{"_id":"5ae2db9d4f1c1b9f098b6d96","slug":"m-mukundan-pioneers-of-modernity-in-malayalam-literature-born-in-mayyazhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"'लोक इतिहास की खोज ने मुझे लेखक बनाया'","category":{"title":"Literature","title_hn":"साहित्य ","slug":"literature"}}
'लोक इतिहास की खोज ने मुझे लेखक बनाया'
एम मुकुंदन
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:43 PM IST
विज्ञापन
M. Mukundan
मैं मयाझी (माहे) में एक सामान्य परिवार में पैदा हुआ। मयाझी एक समय फ्रेंच उपनिवेश था, जो बाद में पुडुचेरी का हिस्सा बन गया। मयाझी मेरे गांव से होकर बहने वाली नदी का भी नाम है। मेरी शुरुआती रचनाओं में मेरा गांव प्रबल रूप से मौजूद है। अपने गांव की कहानी कहने के कारण लोग मुझे मयाझी का कथाकार भी कहते हैं।
विज्ञापन
मैं अपनी रचनाओं के लिए नई जमीन खोजने या जमीन-आसमान के कुलाबे मिलाने में यकीन नहीं करता। अपने इलाके की ऐतिहासिकता और लोगों के जीवन को मैं अपनी कहानियों में बुनता हूं। चूंकि ऐसे में बड़ी पृष्ठभूमि लेता हूं, इसलिए छोटी कहानियों की तुलना में मैं उपन्यास लिखना मुझे ज्यादा अच्छा लगता है। मेरे उपन्यासों में मयाझी और आसपास के इलाकों का जो इतिहास आया है, वह इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में नहीं मिलता, क्योंकि मैं राजाओं का नहीं, आम लोगों का इतिहास खोजता और उसे दर्ज करता हूं।
विज्ञापन
मैं ऐसे लोगों की कहानियां लिखता हूं, जो अपने जीवन में संघर्ष करते रहते हैं। शहरी सुसंस्कृत नागरिकों के बजाय मेरी रचनाओं में गांवों के लोग ज्यादा आते हैं, जो कदम-कदम पर राजनीतिक छल-छद्म का सामना करते हैं। जीवन के दोहरेपन को चित्रित करने के लिए मैं व्यंग्य का सहारा लेता हूं। मयाजीपुझाउडे थीरंगालिल मेरा प्रिय उपन्यास है, जो 2008 में प्रकाशित हुआ था और इसे पिछले पचीस साल के श्रेष्ठतम मलयालम उपन्यास का दर्जा दिया गया। आलोचकों ने मेरी रचनाओं में उत्तर-आधुनिकता ढूंढी है। लेकिन मेरे लिए यह बहुत मायने नहीं रखता।
विज्ञापन
-चर्चित मलयालम लेखक