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विश्व जल दिवस 2022: कब तक खोखली चिंता करते रहेंगे हम

Tue, 22 Mar 2022 11:51 AM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Tue, 22 Mar 2022 11:51 AM IST
सार

पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर जैसे इलाकों में पारंपरिक रूप से एक-एक बूंद को सहज कर टांके में रखा जाता था। एक बरसात के पानी को 12 महीने उपयोग में लिया जाता था। टांके से पीने, खाना बनाने और महिलाओं के बाल धोने का पानी मिलता था। गांव के तालाब की सभी ग्रामीण रक्षा करते थे।

तालाब की जिम्मेदारी पूरे गांव की होती थी। 150 मिलीमीटर बरसात के बावजूद तालाब पूरे गांव को पानी देता था। यह व्यवस्थाएं धीरे-धीरे टूट गईं। यह परिवर्तन विगत दो-तीन दशकों में आया है। आखिर क्यों हम जल की महत्ता को गंभीरता से नहीं ले रहे? क्या टेक्नोलॉजी ने मानव स्वभाव को बदला है? सवाल बहुत हैं, लेकिन विश्व जल दिवस पर एक दिन चिंतन करके हम अपने कर्तव्यों से इतिश्री नहीं पा सकते हैं।

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World Water Day 2022 To overcome the water crisis we need to take big steps
विश्व जल दिवस 2022 - फोटो : Istock

विस्तार

पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर जैसे इलाकों में पारंपरिक रूप से एक-एक बूंद को सहज कर टांके में रखा जाता था। एक बरसात के पानी को 12 महीने उपयोग में लिया जाता था। टांके से पीने, खाना बनाने और महिलाओं के बाल धोने का पानी मिलता था। गांव के तालाब की सभी ग्रामीण रक्षा करते थे।

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तालाब की जिम्मेदारी पूरे गांव की होती थी। 150 मिलीमीटर बरसात के बावजूद तालाब पूरे गांव को पानी देता था। यह व्यवस्थाएं धीरे-धीरे टूट गईं। यह परिवर्तन विगत दो-तीन दशकों में आया है। आखिर क्यों हम जल की महत्ता को गंभीरता से नहीं ले रहे? क्या टेक्नोलॉजी ने मानव स्वभाव को बदला है? सवाल बहुत हैं, लेकिन विश्व जल दिवस पर एक दिन चिंतन करके हम अपने कर्तव्यों से इतिश्री नहीं पा सकते हैं।
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वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार निकट भविष्य में 17 देश दुनिया में जल संकट का सामना करने वाले हैं। यहां संकट बिल्कुल सामने खड़ा है। इन देशों में भारत भी है। यदि हम केवल भारत के परिपेक्ष्य में बात करें तो हमें 4000 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी हर साल उपलब्ध होता है।
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इसमें से 2000 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी हमारे उपयोग में आने योग्य होता है। यदि हम अपनी जल संग्रहण क्षमता देखें तो यह 250 बिलियन क्यूबिक मीटर ही है, जिसमें बड़े से बड़े बांध और गांव के छोटे तालाब तक शामिल हैं। यदि नदियों को जोड़ दिया जाए तो हमारी कुल जल संग्रहण क्षमता 400 बिलियन क्यूबिक मीटर ही है।

देश में 700 से ज्यादा नदियां हैं। केवल 4 प्रतिशत नदियां ऐसी हैं, जो हिमालय से निकल रही हैं। इनमें मानसून के अतिरिक्त बर्फ के पिघलने से पानी आता है। बाकी 96 प्रतिशत नदियां जंगल आधारित हैं। क्लाइमेट चेंज का जो खतरा सामने खड़ा है, उससे सारा विश्व इससे घबरा रहा है।

इसके प्रभाव दिखाई देने लगे हैं। इससे हमारा बरसात का समय घट गया है। 45 दिनों में 90 प्रतिशत पानी बरस जाता है। इसलिए हमें 45 दिन में बरसे पानी को बाकी बचे हुए 320 दिन के लिए बचाकर रखने की जरूरत है।

दूसरा हमारा सबसे बड़ा स्रोत भूजल है। यह करीब 750 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जबकि बरसात से जो पानी जमीन में रिचार्ज होता है, वो केवल 450 बिलियन क्यूबिक मीटर है। कुल मिलाकर लाखों साल से जो पानी जमीन में संचय हुआ है, उसका डेढ़ गुना हम हर साल निकाल रहे हैं, यानी हम अपनी जमा पूंजी में से हर साल पानी ले रहे हैं। नतीजन, 22 प्रतिशत ब्लॉक ऐसे हैं, जहां भूजल संकट है।

World Water Day 2022 To overcome the water crisis we need to take big steps
विश्व जल दिवस 2022 - फोटो : Istock

