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भरा हुआ पेट ही शिष्टाचार को जन्म देता है

Tue, 13 Feb 2018 08:03 PM IST
हिलेरी मांटेल
हिलेरी मांटेल Updated Tue, 13 Feb 2018 08:03 PM IST
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Life motivationals lessons
किसी भी लेखक को ऐसी किताब लिखनी चाहिए, जैसी वह स्वयं पढ़ना चाहता है। अगर आप कोई किताब नहीं पढ़ना चाहते हैं, तो दूसरा उसे क्यों पढ़ना चाहेगा? कथित पाठक या बाजार के लिए न लिखें, यह आपकी किताब के तैयार होने तक खत्म हो जा सकता है। तथ्यों का अभाव ही लोगों को डराता है। आप जो अंतराल खोलते हैं, उसमें ही वे अपने भय, कल्पनाओं और इच्छाओं को रखते हैं। जब तक सच सुखद, आकर्षक और पसंद किए जाने योग्य नहीं है, वह फाटक को तोड़ सकता है, सड़कों पर कोलाहल मचा सकता है, वह पिछले दरवाजे पर रहने के लिए अभिशप्त होता है। लोगों को हताश होने के लिए मजबूर न करना ही बेहतर है। उन्हें समृद्ध बनाना चाहिए, क्योंकि तब वे उदार हो जाएंगे। भरा हुआ पेट ही शिष्टाचार को जन्म देता है और अकाल राक्षस बनाता है। अगर आपके पास कहानी का कोई बेहतर विचार है, तो पूरी तरह से यह मत मान लें कि इससे सिर्फ कहानी ही बनेगी, उसे नाटक, फिल्म या कविता में बेहतर ढंग से ढाला जा सकता है। इसलिए लचीला बने रहना चाहिए। जिस चीज को आप अपने जीवन में आपदा समझते हैं, वह वास्तव में आपदा नहीं होती। अगर आप किसी समस्या में उलझ गए हैं, तो वहां से हट जाइए और कुछ और करने लगिए। उस समस्या को लेकर नाक-मुंह सिकोड़ने से कोई फायदा नहीं होने वाला। पहले मैं सोचती थी कि लिखने के लिए शोध काफी है, पर जब अंतराल सामने आए, तो लगा कि ये कल्पनाओं से ही भर सकती हैं। और कल्पनाएं तभी आती हैं, जब आप अवचेतन अवस्था में होते हैं।
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-ब्रिटिश उपन्यासकार और जीवनी लेखिका
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