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अंतर्ध्वनि: शिक्षा से ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है

Thu, 05 Sep 2019 01:01 AM IST
देव कश्यप डॉ. राधाकृष्णन
डॉ. राधाकृष्णन Published by: देव कश्यप Updated Thu, 05 Sep 2019 01:01 AM IST
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Sarvepalli Radhakrishnan said Human brain can be utilized properly through education
सर्वपल्ली राधा कृष्णन - फोटो : फाइल फोटो

शिक्षक वह नहीं होता, जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है, जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करे। शिक्षा द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। अत: विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए। ज्ञान हमें शक्ति देता है, प्रेम हमें परिपूर्णता देता है।

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शिक्षा का परिणाम एक स्वतंत्र रचनात्मक व्यक्ति का विकास होना चाहिए, जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके। पुस्तकें वे साधन हैं, जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं। किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी मिलती है। अगर हम दुनिया के इतिहास को देखें, तो पाएंगे कि सभ्यता का निर्माण उन महान ऋषियों और वैज्ञानिकों के हाथों से हुआ है, जो स्वयं विचार करने की सामर्थ्य रखते हैं, जो देश और काल की गहराइयों में प्रवेश करते हैं, उनके रहस्यों का पता लगाते हैं और इस तरह से प्राप्त ज्ञान का उपयोग लोक-कल्याण के लिए करते हैं।
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कोई भी आजादी तब तक सच्ची नहीं होती, जब तक उसे विचार की आजादी प्राप्त न हो। किसी भी धार्मिक विश्वास या राजनीतिक सिद्धांत को सत्य की खोज में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। दुनिया के सारे संगठन अप्रभावी हो जाएंगे, यदि यह सत्य उन्हें प्रेरित नहीं करता कि ज्ञान अज्ञान से शक्तिशाली होता है। ज्ञान और विज्ञान के आधार पर ही आनंद और खुशी का जीवन संभव है। कवि के धर्म में किसी निश्चित सिद्धांत का कोई स्थान नहीं है। धर्म मनुष्य के संपूर्ण अस्तित्व को एक सत्य की ओर ले जाने का एक अंतहीन रोमांच है, जो इस खोज में सामने आया है। आत्मा शब्द का अर्थ है जीवन की सांस। आत्मा मनुष्य के जीवन का सिद्धांत है। आत्मा जो उसके अस्तित्व, उसकी सांस, उसकी बुद्धि को व्याप्त करती है और उन्हें ऊंचा उठाती है।
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(देश के पूर्व दिवंगत राष्ट्रपति।)

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