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'शिक्षण मानव मन एवं आत्मा का परिष्कार करता है'

Wed, 04 Apr 2018 01:09 AM IST
ग्रेजिया डेलेडा
ग्रेजिया डेलेडा Updated Wed, 04 Apr 2018 01:09 AM IST
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Biography of Grazia Deledda- Italian writer who received Nobel Prize for Literature
Grazia Deledda

मेरा जन्म नुओरो के एक छोटे शहर सार्दिनिया में हुआ था। मेरे पिता बहुत ही संपन्न जमींदार थे, जो अपने खेतों पर खेती करते थे। वह मेहमाननवाज व्यक्ति थे और आसपास के शहरों में उनके कई मित्र थे। जब मेरे पिता के मित्र और उनके परिजन किसी छुट्टी पर या व्यावसायिक काम से हमारे शहर आते थे, तो वे हमारे ही घर पर ठहरते थे। इस तरह मुझे अपने उपन्यासों के विभिन्न पात्रों को जानने का मौका मिला।

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मैंने नुओरो में ही प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद मैं एक शिक्षक से घर पर ही इतालवी सीखने लगी। वह मुझे लिखने के लिए विषय सुझाते थे। उन विषयों पर लिखी मेरी कुछ कहानियां इतनी अच्छी थीं कि उन्होंने उन रचनाओं को अखबारों में छपाने की सलाह दी। रचनात्मक अभिव्यक्ति और ज्ञान में खुशी जगाना शिक्षक की सर्वोच्च कला है और उन्होंने यही किया। मेरा मानना है कि एक महान शिक्षक एक महान कलाकार होता है और ऐसे शिक्षक महान कलाकारों की तरह ही बहुत कम मिलते हैं।
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शिक्षण कलाओं से भी महान कार्य है, क्योंकि यह मानव मन एवं आत्मा का परिष्कार करता है। खैर, उस समय मेरी उम्र मात्र तेरह साल ही थी और मुझे मालूम नहीं था कि अपनी कहानियों के प्रकाशन के लिए किसके पास जाना चाहिए। तभी मैं एक फैशन मैगजीन के संपर्क में आई, उसे मैंने अपनी एक कहानी छपने के लिए भेज दी। वह तुरंत छप गई। फिर मैंने एक उपन्यास लिखा और एक संपादक को भेज दिया। छपने के बाद वह काफी सफल हुआ। फिर तो सिलसिला चल निकला। मैंने कुछ कविताएं भी लिखीं, जो किसी संकलन में नहीं हैं।
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-इटली की नोबेलजयी लेखिका

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