World Hypertension Day 2020: बदलती दुनिया का साइलेंट किलर है हाई ब्लड प्रेशर
- तनाव का परिणाम है, कि आज हम वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाने लगे हैं।
- प्रत्येक वर्ष 17 मई को दुनियाभर के देशों के द्वारा हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है।
- भारतीय जीवन पद्दति योग और सहयोग पर आधारित रही है।
- भारतीय आयुर्वेद पद्दति केवल चिकित्सा विज्ञान नहीं, अपितु जीवन जीने की कला भी है।
विस्तार
जिंदगी की आपा-धापी में स्वयं के लिए वक्त की कमी आगे चलकर बडी समस्याओं का कारण बन जाती है। भारतीय जीवनशैली सबको साथ लेकर चलने की रही है, ऐसे में परिवार, समाज का साथ चलना सबसे अहम होता रहा है, जिसे हमने बदलाव के दौर का तकाजा मान लिया।
तेजी से बदलती दुनिया के ग्लोबल दौर ने लोगों के जीवन को दौड़ का मैदान बना डाला है, जिसमें हर छोटी-बड़ी बात के लिए अलग-अलग लंबी कतारे हैं और सब तैयार हैं, दूसरों को पीछे छोड़ सबसे पहला नंबर लाने को।
ऐसे में क्या बच्चा, क्या बूढ़ा सब दौड के मैदान में डटे हैं और कई तरह के तनाव और बीमारियों को आमंत्रित कर रहे हैं। इस तनाव का परिणाम है, कि आज हम वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाने लगे हैं। इसका प्रारंभ 2005 में उच्च रक्तचाप की जटिलताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी।
प्रत्येक वर्ष 17 मई को दुनियाभर के देशों के द्वारा हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है, जिसे हम ब्लडप्रेशर की बीमारी भी कहते हैं। अक्सर हम मानते हैं, कि यह अत्यधिक तनाव या मानसिक दबाव के कारण लोगों में जन्म लेती हैं, लेकिन आधुनिक शोध यह भी बताते हैं, कि दुनिया ने अपनी जीवनशैली में जिस तरह से परिवर्तन किया हैं, वह इस खतरनाक बीमारी जो कई दूसरी बीमारियों के लिए द्वार खोलने का एक कारण है।
आंकडे बताते हैं कि 60 साल के बाद करीब 50 प्रतिशत लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं। तेजी से पैर फैलाती इस बीमारी ने अब कम उम्र के बच्चों को भी अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है, शायद इसलिए दुनिया इसे साइलेंट किलर के नाम से भी पहचानती है।
हाइपरटेंशन का खतरा दिल की बीमारियों की संभावना को काफी हद तक बढा देता है...
हाइपरटेंशन का खतरा दिल की बीमारियों की संभावना को काफी हद तक बढ़ा देता है। हाई ब्लड प्रेशर से दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही हैं। लोगों ने अपने खान-पान में बदलाव करके इस खतरे को और बढाने का काम किया है। हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर इसलिए भी कहते हैं, क्योंकि इसके कोई खास लक्षण नहीं दिखते।
इसके कारण व्यक्ति को सिरदर्द, चक्कर आना, शिथिलता, सांस में परेशानी, नींद न आना, थोड़ी सी मेहनत करने में सांस फूलना, नाक से खून निकलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका शुरुआती दौर कई और तरह की बीमारियों को न्योता देता है, जैसे- शरीर के विभिन्न अंग दिल, किडनी और आंखों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
भारतीय जीवन पद्दति योग और सहयोग पर आधारित रही है, इसलिए उन तमाम बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखती है, जिसके आगे दुनिया अपने हथियार डाल देती है। रिसर्च भी यही बताते है, कि संतुलित आहार, योग आधारित जीवन शैली जीवन के कई खतरों को दूर कर देती है।
प्रसन्नचित मन और शांत दिमाग कई करह के तनाव दूर करता है। नियमित योग और आध्यात्म से जुडकर शरीर के हाइपरटेंशन के खतरे को दूर किया जा सकता है।
इन समस्याओं से दूर करने में भारतीय आयुर्वेदिक साइकोथेरपी जिसमें प्राणायाम, ध्यान, मुक्तासन,कूर्मासन, मकरासन जैसे कई आसन हाई ब्लडप्रेशर से जुडी समस्याओं को दूर करने में कारगार साबित हो रहा है। अपने खान-पान में फास्ट-फूड, तली-भुनी, ज्यादा मिर्च मसाले वाले भोजन को कम करके, नियमित व्यायाम करके इसपर नियंत्रण पाया जा सकता है।
बदलती दुनिया का साइलेंट किलर मानव जीवन के लिए हानिकारक है....
डब्ल्यूएचओ का मानना है कि कोरोना संकट के इस दौर में स्वास्थ्य से सम्बन्धित रोग जिनमें हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां काफी अहम हैं, के लिए ज्यादा सर्तकता बरतने की आवश्यकता है। अध्ययन के अनुसार वुहान के ही 2 अस्पतालों के 191 मरीजों को शामिल किया गया था।
शोध में शामिल मरीजों में 30 प्रतिशत लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या थी, जबकि मरने वालों में 54 मरीजों में से 48 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन की समस्या से जूझ रहें थे।
ऐसे समय में जब दुनिया सदमें में है, लोगों को तनाव मुक्त रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है, जिससे उनके स्वास्थ्य संबधित बीमारियों से बचाव हो सके। जिन कारणों से जीवन में तनाव बढता है, उन्हें छोडने की कोशिश करें, क्योंकि जान है, तो जहांन है।
संतुलित आहार, व्यवहार, सुबह सवेरे टहलने की आदत, घूप का सेवन आदि के साथ-साथ अपने चिकित्सकों से परामर्श लेकर साथ ही अपनी प्राचीन स्वास्थ्य जीवन शैली को अपनाकर स्वस्थ्य जीवन को जिया जा सकता है।
भारतीय आयुर्वेद पद्दति केवल चिकित्सा विज्ञान नहीं, अपितु जीवन जीने की कला भी है। भारतीय जीवन पद्दति रोग को ठीक करने के साथ इस बात पर भी जोर देती है, कि कोई नया रोग मानव शरीर में उत्पन्न ही न हो, क्योंकि बदलती दुनिया का साइलेंट किलर मानव जीवन के लिए हानिकारक है।
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