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ना कहना क्यों मना है?
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 10 Nov 2016 08:51 PM IST
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हिंदी साहित्य
हमारे समाज में शायद महिलाओं को 'ना' कहने का अधिकार नहीं है। अगर कोई महिला 'ना' कहती है, तो किस शारीरिक, मानसिक कष्ट के दौर से गुजरती है। यह किताब इसी की झलक है।
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यह किताब दस्तावेज है तेजाब पीड़िताओं की उस अनकही हकीकत का, जिस पर ध्यान नहीं दिया जाता। पत्रकार एवं लेखिका प्रतिभा ज्योति ने 'एसिड वाली लड़की' में इसके कानूनी, सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण जैसे मसलों पर भी चर्चा की है।
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208 पन्नों की इस किताब में सोनाली, कविता बिष्ट, प्रीति राठी, अनु मुखर्जी और प्रज्ञा सिंह जैसी महिलाओं का जिक्र है, जो तेजाब हमले की शिकार हुई हैं।
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