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अपराधियों से लेकर नदियों तक को नवजीवन दिया

Fri, 17 May 2019 03:52 PM IST
शरद मिश्र नगाराज गंगोल्ली
नगाराज गंगोल्ली Published by: शरद मिश्र Updated Fri, 17 May 2019 03:52 PM IST
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a man known by his hard work
नगाराज गंगोल्ली - फोटो : amar ujala
मैं बचपन से ही स्वतंत्र और उदार विचारों का रहा, जिसकी मुझे जब-तब कीमत भी चुकानी 
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पड़ी। मैं स्कूल में कई बार ऐसे सवाल पूछने पर डांट खा चुका था, जो जायज तो थे, पर मेरे 
शिक्षकों के लिए असुविधाजनक थे। पंद्रह साल की उम्र में घर पर मेरी पिटाई हुई थी, क्योंकि 
मैं एक दलित लड़के के साथ घूम रहा था। बाद में मैं एचएमटी कंपनी में नौकरी करने लगा। पर 
दूसरों की बेहतरी की चिंता के कारण मैं अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं था। इसी सिलसिले में 
वर्ष 2004 में मैं आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ गया। यह जुड़ाव सिर्फ अपनी शांति के लिए नहीं था, 
बल्कि इसलिए था कि दूसरों की तकलीफें दूर कर सकूं। लोगों में बढ़ते गुस्से, ईर्ष्या भाव और 
घृणा को उनके स्वभाव से न जोड़कर वर्तमान जीवन स्थिति से जोड़ने का आइडिया मुझे आर्ट ऑफ 
लिविंग से मिला। चूंकि लोग मुझे जानते थे, इसलिए युवाओं, पुलिस के जवानों और अपराधियों तक 
को बदलने का अभियान मैंने शुरू कर दिया। अपनी इस मुहिम में मैं सफल भी हुआ। इस संदर्भ में मैं 
प्रवीण का उदाहरण दे सकता हूं। मांड्या का रहने वाला प्रवीण खूंखार अपराधी था और बंगलूरू 
के सभी थानों में उसके खिलाफ डकैती और चेन छीनने के मुकदमे दर्ज थे।

अपराधियों को मुख्यधारा में लाने के लिए चलाए जा रहे एक वर्कशॉप में मेरी मुलाकात प्रवीण से हुई।
मैंने उसे बदलने की ठानी और आज वह वेदवती नदी को नवजीवन देने के अलावा चिकमगलूर के
जंगल में भूमिगत जल स्तर को बेहतर करने के अभियान में लगा है। प्रवीण में आए इस बदलाव से
राज्य का पुलिस महकमा बहुत खुश है और वह मेरे अभियान को और व्यापक रूप देना चाहता है।
कर्नाटक में किसानों की परेशानी दूर करने के लिए मैंने वेदवती और कुमुदवती नदियों के पुनरुद्धार
अभियान पर न सिर्फ काम शुरू किया, बल्कि स्थानीय लोगों को भी इस अभियान से जोड़ा।
अगर यह काम सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो बंगलूरू शहर में जल संकट का भी समाधान
निकल सकता है।यही नहीं, इससे कावेरी के पानी को लेकर तमिलनाडु के साथ चल रहे
पुराने विवाद का भी अंत हो जाएगा। इस काम की शुरुआत 2011 में तब हुई, जब मैं लक्ष्मीपुरा
गांव के लगभग एक सौ किसान परिवारों के साथ जल संकट के समाधान की परियोजना पर काम
कर रहा था। चूंकि वहां जल संकट के स्थायी और टिकाऊ समाधान पर वैज्ञानिक तरीके से
काम हो रहा था, इसलिए हमें समाधान मिला और लक्ष्मीपुरा गांव तथा उसके आसपास के इलाकों
में जल स्तर साढ़े तीन सौ फीट से अस्सी फीट पर आ गया।

उसी दौरान मुझे यह भी समझ में आया कि अगर सही तरीके से काम हो, तो मानसून की कम
बारिश के बावजूद पानी की कमी से निपटा जा सकता है। इस परियोजना में सफलता के बाद
अब मैं जल संकट के समाधान की एक बड़ी परियोजना पर कुमुदवती रिवर बेसिन में काम कर
रहा हूं, जो 1,097 गांवों, 24 ग्राम पंचायतों और 25 लाख लोगों के जीवन से जुड़ा है।

यह नदी कभी 276 गांवों और बंगलूरू महानगर की प्यास बुझाती थी। लेकिन तीव्र शहरीकरण,
जंगलों की कटाई, अवैध रेत खनन और यूकिलिप्टस के पेड़ लगाए जाने के कारण यह नदी
धीरे-धीरे मर चुकी है।शुक्र है कि कर्नाटक में नदियों को नवजीवन देने के मेरे अभियान को
सरकार और स्थानीय प्रशासन का सहयोग मिला है।जगह-जगह तालाब खोदे जा रहे हैं और
वर्षा जल जमा कर भूमिगत जलस्तर को ऊपर उठाया जा रहा है।

-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित
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