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खेल का मैदान: सोबर्स के बाद कौन, दूसरे महान की तयपाई में उपयोगी साबित होगी बहस
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सार
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garry sobers
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
मैं ने क्रिकेट से संबंधित जो शुरुआती किताबें पढ़ी थीं, उनमें से एक के लेखक ने याद किया था कि, उनसे कभी पूछा गया था कि, क्रिकेट के इतिहास में सार्वकालिक महान हरफनमौला क्रिकेटर कौन है। उन्होंने जवाब दिया कि वह यह तो नहीं कह सकते, लेकिन उन्हें पक्के तौर पर विश्वास था कि करखीटन गांव में जन्मा एक बाएं हाथ का गेंदबाज और दाएं हाथ का बल्लेबाज इस सम्मान का शीर्ष दावेदार है।
मुझे इस किताब का शीर्षक तो याद नहीं, लेकिन इसके लेखक थे, एए थॉमसन, जो कि यॉर्कशायर के क्रिकेटरों के कट्टर समर्थक थे। दरअसल वह विलफ्रेड रोड्स और जॉर्ज हर्स्ट को अपना आदर्श मानते हुए बड़े हुए थे। ये दोनों यॉर्कशायर के करखीटन में पैदा हुए थे, काउंटी का प्रतिनिधित्व कर चुके थे और दोनों दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे और बाएं हाथ के गेंदबाज थे।
बस फर्क यही था कि हर्स्ट तेज गेंदबाज थे और रोड्स फिरकी। क्रिकेट के महान सार्वकालिक हरफनमौला से संबंधित सवाल का यह चालाकी भरा जवाब था। थॉमसन हर्स्ट और रोड्स में फर्क नहीं करना चाहते थे, फिर भी उन्हें विश्वास था कि ये दोनों इस महान खिताब के वैध दावेदार हैं।
कर्नाटक क्रिकेट से मेरी अपनी पहचान जुड़ी होने का श्रेय एए थॉमसन के आरंभिक अध्ययन को जाता है। उन्होंने ही मुझे प्रोत्साहित किया कि खेल संबंधी प्रशंसा के पदानुक्रम में राज्य/प्रांत को देश/राष्ट्र से आगे रखना चाहिए। इसके बावजूद मैं देख सकता था कि यह पक्षपात की हद है। थॉमसन यह सब 1960 के दशक में लिख रहे थे और उस समय तक स्पष्ट हो गया था कि सार्वकालिक महान हरफनमौला के खिताब का एक ही दावेदार है। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज और गेंदबाज थे और छोटे से कैरिबियाई द्वीप बारबाडोस में पैदा हुए थे। हर्स्ट और रोड्स का देश की ओर से खेलने का शानदार रिकॉर्ड था, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनके कारनामे गारफील्ड सेंट अबन सोबर्स की तुलना में महत्वहीन थे।
क्रिकेट के दीवाने कैंब्रिज के गणितज्ञ जीएच हार्डी ने एक बार टिप्पणी की थी कि डॉन ब्रैडमैन उन सारे बल्लेबाजों से अलग हैं, जिन्होंने कभी क्रिकेट खेला है। हार्डी की मौत 1947 में हो गई; यदि वह बीस बरस और जिए होते, तो संभवतः वह इसमें जोड़ते कि सोबर्स क्रिकेट खेल चुके सारे हरफनमौला क्रिकेटरों से अलग हैं।
1966 की गर्मियों में मैंने पहली बार किसी क्रिकेट शृंखला का अनुसरण किया था और तभी से मैं सोबर्स की विलक्षणता का प्रशंसक बन गया। इंग्लैंड में खेली जा रही यहा शृंखला वेस्ट इंडीज ने 3-1 से जीती थी, जिसमें (यदि मैं ठीक याद कर पा रहा हूं) इसके कप्तान ने 700 से अधिक रन बनाए थे, बीस विकेट लिए थे और दस कैच लपके थे। इसके बाद आई सर्दियों में वेस्ट इंडियन भारत आए और सोबर्स ने शृंखला जीतने में अपनी टीम की ओर से शानदार भूमिका निभाई।
अपने संबंधित क्षेत्रों में ब्रैडमैन और सोबर्स अपने ढंग के अनूठे थे और उनकी हैसियत वैसी ही थी, जैसी अंग्रेजी साहित्य में शेक्सपियर की। निस्संदेह इस पर बहस होनी चाहिए कि अंग्रेजी का अब तक का दूसरा महान लेखक कौन था। वर्ड्सवर्थ, चॉसर, जॉर्ज इलियट, चार्ल्स डिकंस या कोई और? ठीक इसी तरह से यह बहस करना अत्यंत उपयोगी होगा कि क्रिकेट के इतिहास में सार्वकालिक दूसरा महान बल्लेबाज और दूसरा महान हरफनमौला कौन हुआ। यह आलेख इस आखिरी प्रश्न पर केंद्रित है।
