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टाइम मशीन: प्रलय का टंबोरा और पर्यावरण की तबाही का हॉरर शो

Sun, 24 Dec 2023 07:52 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 24 Dec 2023 07:52 AM IST
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सार
साल 1815 में इंडोनेशिया में माउंट टंबोरा ज्वालामुखी में विस्फोट मानव इतिहास की सबसे भयानक घटना थी। टंबोरा के फटने से राख और गर्द दस मील तक ऊपर उठी और 19 मील के इलाके में फैल गई। सल्फर डाइऑक्साइड के एयरसोल ने हवा पर कब्जा कर लिया। गर्द और सल्फर डाइऑक्साइड ने सूर्य की गर्मी रोक ली थी। पूरी दुनिया में तापमान तेजी से गिरा। बारिश और बर्फबारी की प्रलय आ गई...गर्मियां खत्म हो गईं।
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1815 Tambora volcano eruption and Climate Change impact on Environment
Tambora Eruption - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नवंबर के आखिरी सप्ताह में जर्मनी की सरकार ने एलान किया कि लोग घरों से बाहर न निकलें। बर्फीले तूफान जो चल रहे हैं। म्यूनिख के हवाई अड्डे पर इतनी बर्फबारी हुई कि जहाज बर्फ में ढक गए। मध्य यूरोप में 20 इंच मोटी बर्फबारी हुई है। पूर्वी यूरोप के बल्गारिया में सर्दी के कारण इमर्जेंसी लगा दी गई। एक के बाद एक देश में बिजली नेटवर्क बैठ गया है। ट्रेनें बंद हैं। मौसम कहर बरपा रहा है। इतनी ठंड यूरोप के लिए भी जानलेवा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद गैस की किल्लत है। महंगाई है। बर्फीले तूफानों के बीच घरों की हीटिंग का बिल यूरोपीय लोगों को गरीब कर रहा है।



इधर भारत में सर्दी में गर्मियों का अहसास है। अल नीनो के असर से तापमान सामान्य से ज्यादा है। 2023 की गर्मियां भी वक्त से पहले आ गई थीं। आइए, पकड़िए अपनी सीट टाइम मशीन में। हम आपको ले चलते हैं एक ऐसे दौर में, जहां पर्यावरण के बदलावों ने सियासत से लोगों की जिंदगी तक तूफान ला दिया।


जब तक यह टाइम मशीन आपको 200 साल पीछे ले जाए, तब तक स्क्रीन पर आप एक फिल्म के कुछ दृश्य देखिए। यह 1994 में बनी फिल्म फ्रैंकेस्टाइन है। काल्पनिक प्रेत यानी फ्रैकेंस्टाइन पर कई फिल्में बनी हैं, मगर रॉबर्ट डी नीरो के किरदार वाली फ्रैंकेस्टाइन को इस विषय पर बनी सबसे शानदार फिल्म माना जाता है। फ्रैंकेस्टाइन करीब 200 साल पुराना है। मैरी शैली का यह खौफनाक काल्पनिक किरदार आज तक फिल्मकारों, लेखकों को प्रभावित करता है।

सन 1816। जब इस फ्रैंकेस्टाइन का जन्म हुआ यानी इसकी कल्पना की गई। मैरी शैली का यह किरदार पर्यावरण के एक बड़े बदलाव की उपज था। मैरी शैली तब तक मैरी गॉडविन थीं। अंग्रेजी के मशहूर कवि पर्सी बी शैली के साथ उनका विवाद इसके बाद हुआ। हालांकि फ्रैंकेस्टाइन की कल्पना के वक्त वह पी बी शैली के साथ थीं।

अब तक आप 1816 का साल देखकर खौफ से कांप रहे होंगे। वह इतिहास के सबसे भयावह वर्षों में एक था। उसे 'ईयर विदाउट समर' के तौर पर याद किया जाता है यानी ऐसा वर्ष, जिसमें गर्मी नहीं पड़ी।
यूरोप में आपको पता चलेगा कि एक साल पहले इंडोनेशिया में माउंट टंबोरा ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था। वह मानव इतिहास का सबसे भयानक ज्वालामुखी विस्फोट था। टंबोरा के फटने से राख और गर्द दस मील तक ऊपर उठी और 19 मील के इलाके में फैल गई। सल्फर डाइऑक्साइड के एयरसोल ने हवा पर कब्जा कर लिया। दुनिया के मौसम पर इसका असर एक साल बाद 1816 में नजर आया। गर्द और सल्फर डाइऑक्साइड ने सूर्य की गर्मी रोक ली थी। पूरी दुनिया में बारिश और बर्फबारी की प्रलय आ गई। गिरते तापमान ने गर्मियां खत्म कर दीं।

