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किसानों की जब्त जमीन वापस
Yashwant Vyas
Updated Mon, 03 Sep 2012 12:00 PM IST
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धर्मग्रंथों में कहा गया है कि दयालु प्रवृत्ति के मानव को पूरे देश-समाज में सम्मान मिलता है। ऐसा व्यक्ति परलोक में भी उच्च स्थान प्राप्त करता है। राजा भीमदेव गुजरात की एक रियासत के शासक थे। भीमदेव का पुत्र मूलराज प्रतिभाशाली होने के साथ-साथ दयालु प्रवृत्ति का था। एक बार राज्य में वर्षा न होने से खेत सूख गए। किसान राजकोष में लगान जमा नहीं करा पाए। राजा के कर्मचारी गांवों में पहुंचे तथा किसानों के घरों का सामान उठा लाए। किसी दुखी किसान से जब मूलराज को यह पता लगा, तो उसका हृदय द्रवित हो उठा। उन्हीं दिनों राजकुमार मूलराज घुड़सवारी सीख रहा था। पिता ने उससे कहा था, घुड़सवारी की परीक्षा पास करते ही उसे मुंहमांगा इनाम दिया जाएगा।
प्रशिक्षक ने एक दिन राजा से कहा, राजकुमार घुड़सवारी में पारंगत हो गया है, आप उसकी कला को परखें। राजा भीमदेव ने राजकुमार की घुड़सवारी के करतब देखे, तो वह प्रसन्न हो उठे। उन्होंने कहा, बेटा, मैं पूर्ण संतुष्ट हूं। मुंहमांगा इनाम मिलेगा। बोलो, क्या चाहते हो? राजकुमार ने कहा, पिताजी, यदि आप मुझे इनाम देना चाहते हैं, तो जिन किसानों की संपत्ति लगान न दे पाने के कारण जब्त कर ली गई है, उसे तुरंत वापस करने का आदेश देने की कृपा कीजिए। राजा अपने पुत्र की दयालुता देखकर गद्गद हो उठे। उसी समय उन्होंने किसानों की जब्त की हुई संपत्ति वापस करने के आदेश दे दिए।
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प्रशिक्षक ने एक दिन राजा से कहा, राजकुमार घुड़सवारी में पारंगत हो गया है, आप उसकी कला को परखें। राजा भीमदेव ने राजकुमार की घुड़सवारी के करतब देखे, तो वह प्रसन्न हो उठे। उन्होंने कहा, बेटा, मैं पूर्ण संतुष्ट हूं। मुंहमांगा इनाम मिलेगा। बोलो, क्या चाहते हो? राजकुमार ने कहा, पिताजी, यदि आप मुझे इनाम देना चाहते हैं, तो जिन किसानों की संपत्ति लगान न दे पाने के कारण जब्त कर ली गई है, उसे तुरंत वापस करने का आदेश देने की कृपा कीजिए। राजा अपने पुत्र की दयालुता देखकर गद्गद हो उठे। उसी समय उन्होंने किसानों की जब्त की हुई संपत्ति वापस करने के आदेश दे दिए।
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