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बेटियों का साल: हर भारतीय बेटी की आवाज, विश्वास और अवसर ने रचा इतिहास

Tue, 04 Nov 2025 07:08 AM IST
शुभम कुमार नवनीत सहगल अध्यक्ष, प्रसार भारती
नवनीत सहगल अध्यक्ष, प्रसार भारती Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 04 Nov 2025 07:08 AM IST
सार

साल 2025 भारत की बेटियों के लिए यादगार साबित हुआ। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पहली बार 17 महिला कैडेट्स ने ग्रेजुएशन पूरा किया और महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जीतकर देश का नाम रोशन किया। ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि विश्वास और अवसर मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में इतिहास रच सकती हैं, राजनीति, खेल, विज्ञान और समाज में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

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Year of the Daughters: The voice, confidence, and opportunities of every Indian daughter have made history.
भारत ने महिला वनडे विश्व कप का खिताब जीता - फोटो : PTI

विस्तार

साल 2025 को अगर बेटियों का साल कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस एक वर्ष ने भारत के सामाजिक परिवर्तन, संस्थागत सुधार और महिला सशक्तीकरण के उस दौर को सामने रखा है, जिसकी नींव पिछले एक दशक में रखी गई थी। 30 मई, 2025 को इतिहास रचा गया, जब राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पहली बार 17 महिला कैडेट्स ने 300 से अधिक पुरुष कैडेट्स के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया। इसी साल नवंबर में, भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जीतकर तिरंगे को विश्व मंच पर लहराया। यह किसी सामान्य उपलब्धि से बढ़कर उस सामाजिक चेतना का प्रतीक हैं, जो बताती है कि अगर विश्वास किया जाए, अवसर दिया जाए, तो भारत की बेटियां हर क्षेत्र में इतिहास रच सकती हैं।

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हर भारतीय बेटी की आवाज
महिला क्रिकेट टीम की एक युवा खिलाड़ी ने विश्वकप जीत के बाद जब कैमरे के सामने कहा, ‘जिन्होंने भी हम पर विश्वास किया, उन सबका बहुत शुक्रिया।’ ऐसा लगता है कि ये पंक्ति इस देश की तमाम बेटियों के दिल से निकली हुई आवाज है। यह बात न सिर्फ तमाम संस्थानों, बल्कि हर भारतीय को कान और दिमाग खोलकर सुननी चाहिए और समझना चाहिए कि अगर आप भरोसा करें और अवसर दें तो बेटियां भी वर्ल्ड चैंपियन बन तिरंगे की शान बढ़ाने में किसी से कम नहीं। महिला क्रिकेट टीम की वनडे विश्वकप में यह जीत साबित करती है कि वाकई ‘मेरा देश बदल रहा है।’ राजनीति से लेकर खेल के मैदान तक, कॉर्पोरेट से लेकर घर चलाने तक, सीमा से लेकर इसरो तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी स्पष्ट बताती है कि बीते कुछ वर्षों में क्या कुछ बदला है, जिसकी दरकार आजादी के बाद से अब तक थी।
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समान अवसर की नीतियां और नई पहल
महिलाओं की इस सफलता के पीछे नीतिगत परिवर्तन भी है। बीते एक दशक में खेल, सेना, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में ऐसे कई निर्णायक कदम उठाए गए, जिन्होंने बेटियों को नई उड़ान दी। बेशक यह समय बेटियों को सलाम करने का है, तो उन फैसलों पर गौर करने का भी है, जिन्होंने इन हौसलों को पंख दिए। इन  क्रम में बीसीसीआई द्वारा 2022 में लिया गया समान वेतन का फैसला और बीते एक दशक में बेटियों को भी पुरुष खिलाड़ियों की तरह समान अवसर दिए जाने व उनकी प्रतिभा-क्षमता को हर क्षेत्र में एक ही चश्मे से देखे जाने की जो कवायद की गई, वह वाकई अहम है।
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खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों का महत्व : मोदी सरकार ने महिला खिलाड़ियों के लिए खेलो इंडिया स्कीम में अलग विंग स्थापित की, जिसमें ग्रामीण और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को पहचानने व प्रशिक्षित करने की नीति लागू की गई। ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ के जरिये महिलाओं को खेलों, योग और फिटनेस के साथ जोड़ना सामाजिक आंदोलन बन चुका है।

सशस्त्र बलों में भागीदारी
2015 में महिला फाइटर पायलटों की नियुक्ति से लेकर 2025 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से महिला कैडेट्स के पास आउट होने तक, यह दशक में भारत की सैन्य नीति में सबसे बड़ा बदलाव है। अब महिलाएं न केवल प्रशासनिक पदों पर, बल्कि युद्धक भूमिकाओं में भी कार्यरत हैं।

घर, कॉर्पोरेट और राजनीति, हर क्षेत्र में दबदबा
आज महिलाएं समाज के हर स्तर पर परिवर्तन की धुरी बन चुकी हैं। कॉर्पोरेट जगत में महिला सीईओ लगातार बढ़ रही हंै, संसद में महिला सांसदों की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर है और घरों में बेटियों की शिक्षा व आर्थिक निर्णयों में भूमिका पहले से कहीं अधिक सशक्त हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार अपने भाषणों में कहा है, ‘जब एक बेटी आगे बढ़ती है तो पूरा परिवार, पूरा समाज आगे बढ़ता है।’ यह दृष्टिकोण अब सरकारी नीति का हिस्सा तो बन ही चुका है बल्कि सामाजिक चेतना में भी देखा जा सकता है।

समान वेतन नीति
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 2022 में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पुरुष व महिला खिलाड़ियों में वेतन समानता लागू की। इसके तहत अब महिला खिलाड़ियों को भी प्रति मैच उतनी ही फीस मिलती है, जितनी पुरुष टीम के खिलाड़ियों को।


नए भारत में नई भूमिका में
आज भारत में महिला भागीदारी सिर्फ सांकेतिक नहीं रह गई, बल्कि निर्णायक हो चुकी है। क्रिकेट मैदान में जीत हो या सीमा पर ड्यूटी, महिलाएं अब हर मोर्चे पर उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नेतृत्व, महिला वैज्ञानिकों की बढ़ती भूमिका और खेलों में महिला खिलाड़ियों की सफलता यह सब नए भारत की तस्वीर है, जहां महिलाओं की प्रतिभा किसी श्रेणी या जेंडर में बंधी नहीं। वास्तव में यह वही सपनों का भारत है, जहां काबिलियत का कोई जेंडर न हो।

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