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सेना की मानद उपाधियां और सितारे

Fri, 19 Oct 2012 09:31 PM IST
प्रदीप कुमार
प्रदीप कुमार Updated Fri, 19 Oct 2012 09:31 PM IST
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article of Pradeep Kumar on 2014 army
अपने देश में खेल सितारों और खासकर कामयाब क्रिकेटरों का दरजा भगवान से कम नहीं है। लाखों फैंस की दीवानगी और करोड़ों रुपयों की बरसात करने वाला कॉरपोरेट जगत आपस में मिलकर इन सितारों की छवि को लार्जर देन लाइफ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। दुनिया भर के मुकाबले भारत में यह चलन कुछ ज्यादा ही है।
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खेल के मैदान में जोरदार प्रदर्शन आपको आइकन की सूची में ला खड़ा करता है, भले ही निजी जिंदगी में आपकी गतिविधि बस अपने कारोबारी साम्राज्य तक ही सीमित क्यों न हो। इन आइकनों की छवि का फायदा उठाने की कोशिश भी खूब होती है। निजी कंपनियों के अलावा सरकारी तंत्र भी इससे अछूता नहीं है।
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इसी क्रम में भारतीय सेना और वायुसेना ने मानद ओहदे देने की शुरुआत की। क्रिकेट की दुनिया के सबसे बड़े सितारे सचिन तेंदुलकर को सितंबर, 2010 में वायुसेना ने ग्रुप कैप्टन का मानद पद दिया, और विगत नवंबर में महेंद्र सिंह धोनी को प्रांतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल का पद दिया गया। ऐसा फैसला लेने वालों की सोच संभवतः यही रही होगी कि इन खिलाड़ियों के जुड़ने से भारतीय युवाओं को सेना से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।
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ऐसा तब होता, जब सचिन और धोनी भारतीय सेना के कुछ कार्यक्रमों में हिस्सा लेते और जवानों के साथ भारतीय युवाओं को कुछ संदेश देते। धोनी पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर की सीमा पर सेना के जवानों का मनोबल बढ़ाने जरूर गए थे। जिस सुखोई विमान उड़ाने को वायुसेना के जवान जीवन का सबसे बड़ा गौरव मानते हैं, उस विमान में उड़ान भरने का आमंत्रण इन दोनों

खिलाड़ियों को पूर्व वायुसेना अध्यक्ष पीवी नाईक ने दिया था। पर इन दोनों ने इसके प्रति कोई उत्साह नहीं दिखाया। वायुसेना की 80वीं सालगिरह पर एयर चीफ मार्शल ने सचिन तेंदुलकर के रवैये पर नाराजगी जताई थी। इसके दो दिन बाद प्रांतीय सेना की परेड से धोनी भी नदारद रहे, जबकि उन्हें प्रांतीय सेना की ओर से मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि दी गई। सेना के लिए उसकी सालगिरह का मौका सबसे अहम होता है, लेकिन इस अवसर पर न धोनी मौजूद थे, न तेंदुलकर और न ही अभिनव बिंद्रा, जिन्हें धोनी के ही साथ मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि दी गई थी।

खेल सितारों द्वारा राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दों पर उदासीनता दिखाने का यह पहला मौका नहीं है। 2009 में भी महेंद्र सिंह धोनी और हरभजन सिंह पद्म सम्मान हासिल करने राष्ट्रपति भवन नहीं पहुंचे थे। तब इन्होंने वहां उपस्थित न होने की सूचना भी पहले से नहीं दी थी। बाद में यह बात सामने आई थी कि ये दोनों क्रिकेटर उस दिन किसी विज्ञापन की शूटिंग में व्यस्त थे! दरअसल समय की कमी का बहाना तर्कसंगत नहीं दिखता। यह प्राथमिकता से जुड़ा मसला है।

हालांकि इन विवादों की बीच कुछ खेल सितारों ने अपने दायित्वों को बखूबी समझा भी है। सायना नेहवाल ने पिछले दिनों हैदराबाद स्थित वायुसेना अकादमी में पहुंचकर प्रशिक्षण देने वाले जेट में उड़ान भरी और वायुसेना के जवानों का हौसला भी बढ़ाया। वहीं प्रांतीय सेना की परेड में कपिल देव पूरे समय तक मौजूद रहे, जिन्हें 2008 में प्रांतीय सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि दी गई थी। कपिल देव के अलावा केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट भी सेना की ड्रेस में पूरे आयोजन के दौरान नजर आए। उन्हें वॉलिंटियर सेना में अधिकारी का कमीशन दिया गया है। मलयाली सुपर स्टार मोहन लाल प्रांतीय सेना की सभी परेडों और अभ्यास शिविरों में शामिल होते हैं।


ऐसे में मानद उपाधियों के लिए सितारों का चयन सोच-समझकर करने में ही भलाई है। सचाई यह है कि मैदान में सक्रियता के दौर में किसी खिलाड़ी के पास दूसरी चीजों के लिए वक्त कम ही होता है। हो सकता है कि उसके दिल में देशप्रेम का जज्बा हो, लेकिन व्यावहारिक मुश्किलों के चलते वह अपना वक्त नहीं दे पाए। यह भी हो सकता है कि खेल सितारों को मानद उपाधि तब दी जाए, जब उनका करियर खत्म हो चुका हो। कपिल देव का उदाहरण सामने है। इससे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ी गरिमा को कायम रखने में मदद मिलेगी।
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