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Hindi News ›   Columns ›   Literature ›   Antardhwani : views of Prominent Hindi Writer Subhadra Kumari Chauhan on Art and injustice

अंतर्ध्वनि : कला का लोभ और अन्याय के प्रति क्षोभ भी

Thu, 26 Sep 2019 01:12 AM IST
Gaurav Pandey सुभद्रा कुमारी चौहान
सुभद्रा कुमारी चौहान Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 26 Sep 2019 01:12 AM IST
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Antardhwani : views of Prominent Hindi Writer Subhadra Kumari Chauhan on Art and injustice
सुभद्रा कुमारी चौहान - फोटो : फाइल फोटो

बचपन से ही मैं कविताएं लिखने लगी, जिसके कारण स्कूल में मेरी बड़ी प्रसिद्धि थी। बाद में मैंने कहानियां भी लिखनी शुरू कीं, क्योंकि उस समय संपादक कविताओं पर पारिश्रमिक नहीं देते थे। संपादक चाहते थे कि मैं गद्य रचना करूं और इसके लिए मुझे वे पारिश्रमिक भी देते थे। फिर मैंने कहानियां लिखनी शुरू की। इसके अलावा, समाज की अनीतियों से जुड़ी वेदना की अभिव्यक्ति का माध्यम गद्य ही हो सकता था। 

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रूढ़ियों और सामाजिक बंधनों की शिलाओं पर अनेक निरपराध आत्माएं प्रतिदिन चूर-चूर हो रही हैं। उनके हृदयबिंदु जहां-तहां मोतियों के समान बिखरे पड़े हैं। मैंने तो उन्हें केवल बटोरने का ही प्रयत्न किया है। मेरे इस प्रयत्न में कला का लोभ है और अन्याय के प्रति क्षोभ भी। सभी मानवों के हृदय एक से हैं। वे पीड़ा से दुखित, अत्याचार से रुष्ट और करुणा से द्रवित होते हैं। दुख, रोष और करुणा किसके हृदय में नहीं हैं? 
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इसलिए मेरी कहानियां मेरी न होने पर भी मेरी हैं, आपकी न होने पर भी आपकी और किसी विशेष की न होने पर भी सबकी हैं। समाज और गृहस्थी के भीतर जो घात, प्रतिघात निरंतर होते रहते हैं, उनकी ये प्रतिध्वनियां मात्र हैं, उन्हें आपने सुना होगा। मैंने कोई नई बात नहीं लिखी है, केवल उन प्रतिध्वनियों को अपने भावुक हृदय की तंत्री के साथ मिलाकर ताल स्वर में बैठाने का ही प्रयत्न किया है। हृदय के टूटने पर आंसू निकलते हैं, जैसे सीप के फूटने पर मोती। 
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हृदय जानता है कि उसने स्वयं पिघलकर उन आंसुओं को ढाला है। अतः वे सच्चे हैं। किंतु उनका मूल्य तो कोई प्रेमी ही बतला सकता है। उसी प्रकार सीप केवल इतना जानती है कि उसका मोती खरा है, वह नहीं जानती कि वह मूल्यहीन है अथवा बहुमूल्य। उसका मूल्य तो रत्नपारखी ही बता सकता है। मैं भूखे को भोजन खिलाना और प्यासे को पानी पिलाना अपना परम धर्म समझती हूं। ईश्वर के बनाए नियमों को मानती हूं।

-दिवंगत हिंदी लेखिका।

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