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मुद्दा: पाकिस्तान पर एक किताब के बहाने, नाउम्मीदी के बीच एक आशावाद

Sat, 20 Jan 2024 07:42 AM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Sat, 20 Jan 2024 07:42 AM IST
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सार
इस्लामाबाद में उच्चायुक्त रहे बेहद लोकप्रिय अजय बिसारिया की हाल में प्रकाशित किताब के प्रति पाकिस्तान में भी उत्सुकता है।
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Ajay Bisaria Book on India Pakistan Diplomatic Relationship and hope of optimism in bilateral ties
Ajay Bisaria Book - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान में सर्दियां वर्षाविहीन रही हैं, जो न पर्यावरण के लिए अच्छा संकेत है, न फसलों के लिए। अनेक किसान फसलों के लिए सर्दियों की बारिश पर निर्भर हैं। पाकिस्तान में समस्याएं अकेली नहीं आतीं। कई मुद्दे हैं, जिन पर सत्ता से जुड़े अभिजात वर्ग को तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। हाल ही में पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे अजय बिसारिया की किताब प्रकाशित हुई है, एंगर मैनेजमेंट : द ट्रबल्ड डिप्लोमैटिक रिलेशनशिप बिटवीन इंडिया ऐंड पाकिस्तान। जब मैंने पिछले हफ्ते सत्ता के गलियारों में पूछा, तो पता चला कि अभी तक पाकिस्तान में किसी ने किताब नहीं पढ़ी थी, पर वे भारतीय मीडिया द्वारा प्रसारित अंशों पर टिप्पणी करने के लिए तैयार थे, जो इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध थे।



पहली नजर में लेखक ने तब की घटनाओं को लिखने का उत्कृष्ट प्रयास किया है, जब वह पाकिस्तान में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। फिर पाकिस्तान एक ऐसा विषय है, जिस पर अक्सर भारतीय पत्रकार और पाकिस्तान में काम करने वाले वरिष्ठ राजनयिक लिखते हैं, चाहे उनका कार्यकाल कितना छोटा ही क्यों न हो। भारत में 'पाकिस्तान' खूब बिकता है, खासकर तब, जब दोनों सरकारों द्वारा सभी खिड़की और दरवाजे बंद कर दिए गए हों, कोई वीजा नहीं दिया जाता हो, और अखबारों, थिएटर समूहों, संगीतकार या पत्रकारों की आवाजाही बंद है।


सम्मानित पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया कनाडा में भी काम कर चुके हैं। लेकिन मुझे संदेह है कि कनाडा के अपने कार्यकाल पर वह कोई किताब लिख सकते हैं। सुदूर कनाडा पर भला किसकी दिलचस्पी होगी? मेरी खुशी का एक और कारण यह है कि अजय बिसारिया ने खासकर बालाकोट हमले के बारे में अपनी किताब में लिखा है, मसलन, बालाकोट हमला, जहां वह दोनों मुल्कों द्वारा उच्चायुक्तों को निष्कासित करने से पहले युद्ध जैसी स्थितियों के बीच थे और कूटनीति को भारी झटका लगा था।

मैंने हमेशा अत्यंत सम्मानित पूर्व भारतीय उच्चायुक्त टीसीए राघवन से शिकायत की कि जब उन्होंने पाकिस्तान के बारे में एक ऐतिहासिक संस्मरण पुस्तक द पीपल नेक्स्ट डोर लिखी थी, तो इस्लामाबाद में उच्चायुक्त के रूप में अपने तीन वर्षों के कार्यकाल के बारे में नहीं लिखा। अजय लोकप्रिय उच्चायुक्त थे और उनके साथ बैठकर भारत-पाक रिश्तों पर बात करना काफी सुखद था। इस्लामाबाद में वरिष्ठ राजनयिकों से बात करते हुए पता चला कि अजय उनके बीच भी लोकप्रिय थे। कुछ लोगों का मानना है कि अजय बिसारिया की यह किताब भारत में लोकसभा चुनाव से पहले प्रकाशित हुई है और इसमें निश्चित रूप से प्रधानमंत्री मोदी की ताकतवर छवि के बारे में बताया गया होगा कि कैसे भारत बालाकोट हवाई हमले के बाद पाकिस्तान से मजबूती से निपटा।

मेरी नजर में पाकिस्तान का एक निर्णय ऐसा था, जिसका अधिकांश पाकिस्तानियों ने समर्थन किया था, और वह था भारतीय पायलट की रिहाई। भारत का कहना है कि उन्हें धमकियों के कारण रिहा किया गया था, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि वह वियना संधि के तहत कार्रवाई करने के लिए बाध्य था। कारण चाहे जो भी हो, पाकिस्तान में उसका स्वागत किया गया था।

उम्मीद करनी चाहिए कि अजय ने अपनी पुस्तक में इस तथ्य का उल्लेख किया होगा कि जब नियंत्रण रेखा के पार अभिनंदन वर्धमान के जेट विमान को मार गिराया गया था, जब स्थानीय लोगों ने उन्हें देखा था। और जब उनकी पहचान उजागर हुई, तो स्थानीय लोगों ने उन हमला करने की कोशिश की थी। लेकिन उनकी किस्मत अच्छी थी कि पाकिस्तानी सेना के जवान पास ही थे, जिन्होंने उन्हें बचा लिया और अपनी हिरासत में ले लिया। मेरी समझ से उस घटना के बाद सबसे बड़ा नुकसान दोनों पक्षों की कूटनीति का हुआ, जहां उच्चायुक्तों के कार्यालय को कम महत्व दिया गया और दोनों देशों के बीच अधिकांश गतिविधियां ठप पड़ गईं, जिसमें सबसे बड़ा नुकसान वीजा जारी न होने से हुआ है।

भारत और पाकिस्तान नए वर्ष में प्रवेश कर गया है, पर इस वर्ष भी द्विपक्षीय रिश्तों में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं दिखती है। दोनों मुल्कों में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में, क्या यह उम्मीद करनी चाहिए कि दोनों मुल्कों के नए नेतृत्व इस दिशा में कुछ सकारात्मक कदम उठाएंगे!

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