फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Anmol Rodriguez acid attack survivor says Life does not end with acid attack

मंजिलें और भी हैं: तेजाब हमले से जीवन समाप्त नहीं हो जाता

Wed, 11 Sep 2019 04:43 AM IST
अनमोल रॉड्रिग्ज अनमोल रॉड्रिग्ज
अनमोल रॉड्रिग्ज Published by: अनमोल रॉड्रिग्ज Updated Wed, 11 Sep 2019 04:43 AM IST
विज्ञापन
Anmol Rodriguez acid attack survivor says Life does not end with acid attack
अनमोल रॉड्रिग्ज - फोटो : अमर उजाला

अक्सर लोगों को लगता है कि तेजाब हमले से अगर कोई लड़की जली है, तो जरूर यह किसी सिरफिरे आशिक का काम होगा, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ। उस समय मैं छोटी थी, मेरी मां ने मुझे अपनी गोद में ले रखा था, जब मेरे पिता ने गुस्से में आकर उन पर तेजाब फेंका। मेरे पिता इस बात से नाराज थे कि मां ने एक बेटी को जन्म दिया है। मां ने मुझे तो ढंक लिया पर वह खुद को नहीं बचा सकीं। मैं मुंबई की रहने वाली हूं। मेरा चेहरा झुलस गया, जबकि एक आंख जाती रही।


loader

अक्सर लोगों को लगता है कि तेजाब हमले से अगर कोई लड़की जली है, तो जरूर यह किसी सिरफिरे आशिक का काम होगा, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ। उस समय मैं छोटी थी, मेरी मां ने मुझे अपनी गोद में ले रखा था, जब मेरे पिता ने गुस्से में आकर उन पर तेजाब फेंका। मेरे पिता इस बात से नाराज थे कि मां ने एक बेटी को जन्म दिया है। मां ने मुझे तो ढंक लिया पर वह खुद को नहीं बचा सकीं। मैं मुंबई की रहने वाली हूं। मेरा चेहरा झुलस गया, जबकि एक आंख जाती रही।

इस घटना के बाद मेरे पिता को जेल हो गई और मुझे अस्पताल में पहुंचा दिया गया, जहां मैं कुछ साल तक रही। मेरा इलाज चल रहा था। मेरा ऐसा कोई नहीं था, जिसके पास मैं जाती और ना ही किसी ने मुझे अपनाया। अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों ने मेरी देखभाल की और बाद में मुझे मानव सेवा संघ अनाथालय को सौंप दिया। वहीं मेरा पालन-पोषण हुआ, वहां बिना किसी भेदभाव के मुझे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाई गई और मेरी देखभाल की गई।

स्कूल खत्म होने के बाद मैंने उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में प्रवेश लिया, तो चीजें बदलने लगीं। कॉलेज में आकर पहली बार मेरा भेदभाव से सामना हुआ। स्कूल के लोग मुझे अजीब से लग रहे थे, कोई भी मेरा दोस्त नहीं बनना चाहता था। पहला वर्ष तो गुजर गया, पर दूसरे वर्ष में मैं तनाव में रहने लगी। मैं ज्यादातर अनाथालय में ही रहने लगी। चूंकि मैं पढ़ने में अच्छी थी और अपनी कक्षा में सबसे आगे रहती थी।

अनाथालय के अधिकारियों को मेरे रिजल्ट्स पता थे, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या दिक्कत है, लेकिन मैं उन्हें अपनी इस समस्या के बारे में नहीं बता सकी। इसके बाद अनाथालय ने एक ट्यूटर की सेवा ली, जिसने न केवल मुझे पढ़ाया, बल्कि यह एहसास दिलाया कि मुझे अपने जीवन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए बजाय इसके कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद मुझे एक निजी कंपनी में नौकरी भी मिल गई। बावजूद इसके, मेरा संघर्ष समाप्त नहीं हुआ।

लोग मुझे ऑफिस में घूरते रहते, तो मुझे बुरा लगता था। लेकिन मैं इस बार तैयार थी, जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ। लेकिन दुर्भाग्य से, कंपनी ने मुझे निकाल दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि हर किसी का ध्यान मेरे चेहरे पर जाता है। चूंकि अनाथालय में अठारह वर्ष की उम्र के बाद बाहर रहना होता है, तो मुझे किराए पर घर लेना पड़ा। एक साल के बाद, मुझे एक एनजीओ में नौकरी मिल गई। इस दौरान, मैं कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ गई और अपनी तस्वीरें पोस्ट करनी शुरू कर दी। शुक्र है, मुझे सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना नहीं करना पड़ा। मैं एक्टिंग, या मॉडलिंग करना चाहती थी, ऑडिशन के बाद कुछ ब्रांड ने प्रचार के लिए भी साइन किया है।

इसमें मेरी दोस्त ने मदद की। समाज को कुछ वापस देने के लिए, मैंने एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद के लिए एक एनजीओ की भी स्थापना की। एक आम आदमी हमारा दर्द नहीं समझ सकता, 22 साल पहले मैं जली थी, लेकिन आज भी मेरे चेहरे और आंखों से पानी आ जाता है। पसीना कई बार खराब आंख में चला जाता है, तो मिर्च लगने जैसी जलन होती है। मेरा मानना है कि, तेजाब हमले के पीड़ितों को रोजगार के समान अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें। मैं व्यावसायिक तेजाब पीड़िता मॉडल बनना चाहती हूं, जो न केवल फैशन को बढ़ावा दे, बल्कि यह जागरूकता भी फैलाए कि तेजाब जीवन को समाप्त नहीं करता है। वह केवल चेहरे को बदल सकता है, हमारी आत्मा को बर्बाद नहीं कर सकता।

(विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।)
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed