फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   After changing name of Gulf of Mexico, bloody history of Mexico and America is again in discussion

टाइम मशीन: मजबूर मेक्सिको और अमेरिका का खूनी इतिहास, भविष्य बदलने के लिए बख्तरबंद हैं ट्रंप

Sun, 02 Mar 2025 07:16 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 02 Mar 2025 07:16 AM IST
विज्ञापन
सार
मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलने के बाद मेक्सिको और अमेरिका का रक्तरंजित इतिहास फड़फड़ा उठा है। ट्रंप सिर्फ अमेरिका के पश्चिमी मुल्क का अतीत ही नहीं, बल्कि भविष्य भी बदलने को बख्तरबंद हैं। बहुत से लोगों को राष्ट्रपति ट्रंप में जेम्स पोल्क दिख रहे हैं।
loader
After changing name of Gulf of Mexico, bloody history of Mexico and America is again in discussion
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया का कारोबारी भविष्य बदलने के लिए अमेरिकी बाजार में सामान बेचने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला तो बाद में किया, व्हाइट हाउस पहुंचने के बाद सबसे पहले उन्होंने 400 साल पुराना इतिहास बदलने का फरमान जारी किया। उन्होंने 16 लाख वर्ग किलोमीटर के मेक्सिको बेसिन यानी सेनो मेक्सिकाना यानी गल्फ ऑफ मेक्सिको का नाम बदलकर गल्फ ऑफ अमेरिका कर दिया। यह समुद्री क्षेत्र अमेरिका के पांच राज्यों, छह मेक्सिकन राज्यों और क्यूबा को जोड़ता है। नाम बदलने से इतिहास और अतीत बदलने की झक राजनेताओं को अनोखा ही जीव बनाती है।



ट्रंप के चेहरे में लोगों को अचानक, 19वीं सदी के मध्य के राजनेता दिखने लगे, जो मैनिफेस्ट डेस्टिनी के नाम पर अमेरिका का राज्य विस्तार करना चाहते थे। ट्रंप भी ग्रीनलैंड और कनाडा को लेकर कुछ न कुछ कहते रहे हैं। मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलने के बाद मेक्सिको और अमेरिका का रक्तरंजित इतिहास फड़फड़ा उठा है, ट्रंप सिर्फ अमेरिका के पश्चिमी मुल्क का अतीत ही नहीं, बल्कि भविष्य भी बदलने (इंपोर्ट टैरिफ) को बख्तरबंद हैं, तो आइए टाइम मशीन भी तैयार है आपको ले जाने के लिए ऐसे युद्धोन्मादी दौर में, जहां अमेरिका के एक राष्ट्रपति ने देश के पश्चिम का नक्शा बदल दिया था। मेक्सिको को लेकर ट्रंप की चिढ़ की जड़ शायद वहीं मिल जाए। हम उड़ चले हैं 1846 की तरफ, जब भारत में सर जॉन कंपनी या ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ बगावत शुरू हो चुकी थी। हम मेक्सिको की खाड़ी को पार करते हुए वेराक्रूज के ऊपर से मेक्सिको सिटी की तरफ बढ़ रहे हैं। आपके नीचे जंग का मैदान है, जहां अमेरिका की फौज मेक्सिको सिटी पर लगभग कब्जा करने वाली है। वह आगे देख रहे हैं न एक पहाड़ी, उसका नाम है चापुलटपेक हिल। टाइम मशीन इस पहाड़ी से कुछ दूर जंगल में उतर रही है। यह सितंबर 1847 है, अमेरिका और मेक्सिको के युद्ध का निर्णायक क्षण आ गया है।


अमेरिकी जनरल विनफील्ड स्कॉट ने वेराक्रूज के जरिये समुद्री, थल और हवाई हमला किया है। यह अमेरिका-मेक्सिको युद्ध (1846-48) का सबसे ताकतवर हमला है। चुरुबुस्को में मेक्सिकन अमेरिकियों से भिड़ गए, मगर स्कॉट की फौज उन्हें रौंदते हुए मेक्सिको सिटी की तरफ बढ़ चली। उनका रास्ता रोका चापुलटपेक के किले ने। चापुलटपेक में एक बड़ा लोहमर्षक इतिहास बन रहा था। कल रात स्कॉट की सेना ने इस किले पर अभूतपूर्व गोला बारूद बरसाया। मेक्सिको सिटी पर अमेरिकी कब्जे के लिए यह किला ढहना जरूरी था। इस किले पर तैनात थे मेक्सिको के युवा सिपाही, जो अभी-अभी जंग में आए थे। इनमें छह कैडेट आखिरी तक जूझे और उनके रहने तक अमेरिकी फौजें किले के पास नहीं पहुंच पाईं, इनमें एक कैडेट थे जुआन एस्क्यूटिया। अंतत: वह मेक्सिको का झंडा अपने शरीर से लपेटकर किले से कूद गए, ताकि अमेरिकी उसके मुल्क के ध्वज छू न सकें। मेक्सिको के निनो हीरोज (युवा सिपाही) की यह जंग दुनिया की उन तमाम लड़ाइयों में शुमार होगी, जो आजादी बचाने के लिए लड़ी गई हैं। मेक्सिको के लिए तो यह बलिदान का तीर्थ बन जाएगा। अब हम एक ऐसी अमेरिकी शख्सियत से मिलते हैं, जो अमेरिकी राज्य विस्तार की मुहिम में लगा था। हम 19वीं सदी की शुरुआत में हैं। जेम्स के पोल्क राष्ट्रपति हैं। पोल्क की राजनीति अमेरिका की सीमाएं बढ़ाने पर केंद्रित है। इसे उन्होंने ‘मैनिफेस्ट डेस्टिनी’ अभियान कहा है, यानी सेना के जरिये अमेरिकी पश्चिमी सीमाओं का विस्तार।