गारफील्ड सोबर्स ने 1954 में वेस्ट इंडीज की ओर से आगाज किया था। इससे लगभग आठ दशक पहले 1877 में पहला टेस्ट मैच खेला गया था। सोबर्स से पहले सार्वकालिक महान हरफनमौला पर विचार करें तो ऊपर जिक्र किए गए हर्स्ट और रोड्स के अलावा कुछ नाम ध्यान में आते हैं, उनमें यार्कशायर के तीसरे दावेदार हैं एफएस जैकसन, ऑस्ट्रेलियाई मोंटी नोबेल और दक्षिण अफ्रीकी जीए फाकनर और इन सबका सम्मानजनक टेस्ट रिकॉर्ड रहा। 1940 के दशक के आखिर में ब्रैडमैन की अपराजेय ऑस्ट्रेलियाई टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य कीथ मिलर को भी मजबूत दावेदार कहा जा सकता है, जो कि आक्रामक बल्लेबाज, खौफनाक तेज गेंदबाज और स्लिप के शानदार क्षेत्ररक्षक थे।
सोबर्स के बाद के महान हरफनमौला क्रिकेटरों में इनके अलावा 1970 और 1980 के दशक के चतुष्क पर भी विचार किया जा सकता है- न्यूजीलैंड के रिचर्ड हैडली, पाकिस्तान के इमरान खान, इंग्लैंड के इयान बॉथम और भारत के कपिल देव। हैडली कुछ हद तक इस समूह के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज थे। कपिल ने भारतीय परिस्थितियों में अपने दौर के स्लिप के अक्षम भारतीय क्षेत्ररक्षकों के बावजूद बहादुरी के साथ तेज गेंदबाजी का बोझ उठाया।
मैंने हैडली, इमरान, बॉथम और कपिल का काफी खेल देखा है और इन सबका भारी प्रशंसक हूं। फिर भी, उनकी महानता के बावजूद रैंकिंग में मैं उनसे ऊपर शर्मीले, विनम्र, दक्षिण अफ्रीकी जैक कैलिस को रखूंगा। कैलिस के समकालीनों में वार्न, लारा और तेंदुलकर जैसी चमत्कारिक शख्सियतें रही हैं, जिससे क्रिकेट प्रशंसकों की वैश्विक बिरादरी में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वह हकदार थे। लेकिन इस प्रशंसक के दिल में हमेशा उनकी खास जगह बनी रही। 2012 में एक आलेख में मैंने कैलिस की शानदार बल्लेबाजी, उनकी कुशल स्विंग गेंदबाजी और अचूक स्लिप कैचिंग के बारे में लिखा था और उन्हें 'विश्व क्रिकेट का सबसे मूल्यवान खिलाड़ी' कहकर सलाम किया था।
जैक कैलिस को रिटायर हुए एक दशक से भी अधिक हो गए। विश्व क्रिकेट में आज कौन सबसे मूल्यवान है? मेरा अपना वोट इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स के पक्ष में जाएगा, अभी चल रही एशेज सीरीज में वह अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। लॉर्ड टेस्ट के आखिरी दिन उन्हें बल्लेबाजी करते देखते हुए मुझे 1981 में हेडिंग्ले में खेली गई इयान बॉथम की पारी याद आ गई, जिसकी वजह से नतीजा उनकी टीम के पक्ष में गया। इसके बावजूद मेरे जेहन में बॉथम की तुलना में स्टोक्स एक शानदार क्रिकेटर के रूप में दर्ज हैं। उन्होंने हर क्षेत्र और हर परिस्थिति में अपनी प्रवीणता दिखाई है, जबकि बॉथम का, उदाहरण के लिए वेस्ट इंडीज के खिलाफ रिकॉर्ड खराब है।
खेल की शोभा बढ़ाने वाले महान हरफनमौला खिलाड़ियों के बारे में विमर्श करते हुए मैंने अब तक उन लोगों पर विचार किया है, जो बल्ले और गेंद से अपने कौशल के लिए जाने जाते हैं। हालांकि इसके अलावा भी एक अन्य प्रकार के हरफनमौला हैं, जो कि विकेट के पीछे और सामने बल्ले तथा दस्तानों के जरिये कमाल दिखाते हैं। यदि इस श्रेणी को भी समीकरण में जोड़ दिया जाए, तो यह विमर्श और दिलचस्प हो जाएगा। कुमार संगकारा और महेंद्र सिंह धोनी तस्वीर में सामने आएंगे और निश्चित रूप से इसमें एडम गिलक्रिस्ट भी होंगे।
इस प्रश्न पर विचार करते हुए कि, गैरी सोबर्स के बाद (या उनके अलावा) महान हरफनमौला कौन था? मैंने एक दर्जन से अधिक नामों की चर्चा की। इसे एक या दो नाम तक कैसे सीमित किया जा सकता है? क्रिकेट प्रशंसकों का पक्ष व्यापक रूप से राष्ट्र और पीढ़ी के आधार पर निर्धारित होता है। किशोरवस्था के नायक हमेशा अवचेतन में बसे होते हैं; वैसे ही वे भी, जो किसी के देश (या राज्य) से संबंधित हैं। हर्स्ट और रोड्स के प्रति एए थॉमसन के पक्षपाती होने की भी यही वजह थी। हालांकि गैरी सोबर्स के अलावा महान हरफनमौला पर विचार करते हुए मैंने खुद को जैक कैलिस और एडम गिलक्रिस्ट के बीच उलझा पाया, ये दोनों भारतीय नहीं हैं और दोनों मुझसे काफी युवा भी हैं।