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प्रत्येक कलाकार के जीवन में गहन जागृति का एक क्षण आता है

Tue, 12 Dec 2017 03:49 PM IST
इम्रे कोर्टेश, हंगरी के नोबेलजयी उपन्यासकार
इम्रे कोर्टेश, हंगरी के नोबेलजयी उपन्यासकार Updated Tue, 12 Dec 2017 03:49 PM IST
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know about Imre Kertész Nobel-winning novelist of Hungary
Imre Kertész

मेरे परिवार में किसी का भी साहित्य से कोई परिचय नहीं था। मुझे लगता है कि मैं जब छह-सात साल का तभी इस तरफ भूले से आ गया। मुझसे पूछा गया था कि मैं क्या चाहता हूं और मैंने बिना कुछ जाने कहा कि मुझे पत्रिका चाहिए। वह पत्रिका इतनी खूबसूरत थी कि मैं उसे छोड़ना नहीं चाहता था।

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समय बीतने के साथ मैंने लिखने की कोशिश की, लेकिन मैं जो भी चीजें कागज पर लिखता था, उससे मुझे असंतोष होता था। इसलिए मैंने उन्हें सुधारने का फैसला किया। मुझे लगता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने लिखे को सुधारता रहे, तो वह एक दिन लेखक जरूर बन सकता है। और फिर अचानक एक दिन मुझे एहसास हुआ कि मैं वास्तव में लेखक बन गया हूं। मैं जब चौबीस वर्ष का था, तभी लेखक बन पाया। लेकिन लेखक बनने के एहसास के साथ अपनी चुनौतियों का भी बोध हुआ।
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मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मैं लेखक बनना बर्दाश्त कर सकता था। यहां तक कि मेरे पास कलम भी नहीं थी। ऐसे में वह कौन-सी चीज थी, जिसने मुझे साहित्य की तरफ खींचा, अगर इस बारे में लिखूं, तो कई किताबें लिख सकता हूं। लेकिन उन कहानियों में मैं स्वयं को खो दूंगा। लेखन ने मेरे जीवन को बदल दिया।
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इसमें वास्तव में अस्तित्व से संबंधित आयाम हैं और यह लगभग सभी लेखकों के साथ होता है। प्रत्येक कलाकार के जीवन में गहन जागृति का एक क्षण आता है। चाहे आप चित्रकार हों या लेखक, कभी न कभी एक विचार कौंधता है, जो आपको जकड़ लेता है। मेरे जीवन में जो बदलाव आया, वह गहन जागृति का क्षण था।

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