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और अंत में प्रार्थना

Fri, 08 Jul 2016 09:25 AM IST
सैयद बदरुल अहसन
सैयद बदरुल अहसन Updated Fri, 08 Jul 2016 09:25 AM IST
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And lastly a pray to almighty God
सैयद बदरुल अहसन

आज मेरे दिल के भीतर कहीं गहरे में इस ब्रह्मांड के रचयिता के लिए, जो इस पृथ्वी पर और उससे परे अपने सभी बच्चों का संरक्षक और सर्वशक्तिमान है, एक प्रार्थना उभर रही है। मेरी सामान्य-सी प्रार्थना है कि ओ सर्वशक्तिमान ईश्वर, इन बर्बरों को मुझसे, मेरे आसपास के लोगों से, हमारी आस्था और तुम्हारे ऊपर हमारे विश्वास को छीनने मत दो।

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मजहब और इस्लाम के नाम पर अंधेरे युग के इन असभ्य लोगों को निर्दोष लोगों की जान अब और मत लेने दो। मनहूस और भयावह पृष्ठभूमि वाले ये लोग मजहब और खुदा का नाम बदनाम करते हैं-ढाका, पेरिस, ब्रसेल्स, इस्तांबुल, बगदाद और मदीना समेत दुनिया भर में। इस्लामिक स्टेट (आईएस) के मुर्दनी चोले में ये लोग इस्लाम के दुश्मन हैं। कथित जेहाद की बात करने वाले ये लोग नास्तिक हैं, जो एक तांडवी मिशन पर निकल पड़े हैं और इस सृष्टि की सुंदरता को नष्ट कर रहे हैं। ये उस मजहब को कमजोर कर रहे हैं, जिसमें सदियों पहले पैगंबर मोहम्मद ने हमें रक्षा का उपाय बताया था।
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इन लोगों ने रमजान के दौरान जुम्मे की रात को ढाका के होली आर्टिसन रेस्तरां में निर्दोष पुरुषों और स्त्रियों को मौत के घाट उतार दिया। वे यहीं नहीं रुके। इन्होंने ईद के दिन हमारे पूजास्थलों पर फिर से हमला बोला। वे फिर-फिर बांग्लादेश में, और दुनिया में हर माकूल जगहों को निशाना बनाने की धमकी दे रहे हैं। इन गुमराह लोगों का, जो किसी बड़े और बेहद भयावह लोगों द्वारा प्रशिक्षित हैं और धर्म के नाम पर लोगों की हत्या करते हैं, कोई धर्म नहीं है। कैसे कोई धार्मिक आस्था के नाम पर किसी असहाय स्त्री का गला रेतकर उसकी जान ले सकता है! जो लोग ईश्वर और उसकी उदारता को जानते हैं, वे पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों की जान नहीं ले सकते, क्योंकि ऐसा करना इस्लाम ही नहीं, दुनिया के किसी भी धर्म की शिक्षा के खिलाफ है। इन लोगों ने इस्लाम के अनुयायियों को अपमानित किया है। इन्होंने ईसा, मूसा और बुद्ध, हर महान धर्मोपदेशकों का अपमान किया है, जो हमारे सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा हैं। उनके बर्बर कृत्य उन्हें सूफी मत की सुंदरता पर भी हमला करने से नहीं रोकते। ये उन लोगों को भी नहीं बख्शते, जो ईश्वर की प्रशंसा में प्रार्थना के गीत गाते हैं और जीवन देने वाले ईश्वर की उदारता की बात करते हैं।
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आज हमारा मुल्क, हमारी दुनिया और हमारे सपनों की सुंदरता-सब कुछ इन बंदूकधारी नास्तिकों की मनहूस छाया तले दब गई है, जो मस्जिद के करीब भी बम धमाके करने से नहीं चूकते। कथित जेहाद के नाम पर खूनी खेल खेलने वाले इन लोगों को जब अपने मजहब के प्रति सम्मान का भाव नहीं है, तो वे दूसरे धर्मों के प्रति भला कैसे संवेदनशील होंगे! ये इतने कमअक्ल हैं कि यह भी नहीं समझते कि यह दुनिया सभी पुरुषों, स्त्रियों और सांस लेने वाले सभी जीवों का घर है। पर इन हत्यारों की दुनिया तो उनके बंदूकों, ग्रेनेडों, आतंक उगलने वाले हथियारों से आगे नहीं जाती। वे कुरान का गलत अर्थ निकालते हैं। वे पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं की भ्रामक व्याख्या करते हैं। अपने विचारों के अथाह खोखलेपन में वे जीवन को पंगु बनाकर तेजी से मृत्यु की ओर ले जाते हैं। इन लोगों ने बांग्लादेश की सब्ज जमीं पर बेहद संवेदनहीनता के साथ हिंदुओं, ईसाइयों, मुसलमानों और विदेशियों का कत्ल किया है। इन्होंने यूरोप और उस धरती पर राजनयिकों की हत्या की, जहां इस्लाम मुसलमानों की बुनियादी आस्था है। ये लालची वह भाषा नहीं बोलते, जो पवित्र पैगंबर की भाषा है। उन्होंने हमसे हमारा मजहब चुरा लिया है और उसे तोड़-मरोड़कर हत्या और हिंसा के हथियार में बदल दिया है।

