किताब आई मिस यू व्हेन आई ब्लिंक भी एंथ्रोपिक के वृहद भाषा मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग की जाने वाली रचनाओं की सूची में है। मैरी लॉरा और मैंने उन किताबों के बड़े हिस्से एक-दूसरे की रसोई की मेजों पर लिखे। वे किताबें किसी ऐसी चीज की वजह से हैं, जिसे बड़े भाषा मॉडल कभी दोहरा नहीं सकते। उपन्यासकार एंड्रिया बार्ट्ज ने जब द अटलांटिक की सूची में अपनी किताबों को देखा, तो वह दंग रह गईं। उन्होंने द टाइम्स में लिखा था, ‘इन नए, चर्चित चैटबॉट्स की कंपनियों ने दशकों के कठिन परिश्रम को एल्गोरिदम द्वारा पल भर में निगल ली जाने वाली टेक्स्ट फाइलों तक सीमित कर दिया।’
अगस्त, 2024 में बार्ट्ज एंथ्रोपिक के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन के एक सामूहिक मुकदमे में वादी बन गईं। पिछले महीने एंथ्रोपिक ने 1.5 अरब डॉलर में यह मामला निपटाया, जो इतिहास का सबसे बड़ा कॉपीराइट समझौता है। यह समझौता एक बड़ी उपलब्धि है, जो इन कंपनियों को दूसरे लेखकों की रचनाएं चुराने से पहले दो बार सोचने पर मजबूर कर सकता है। मशीनें यह मान लेती हैं कि मानवीय दया और दुख अब रोबोट्स के दायरे में हैं। लेकिन अपनी कहानियां सुनाना हमारे जीवन को सार्थक बनाने के प्रमुख तरीकों में से एक है। यकीनन यही हमें इन्सान बनाता है। चैटबॉट्स आजकल कभी-कभी बुरी तरह से अभिनेताओं, शिक्षकों और चिकित्सकों की जगह ले लेते हैं। ऐसे संकेत हैं कि उपयोगकर्ताओं का एआई से मोहभंग हो रहा है। मैं इस बात पर अडिग हूं कि इन्सान किसी मशीन के पुर्जे नहीं हैं, और खासकर हमारा रचनात्मक काम अपूरणीय है। हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें एक अनोखी छाप छोड़ते हैं।
इंडस्ट्री 4.0
यह चौथी औद्योगिक क्रांति को दर्शाता है, जिसमें पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के साथ जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक स्मार्ट, स्वचालित और कुशल बनाना है। इसमें मुख्य रूप से इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), बड़े डाटा विश्लेषण, क्लाउड कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और साइबर-फिजिकल सिस्टम्स जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों की मदद से मशीनें आपस में जुड़कर डाटा साझा करती हैं और स्वतः निर्णय ले सकती हैं। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है, लागत घटती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है, लेकिन मानवीय हस्तक्षेप कम होने से बड़ी चूक की आशंका भी बनी रहती है।
©The New York Times 2025