भारत में दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन दुनिया का 4 प्रतिशत पानी ही हमारे पास है। ऐसे में दुनिया से भी बड़ी चुनौती भारत में ही है। दुनिया में जितना पानी धरती से निकाला जाता है, उसमें हमारी भागीदारी 25 प्रतिशत की है। हमारी 65 प्रतिशत निर्भरता भूजल पर है।

देश में कुल उपयोग का पांच प्रतिशत पानी का घरेलू इस्तेमाल होता है। छह प्रतिशत पानी उद्योगों में इस्तेमाल होता है। शेष 89 प्रतिशत पानी खेती में उपयोग होता है। सिंचाई में उपयोग का 80 प्रतिशत हिस्सा कपास, गन्ना और चावल की फसल में जा रहा है। पिछले 40 साल में सिंचाई का जितना रकबा बढ़ा है, वो जमीन के पानी पर ही निर्भर है।

हमारे किसान हर साल 2 करोड़ टन चावल सरप्लस उगाते हैं। हमारा पानी दुनिया में सबसे कम उत्पादक माना गया है। हमारे यहां एक किलो चावल 5600 लीटर पानी में उगता है, जबकि चीन समेत दूसरे कई देश 350 लीटर पानी में यही काम कर लेते हैं। कम पानी में चावल उगाने की यह तकनीक तो हमारे वैज्ञानिक 20 साल पहले खोज चुके हैं।

विडंबना यह है कि आज तक हम उसे किसानों तक नहीं पहुंचा सके हैं। हम जमीन से पानी निकालते हैं और हर साल 20 फीट पानी नीचे जा रहा है। भूजल अदृश्य स्रोत है, इसलिए हम उसकी चिंता नहीं करते हैं। यदि हम ऐसी फसलों का उपयोग करें जो कम पानी में हो जाएं या हम ऐसी विधि का उपयोग करें, जिसमें कम पानी में फसल हो जाए।

World Water Day 2022 To overcome the water crisis we need to take big steps
विश्व जल दिवस 2022 - फोटो : Istock

 रिसाइकिल ऑफ वाटर बेहद जरूरी है। इजरायल 94 प्रतिशत पानी को रिसाइकिल करता है। इजरायल के बाद दूसरे सबसे ज्यादा पानी रिसाइकिल करने वाले देश की क्षमता 34 प्रतिशत है। हमारे यहां तो यह 20 प्रतिशत से भी कम है। इस रिसाइकिल पानी का 10 प्रतिशत पानी ही हम इस्तेमाल कर पा रहे हैं।

यही कारण है कि हमारी नदियां दुनिया में सबसे प्रदूषित हैं। हमें रिसाइकिल पर बहुत काम करने की आवश्यकता है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां एक व्यक्ति, संस्था, समूह, ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधि या सरकार ने अपने स्तर पर प्रयास किए और क्षेत्र या गांव को जल समृद्ध बनाने में सफलता पाई।

जब एक गांव जल समृद्धि होता है तो वो केवल गांव को पानी की सुरक्षा प्रदान नहीं करता, अपितु पूरे ईको सिस्टम में परिवर्तन लाता है। तालाब पुनर्जीवित हुआ तो पेड़ खड़े हुए, पेड़ खड़े हुए तो चिड़िया वापस आ गईं, चिड़िया आ गईं तो जीवन वापस आ गया।

आजादी के समय हमारी प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत 5000 क्यूबिक मीटर थी, जो घटकर अब 1540 क्यूबिक मीटर पर आ गई है। ऐसा माना जाता है कि यदि 1500 क्यूबिक मीटर पानी से नीचे यह आंकड़ा गया तो देश को पानी की किल्लत वाला मान लिया जाएगा। हम बिल्कुल उसके मुहाने पर खड़े हैं। ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि बरसात कम हुई, ऐसा इसलिए हुआ कि हमारी आबादी जो आजादी के समय 30-32 करोड़ थी, वो बढ़कर 130 करोड़ से अधिक हो गई।

पर्यावरण को लेकर पूरा विश्व हमारी तरफ देख रहा है। दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है तो हमारी जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है। हमारे यहां जल स्रोतों की संख्या घटी है। जिन तालाबों को हमने पहले भरा देखा था, उनमें से कई लुप्त हो गए हैं। पिछले 50 साल में कई नदियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है।

हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने की जरूरत है। केवल सरकारी प्रयास से जल संकट से नहीं बच सकते हैं। हम सबको साथ जुटना पड़ेगा। समाज को इस दिशा में काम करना होगा। यह भी देखना होगा कि पानी का विवेकपूर्ण उपयोग कैसे किया जाए, हमें किसी भी कार्य की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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