उन्होंने सीरिया में लोगों के घर जलाए, पिता-पुत्र की हत्या की, महिलाओं के साथ बलात्कार किया। अगर यही धर्म है, तो नैतिकता कहां है? दुनिया को मुंह दिखाने से डरने वाले इस्लामिक स्टेट के इन लड़ाकों ने पश्चिम एशिया के रेगिस्तानों में उदार लोगों को मौत के घाट उतार दिया। यजीदी महिलाओं का अपहरण कर उनसे बदसलूकी करने में उन्हें कोई शर्म नहीं आई। जब वे लोगों को मारने के लिए निकलते हैं, तो अपने पीछे एक काले रंग का बैनर लिए चलते हैं, जिस पर पैगंबर का नाम लिखा होता है!

मध्ययुगीन मानसिकता के ये लोग अज्ञान के अंधेरे में तो भटक ही रहे हैं, अब उन्होंने उस मुल्क यानी हमारे बांग्लादेश को भी खतरे में डाल दिया है, जहां के तीस लाख स्त्री-पुरुषों ने दशकों पहले आजादी हासिल करने के लिए अपना श्रेष्ठ बलिदान दिया था। इन्होंने उस देश की छवि बिगाड़ने की ठान ली है, जहां सभी धर्मों के प्रति समभाव की सोच व्यक्त की गई थी। ईश्वर दुनिया के इन नए दुश्मनों के खिलाफ प्रतिरोध तैयार करने के लिए लोगों में दृढ़ता, साहस और धैर्य प्रदान करे। इन लोगों की बंदगी दूसरे मजहबों के प्रति नफरत से भरी है, जो इस्लाम के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित नहीं करती। ये रात के अंधेरे में खून की तलाश में निकलते हैं और हमारी सड़कों एवं घरों में खून के छींटे बिखेर देते हैं।


इंसानियत के ये अपराधी इस्लामिक स्टेट के काले वेश में सौंदर्य, विचार, विवेक की उड़ान को नष्ट करने के अभियान पर निकल पड़े हैं। हे ईश्वर, भूतिया रात के इन शैतानी प्राणियों को हमसे हमारे विश्वास, हमारे गीत, हमारी कविता, इस धरती के सभी प्राणियों का भला करने वाली हमारी मानवीयता मत छीनने दो। बांस काटने वाले उनके दाव, उनकी बंदूकें, उनके ग्रेनेड, उनके चाकू-उनके तमाम हथियारों को नष्ट कर दो, जिसके जरिये वे इंसानियत का कत्ल करते हैं। इससे पहले कि कुछ गुमराह लोग पूरी दुनिया और उसकी अच्छाइयों को रौंद डालें, हमें आतंकवाद के खिलाफ उठ खड़े होने की जरूरत है। और यह हमारी सामूहिक इच्छाशक्ति के बूते ही संभव है। ईश्वर भी उन्हीं की मदद करता है, जो खुद अपनी मदद करते हैं। क्या हमारे नीति-नियंता सुन रहे हैं?

-लेखक बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं

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