आप इस वक्त 1816 में हैं। यूरोप और अमेरिका का हाल देखते हैं। दुनिया के तापमान में दो डिग्री की कमी आई। अमेरिका में जून में भारी बर्फ पड़ी। वनस्पतियां नष्ट हो गईं। खेती तबाह। इतनी सर्दी पड़ी कि पक्षी जम गए। मवेशी मर गए। लोगों को कबूतर और रैकून (एक स्तनधारी जानवर) खाने पड़े। अमेरिका में उत्तर पश्चिम से मध्य की तरफ बड़ा पलायन हुआ। उसी दौरान नवंबर में हुए चुनावों में कांग्रेस के अधिकांश सदस्यों को हार का मुंह देखना पड़ा।उस बेहद भयावह मौसम में अमेरिका में धर्मांधता बढ़ी और नए संप्रदाय भी बने।

अब हम चलते हैं यूरोप की तरफ, फ्रैंकेस्टाइन से मिलने। यूरोप में फसलें तबाह होने से भुखमरी फैली। खाने के लिए दंगे हुए। फ्रांस और इंग्लैंड में भारी राजनीतिक अस्थिरता के हालात बनते दिखाई देंगे। 1816 और 1817 में फसलें तबाह होने के कारण बड़ी आबादी को अपने इलाके छोड़ने पड़े।

आयरलैंड में टायफायड फैला। मौसम के असर से लोगों की प्रतिरोधक क्षमता टूट चुकी थी। 1817 में हैजा महामारी का पहला विस्फोट हुआ। शुरुआत हुई भारत के जैसोर से, जो कोलकाता और ढाका के बीच था। हजारों मौतें हुईं। महामारी पूरी दुनिया में फैली। टाइम मशीन में आपको पता चलेगा कि जावा (आज के इंडोनिशया) में एक लाख लोग मारे गए।

भयावह मौसम, बेशुमार संकट और चौतरफा मुसीबतों के बीच ब्रिटेन के अभिजातों का एक दल जिनेवा की यात्रा पर था। वे वहां गर्मियों की छुट्टियां बिताने गए थे। मैरी गॉडविन अपने होने वाले पति पीबी शैली के साथ इस समूह का हिस्सा थीं।

अंग्रेजी के मशहूर रोमांटिक कवि लॉर्ड बायरन भी उनके साथ थे। बायरन के साथ उनके निजी डॉक्टर भी गए थे। मैरी की बहन क्लेयर क्लैयरमाउंट, लॉर्ड बायरन की प्रेमिका थीं।
ब्रिटेन के कवियों, लेखकों के इस समूह को मौसम ने उनके विला में बंद कर दिया।मैरी गॉडविन ने उस दौरान बायरन और पीबी शैली के बीच लंबी बौद्धिक वार्ताएं सुनी थीं, जो दर्शन से लेकर जीवन के सिद्धांत और विज्ञान तक फैली थीं।

फैंटेसामैगोरिना जर्मन हॉरर कहानियों का मशहूर संकलन है। लॉड बायरन इससे प्रभावित थे। भयावह मौसम के बीच घर में बंद इन समूह के सदस्यों के पास कुछ काम नहीं था। सो बायरन ने सभी को अपनी सबसे खौफनाक कल्पनाएं सुनाने का काम सौंपा।

सब अपनी-अपनी कल्पना में खौफ की कथाएं बुन रहे थे। असर ऐसा था कि कई सदस्यों को डरावने सपने आते थे। कहते हैं, मैरी गॉडविन या मैरी शैली को इसी दौरान एक बुरा सपना आया। उस सपने से उन्हें फ्रैंकेस्टाइन नामक चरित्र का सूत्र मिला था। फिर मैरी शैली ने अपनी अमर कृति फ्रैंकेस्टाइन लिखी, जिसमें एक सनकी वैज्ञानिक है, जो मरे हुए मनुष्य के शरीर तैयार कर उसे जीवित करता है। उस लाश में अभूतपूर्व ताकत होती है। वह मानव राक्षस यानी फ्रैंकेस्टाइन अपने निर्माता यानी वैज्ञानिक को मारकर पूरी आबादी पर कहर बरपा देता है। कहते हैं, फ्रैंकेस्टाइन ने लोकप्रियता में अपने खौफनाक पूर्वज ड्रैकुला को भी पीछे छोड़ दिया था। आज भी यह चरित्र अलग-अलग तरीकों से हॉरर फिल्मों में नमूदार होता है, जिसकी रचना के पीछे पर्यावरण का कहर था।
टाइम मशीन यूरोप से लौटकर दुबई आ गई है, जहां दुनिया के नेता जुटे तो, मगर पर्यावरण की तबाही के हॉरर शो को रोकने पर राजी नहीं हुए। मिलते हैं अगली यात्रा में।

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