अब आप मेक्सिको और अमेरिका के पेचीदा रिश्तों की शुरुआत के गवाह बनेंगे, जो अगली कई सदियों तक इन दो पड़ोसियों को उलझाते रहेंगे। अमेरिका का मौजूदा नक्शा करीब से देखिए, जो आपकी सीट के सामने स्क्रीन पर आ रहा है। 21वीं सदी से आते हुए जो अमेरिकी नक्शा आपके जेहन में है, यह तो उससे अलग है। इसमें तो टेक्सास, कैलिफोर्निया और कई दूसरे राज्य नहीं दिख रहे। 1821 में जब मेक्सिको आजाद हुआ, तब ये राज्य उसका हिस्सा थे, अमेरिका के नहीं। राजधानी वाशिंगटन में चहलकदमी करते हुए आपको पता चलेगा कि मेक्सिको रिपब्लिक तो है, मगर राजनीति अस्थिर है। केंद्र बनाम राज्य का झगड़ा जारी है। व्हाइट हाउस के पास रहिएगा, क्योंकि वहां टेक्सास से एक खबर आने वाली है। टेक्सास में पुराने अमेरिकी और मेक्सिको के बाशिंदे लड़ पड़े हैं। मामला है गुलामों का। मेक्सिको ने गुलामी का चलन बंद कर दिया है। पुराने अमेरिकियों को खेतों के लिए कामगार नहीं मिल रहे हैं।

यह 1845 का साल है। टेक्सास में बगावत की खबर व्हाइट हाउस आ गई। राष्ट्रपति जेम्स पोल्क को मैनिफेस्ट डेस्टिनी यानी अमेरिका के भौगोलिक विस्तार का मौका मिल गया है। ठीक सुना है आपने, व्हाइट हाउस ने टेक्सास को अमेरिका में मिला लिया। राष्ट्रपति के इशारे पर अमेरिकी सेना पश्चिम के मोर्चे पर पहुंच गई है। टेक्सास की सीमा पर झड़पें जारी हैं। मेक्सिको के पुराने नेता और सेनानायक एंतोनियो लोपेज डे सांता अन्ना लौट आए हैं और मेक्सिकन-अमेरिकी युद्ध के नगाड़े बज उठे हैं। टाइम मशीन चापुलटपेक हिल पर लौट आई, जहां हम उतरे थे। इस किले के ढहने के बाद मेक्सिको पर अमेरिकी कब्जा हो गया है। मेक्सिको तबाह होकर घुटनों पर आ गया है। राष्ट्रपति पोल्क की अमेरिका की सीमा बढ़ाओ मुहिम कामयाब रही है। मेक्सिको युद्ध बंद करने के लिए समझौते को तैयार है। टाइम मशीन अब टेक्सास के गुआदालूपे हिडाल्गो शहर में है। यह 1848 है। मेक्सिको मजबूर है, उसने कैलिफोर्निया, नेवादा, टेक्सास, उटा, एरिजोना और कोलोराडो और वायोमिंग के हिस्से अमेरिका को दे दिए हैं। करीब-करीब आधा मेक्सिको अब अमेरिका का है। अमेरिका अगले एक दशक में मेक्सिको से कुछ और हिस्सा भी खरीदेगा और सीमा को संतुलित करेगा। क्या आप भी यही सोच रहे हैं कि जीत के बाद अमेरिका ने पूरे मेक्सिको को ही क्यों नहीं मिला लिया... कहते हैं कि गुलामों को लेकर अमेरिकी राजनीति में तत्कालीन विभाजन इसकी वजह था। यह संधि होने तक अमेरिकी कांग्रेस तय नहीं कर पाई कि नए राज्यों में गुलामों की व्यवस्था बनाए रखनी है या फिर खत्म करनी है। इसलिए मेक्सिको के आधे हिस्से को मिलाने का फैसला किया गया। तो क्या अमेरिकी नेताओं की नई पीढ़ी गुआदालूपे की संधि से इन्कार कर रही है, गल्फ ऑफ मेक्सिको का नाम बदलने के बाद ट्रंप क्या करना चाहते हैं? बहुत से लोगों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में जेम्स पोल्क दिख रहे हैं। मेक्सिको पर हमलावर ट्रंप साजिश कथाओं को जन्म दे रहे हैं। यह मार्च, 2025 है। हम वाशिंगटन आ गए हैं। फिर मिलते हैं अगले सफर पर...

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed