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सरिस्का अभयारण्य
Vinit Narain
Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
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पर्यावरण प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है कि राजस्थान के जिस मशहूर सरिस्का बाघ अभयारण्य में 2004-05 में एक भी बाघ नहीं होने संबंधी खुलासा विश्व वन्यजीव कोश की रिपोर्ट में किया गया था, वहीं एक बाघिन ने एक शावक को जन्म दिया है। असल में, उस खुलासे के बाद राजस्थान सरकार की खूब किरकिरी हुई थी और तब यहां फिर से बाघ बसाने का प्रयास तेज हुआ। अब इस शावक के जन्म लेते ही यहां बाघों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। अभी तक वहां पांच वयस्क बाघ थे, जिनमें तीन मादा थीं।
करीब 800 वर्ग किलोमीटर में फैले सरिस्का को वन्य जीव अभयारण्य का दरजा 1958 में मिला, और जब प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत हुई, तो 1979 में इसे टाइगर रिजर्व बना दिया गया। वर्ष 1982 में इसे राष्ट्रीय पार्क घोषित कर दिया गया। अरावली पर्वत शृंखला के बीच स्थित यह अभयारण्य बंगाल टाइगर, जंगली-बिल्ली, तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, सुनहरे सियार, सांभर, नीलगाय, चिंकारा जैसे जानवरों के लिए तो जाना ही जाता है, मोर, मटमैले तीतर, सुनहरे कठफोड़वा, दुर्लभ बटेर जैसी कई पक्षियों का बसेरा भी है।
इसके अतिरिक्त यह अभयारण्य कई ऐतिहासिक इमारतों को भी खुद में समेटे हुए है, जिसमें कंकवाड़ी किला प्रसिद्ध है। इसे जयसिंह द्वितीय ने बनवाया था और कभी मुगल सम्राट औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को कैद करके यहां रखा था।
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सरिस्का रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान से बड़ा है, पर इसका ज्यादा व्यावसायीकरण नहीं हो सका है। बेशक यहां गरमी में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है, पर ग्रीष्म का मौसम ही यहां आने के लिए अनुकूल है, क्योंकि तब यहां जानवरों की अधिकाधिक संख्या देखी जा सकती है।
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करीब 800 वर्ग किलोमीटर में फैले सरिस्का को वन्य जीव अभयारण्य का दरजा 1958 में मिला, और जब प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत हुई, तो 1979 में इसे टाइगर रिजर्व बना दिया गया। वर्ष 1982 में इसे राष्ट्रीय पार्क घोषित कर दिया गया। अरावली पर्वत शृंखला के बीच स्थित यह अभयारण्य बंगाल टाइगर, जंगली-बिल्ली, तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, सुनहरे सियार, सांभर, नीलगाय, चिंकारा जैसे जानवरों के लिए तो जाना ही जाता है, मोर, मटमैले तीतर, सुनहरे कठफोड़वा, दुर्लभ बटेर जैसी कई पक्षियों का बसेरा भी है।
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इसके अतिरिक्त यह अभयारण्य कई ऐतिहासिक इमारतों को भी खुद में समेटे हुए है, जिसमें कंकवाड़ी किला प्रसिद्ध है। इसे जयसिंह द्वितीय ने बनवाया था और कभी मुगल सम्राट औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को कैद करके यहां रखा था।
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सरिस्का रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान से बड़ा है, पर इसका ज्यादा व्यावसायीकरण नहीं हो सका है। बेशक यहां गरमी में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है, पर ग्रीष्म का मौसम ही यहां आने के लिए अनुकूल है, क्योंकि तब यहां जानवरों की अधिकाधिक संख्या देखी जा सकती है।