दूरगामी असर डालेगा यह फैसला

उमेश चतुर्वेदी Updated Thu, 23 Jan 2014 07:04 PM IST
A historical verdict of SC
मीडिया उभार के दौर में कई अहम मुद्दे भी किस तरह चर्चा से दूर हो जाते हैं, इसका बेहतरीन उदाहरण है, दया याचिकाओं में हो रही देरी और उससे तिल-तिल मरते लोगों को लेकर नीति बनाने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला। खबरिया चैनलों की दुनिया में यह खबर महज सुर्खियां ही बनकर रह गईं। लेकिन इसके निहितार्थ काफी गहरे हैं।

भारतीय न्याय प्रक्रिया में सुधार की मांग अरसे से उठती रही है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौर में जस्टिस एनएम घटाटे की अध्यक्षता में विधि आयोग ने न्यायिक सुधार को लेकर कई सारी सिफारिशें भी दी थीं। जिनमें से कई सुधार लागू होने की प्रक्रिया में हैं, तो कइयों की राह में रोड़ा अटका दिया गया। छोटी-मोटी सजाओं वाले अपराधों के लिए जमानत के इंतजार में बंद लोगों के राहत के लिए तत्काल राहत देने और फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने जैसे न्यायिक सुधार वाले फैसले लागू तो कर दिए गए, लेकिन गंभीर अपराधों और मौत की सजा प्राप्त अपराधियों की दया याचिकाओं पर नियमबद्ध सुनवाई की दिशा में सुधार की प्रक्रिया लागू नहीं हो पाई।

अव्वल तो उम्मीद कार्यपालिका यानी सरकार से ही थी कि वह न्यायिक सुधारों की दिशा में बेहतर काम कर दिखाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सबसे बड़ी बात यह रही कि मौत की सजा प्राप्त लोगों की दया अर्जियों पर नियमबद्ध सुनवाई की कोई नियम सम्मत प्रक्रिया नहीं रही।

दया याचिकाएं वैसे तो राज्यपालों और मौत की सजा की दशा में राष्ट्रपति को दी जाती हैं। लेकिन हकीकत यह है कि उन पर निर्णय असलियत में राज्य या केंद्र का गृह मंत्रालय लेता रहा है। इनमें से ज्यादातर फैसले राजनीतिक आधार पर लिए जाते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जिन पंद्रह लोगों की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील किया है, उनमें से ज्यादातर मामलों में फांसी की सजा दो साल से या उससे पहले ही सुनाई जा चुकी हैं और इन दोषियों को अलग एकांत कमरे में रखा जा रहा था। इनमें से हरियाणा के विधायक रेलू राम की हत्या के आरोप में उनकी बेटी सोनिया और दामाद संजीव को दो साल पहले, तो वहीं राजीव गांधी के हत्यारों को 11 साल पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी।

बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि राष्ट्रपति और राज्यपाल को माफी देने का अधिकार सांविधानिक है और इसे वक्त की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। लेकिन अगर दोषी दया याचिका दायर करता है, तो राष्ट्रपति और राज्यपाल का दायित्व जरूर बन जाता है कि वे उसे जल्दी निपटाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने फांसी को आजीवन कारावास में बदलने के लिए पांच वजह सुझाए हैं।

सबसे पहली वजह उसने दया अर्जियों के निपटारे में देरी को ठहराया है, तो दूसरी वजह दोषी के पागलपन को और तीसरी, दोषी से जुड़े उन फैसले को सुनाया है, जिसमें उन्हें दोषी साबित किया गया हो और वह फैसला बाद में गलत साबित किया जाए। सर्वोच्च अदालत ने माफी की चौथी वजह कैदी को एकांत में रखने को बताया है, जबकि आखिरी और अहम वजह है, प्रक्रियात्मक तौर पर खामी रह जाना। इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि याचिका पर विचार करते वक्त दया अर्जी पर फैसले लेने में देर को भी मुख्य वजह बनाया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति ने जब तक दया याचिका खारिज नहीं की हो, तब तक कैदी को किसी भी सूरत में एकांतवास में नहीं रखा जाना चाहिए।

सबसे बड़ी बात यह कि अदालत ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि लंबे समय तक याचिका लंबित रहने से दोषी को शारीरिक और मानसिक तौर पर त्रास पहुंचता है, जिसका उस पर विपरीत असर पड़ता है। लिहाजा सिर्फ देरी को ही फांसी को उम्र कैद में बदलने का आधार बनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अब दया याचिका खारिज होने के बाद दोषी के परिवार को 14 दिनों तक का वक्त कानूनी प्रक्रिया को पूरी करने के लिए दिया जाएगा। अफजल गुरु के परिजनों का आरोप था कि उन्हें जरूरी कानूनी सहायता लेने और फांसी देने की सूचना तक नहीं दी गई। तय है कि इस फैसले की तासीर देर तक महसूस की जाएगी और दया याचिकाओं पर निपटारा करते वक्त राज्यों और केंद्र के गृह मंत्रालय को अब ज्यादा तार्किक और समयबद्ध फैसला लेना होगा।

Spotlight

Most Read

Opinion

सुशासन में नागरिक समाज की भूमिका

सुशासन को अमल में लाने के लिए नागरिक समाज का अहम स्थान है, क्योंकि यही समाज की क्षमता में वृद्धि करते हैं और उसे जागरूक बनाते हैं। यही सरकार या राज्य को आगाह करते हैं कि कैसे नागरिकों की भागीदारी से उनका संपूर्ण विकास किया जाए।

20 जनवरी 2018

Related Videos

यूपी बोर्ड में 83,753 फर्जी छात्रों की खुली पोल समेत सुबह की 10 बड़ी खबरें

अमर उजाला टीवी पर देश-दुनिया की राजनीति, खेल, क्राइम, सिनेमा, फैशन और धर्म से जुड़ी खबरें दिन में चार बार LIVE देख सकते हैं, हमारे LIVE बुलेटिन्स हैं - यूपी न्यूज सुबह 7 बजे, न्यूज ऑवर दोपहर 1 बजे, यूपी न्यूज शाम 7 बजे।

20 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper