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अंतर्ध्वनि : घर में रहते हुए भी कोई कवि निर्वासन झेल सकता है
Tue, 04 Jun 2019 06:36 AM IST
Avdhesh Kumar
ईमान मर्सल
ईमान मर्सल
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 04 Jun 2019 06:36 AM IST
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ईमान मर्सल
- फोटो : Social Media
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कुछ लोग कविता को विरोध की आवाज कहते हैं। यह ऐसी बात है, जिससे मैं अपने अब तक के जीवन में जुड़ाव नहीं महसूस कर पाती। शायद ऐसा उस संस्कृति के कारण है, जहां से मैं आती हूं। औपनिवेशिक युग की समाप्ति के बाद बहुत बड़े राजनीतिक सवाल खड़े हुए थे, उन पर बेहद बौद्धिक-विचारधारात्मक बहसें चलीं, और उसके बाद अरब साहित्यिक पटल पर फलीस्तीनी त्रासदी ने बहुत बड़ी जगह घेर ली। उस दौर से महान कवि निकलकर आए, जैसे कि महमूद दरवेश, फिर भी मेरा मानना है कि उनकी कविता में काव्यशास्त्र का जो सुंदर प्रयोग है, वह प्रतिवाद या विरोध के इस तत्व से पूर्णतः स्वतंत्र है।
प्रामाणिक कला, अपनी शैक्षणिक भूमिका अदा करती हुई एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक धारा हो सकती है। जैसा कि बादू ने कहा है, कला शैक्षणिक होती है, क्योंकि यह सत्य का संधान करती है और शिक्षा भी इससे अलग कुछ नहीं करती : यानी ज्ञान की विभिन्न विधाओं का संयोजन इस तरह करना कि सत्य उसमें एक छोटा-सा छेद कर सके।
कुछ कवियों को निर्वासन मिलता है, कई विस्थापित हो जाते हैं, लेकिन कई ऐसे कवि होते हैं, जो बिना घर-बार, देश-दुआर छोड़े ही एलियनेशन, विस्थापन या तमाम राजनीतिक संघर्ष झेल लेते हैं। इसीलिए मैं निर्वासन शब्द का इस्तेमाल करने से बचती हूं, क्योंकि इस शब्द के सारे अर्थ समझे बिना इसका गलत इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जाता है।
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मेरी पीढ़ी के युवा कवि, फिल्मकार और बुद्धिजीवी, हम सब इस एलियनेशन को बहुत शिद्दत से महसूस कर रहे थे और इसी ने हमें इस इच्छा से भर दिया कि हम अरब संस्कृति के सौंदर्यशास्त्र और ऐतिहासिक विचारधाराओं से परे हट जाएं, कविता में तो खासकर। इस तरह गद्य कविता हमारे लिए मुख्यधारा के महा-आख्यानों का निषेध थी। -मिस्र की मशहूर अरबी कवयित्री।
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प्रामाणिक कला, अपनी शैक्षणिक भूमिका अदा करती हुई एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक धारा हो सकती है। जैसा कि बादू ने कहा है, कला शैक्षणिक होती है, क्योंकि यह सत्य का संधान करती है और शिक्षा भी इससे अलग कुछ नहीं करती : यानी ज्ञान की विभिन्न विधाओं का संयोजन इस तरह करना कि सत्य उसमें एक छोटा-सा छेद कर सके।
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कुछ कवियों को निर्वासन मिलता है, कई विस्थापित हो जाते हैं, लेकिन कई ऐसे कवि होते हैं, जो बिना घर-बार, देश-दुआर छोड़े ही एलियनेशन, विस्थापन या तमाम राजनीतिक संघर्ष झेल लेते हैं। इसीलिए मैं निर्वासन शब्द का इस्तेमाल करने से बचती हूं, क्योंकि इस शब्द के सारे अर्थ समझे बिना इसका गलत इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जाता है।
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मेरी पीढ़ी के युवा कवि, फिल्मकार और बुद्धिजीवी, हम सब इस एलियनेशन को बहुत शिद्दत से महसूस कर रहे थे और इसी ने हमें इस इच्छा से भर दिया कि हम अरब संस्कृति के सौंदर्यशास्त्र और ऐतिहासिक विचारधाराओं से परे हट जाएं, कविता में तो खासकर। इस तरह गद्य कविता हमारे लिए मुख्यधारा के महा-आख्यानों का निषेध थी। -मिस्र की मशहूर अरबी कवयित्री।