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'भाषा का आकर्षण मुझे कविताओं की ओर ले गया'
जयंत महापात्र
Updated Tue, 24 Apr 2018 10:25 AM IST
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Jayanta Mahapatra
मेरा बचपन बहुत सुखद नहीं था। भौतिकी में शोध करने के बाद चालीस की उम्र में मैंने कविताएं लिखनी शुरू कीं। किताबें पढ़ना मुझे हमेशा आनंदित करता रहा है। अच्छी किताबों की मुग्ध करने वाली भाषा की खोज ही अंततः मुझे कविताओं की ओर ले गई। मेरा ज्यादातर लेखन अंग्रेजी में ही है, क्योंकि मेरी पढ़ाई-लिखाई अंग्रेजी में हुई। लेकिन बाद में मैं ओडिया में भी लिखने लगा, क्योंकि बहुत सारी चीजें आप मातृभाषा में ही बेहतर ढंग से अभिव्यक्त कर सकते हैं।
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मेरा जीवन कटक में बीता, जहां मेरे पूर्वज रहते थे। मेरे लिए कविताएं लिखना आसान नहीं है। लेकिन फिर भी मैं लिखता हूं, क्योंकि मेरे भीतर की ऐसी कुछ चीजें हैं, जो मरने से, खत्म होने से इन्कार करती हैं। वे कविता की शक्ल में बाहर आती हैं। इसलिए कविता लिखने की प्रक्रिया मेरे लिए तकलीफ से गुजरने जैसी है। मेरी कविताएं ओडिशा के इतिहास, परंपरा और प्रथाओं से बेहद प्रभावित हैं।
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जैसे, मेरी हंगर कविता में 1866 के उस भयंकर अकाल का जिक्र आया है, जिसमें भूख से छटपटाती मेरी दादी मरते-मरते बची थी। तब हजारों लोगों ने आम की गुठली खाकर जान बचाई थी। ठीक इसी तरह मेरी धोली कविता धोली नदी के उस रक्तरंजित इतिहास के बारे में बताती है, जिसके तट पर सम्राट अशोक के सैनिकों ने करीब एक लाख लोगों की हत्या की थी। मुझे भारत में आधुनिक अंग्रेजी कविता की नींव तैयार करने वाले तीन कवियों में से एक कहा जाता है, तो इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूं।
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-अंग्रेजी के चर्चित भारतीय कवि