विश्व साहित्य का आकाश: हान कान्ग को नोबेल पुरस्कार
1901 से 2024 तक साहित्य का नोबेल पुरस्कार 117 बार दिया गया है और यह 121 रचनाकारों को प्राप्त हुआ है। इस सदी में स्त्री लेखन ने नोबेल समिति का ध्यान खासतौर पर खींचा है।
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10 अक्तूबर 2024 को नोबेल समिति की साहित्य पुरस्कार विजेता की घोषणा सुन कर हान कान्ग पर उपन्यासकार इमर मैक्ब्रिड की प्रतिक्रिया थी, ‘एक महान जीवित रचनाकार, वे स्त्रियों, सत्य और सबसे बढ़कर साहित्य शक्ति जो कर सकती है उसकी आवाज हैं।’ उन्होंने कुछ शब्दों में हान कान्ग के लेखन की तमाम विशेषताओं को गिना दिया है। सच में इस साल यह पुरस्कार उपयुक्त रचनाकार को मिला है।
1901 से 2024 तक साहित्य का नोबेल पुरस्कार 117 बार दिया गया है और यह 121 रचनाकारों को प्राप्त हुआ है। कई बार दो लोगों को एक साथ नोबेल पुरस्कार दिया गया है। इसमें से कई स्त्री रचनाकार रही हैं। इस सदी में स्त्री लेखन ने नोबेल समिति का ध्यान खासतौर पर खींचा है। मात्र 24 सालों में नौ स्त्री रचनाकारों को यह प्राप्त हुआ है, जबकि पूरी पिछली सदी में केवल नौ को मिला था।
इस सदी में आगे स्त्री रचनाकारों के लिए संभावना दिख रही है। हान कान्ग इंटरनेशनल बुकर और नोबेल पाने वाली दक्षिण कोरिया की पहली महिला रचनाकार हैं।
‘द वेजीटेरियन’ की रही है चर्चा
स्त्री जीवन के आसपास कथानक बुनने वाली दक्षिण कोरिया में 27 नवम्बर 1970 को जन्मीं हान कान्ग के लिए नोबेल समिति ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है, ‘उनका गहन काव्यात्मक गद्य ऐतिहासिक हादसों का सामना करता है, मनुष्य जीवन-भंगुरता को उजागर करता है।’ समिति की घोषणा में हान कान्ग की किताब ‘द वेजीटेरियन’, ‘द व्हाइट बुक’, ‘हुमन एक्ट्स’, ‘ग्रीक लेसन्स’ आदि का उल्लेख किया गया है।
दस साल की उम्र से सियोल में रह रही हान कान्ग ने सियोल के योन्से विश्वविद्यालय से कोरियन साहित्य में शिक्षा ग्रहण की है। जब जेनी राइडेन ने उनसे नोबेल की रस्मी टेलीफोनिक वार्ता की, वे अपने बेटे के साथ रात का खाना खा कर उठी थीं। उन्होंने एक सामान्य दिन बिताया था, इस घोषणा से वे चकित और प्रसन्न थीं। वे दिसम्बर में होने वाले नोबेल पुरस्कार समारोह में उपस्थित रहेंगी।
अब उनके नोबेल भाषण का इंतजार है। वार्तालाप में उन्होंने बताया, बचपन में उन्होंने स्वीडिस लेखिका एस्ट्राइड लिंगरडेन का ‘लायनहार्ट ब्रदर्स’ पढ़ा था, इससे प्रभावित हुई थीं, मगर उन्हें पढ़े हुए तमाम अन्य लेखकों से प्रेरणा मिली है।
वे आशा करती हैं कि नए पाठक उन्हें पढ़ेंगे और उनके पाठक, मित्र और अन्य लेखकों को उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलने की खबर अच्छी लगेगी। वाकई बहुत अच्छी लगी, जिसका प्रमाण हैं, घोषणा के तत्काल बाद मिलने वाली बधाइयां और टिप्पणियां।
विरासत (उनके पिता हान संग वन कोरियाई साहित्य में एक सम्मानित नाम हैं, बड़े भाई भी लेखक हैं।) में साहित्य पाने वाली हान कान्ग अन्य लेखकों से बिल्कुल भिन्न तरह से सोचती, अनुभव करती और लिखती हैं। कविताओं से प्रारंभ करने वाली हान के लगभग सब उपन्यास, लघु उपन्यास, लेख, कहानियां व्यथा, पितृसत्ता, अत्याचार, मानवता आदि के कथानक के इर्द-गिर्द घूमते हैं।
2016 का इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार प्राप्त उनका उपन्यास ‘वेजीटेरियन’ (डेबोराह स्मिथ द्वारा इंग्लिश में अनुवादित) उनकी अंतरराष्ट्रीय साहित्य-जगत में ख्याति का बायस बना। कोरिया के अधिकांश लोग मांसाहारी हैं, भिन्न जीवन पद्धति उनका यह उपन्यास समाज की अनमनीय पितृसत्तात्मक संरचना, व्यवहार की अपेक्षाओं तथा संस्थानों की कार्य पद्धति को असफल होता दिखाता है। उपन्यास पर ‘वेजीटेरियन’ नाम ही से फिल्म भी बनी है। उनके कार्य ‘स्कार्स’ पर भी एक फिल्म बनी है।
हालांकि ‘विजीटेरियन’ के अनुवाद की आलोचना हुई थी, द गार्डियन तथा कई अन्य पत्रिकाओं ने इस अनुवाद को खारिज कर दिया था। मगर उस साल के इंटरनेशनल बुकर निर्णायकों के चेयरपर्सन बॉयड टोन्किन ने करीब आठ साल बाद लिखा है, ‘एक निम्न कोरियन लेखक को चुनने की हमारी पसंद का मीडिया ने मजाक उड़ाया, मगर पाठकों ने उसे भरपूर प्यार दिया।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘इस अनोखे विजन और आवाज को बहुत और लोग खोजेंगे।’
‘द वेजीटेरियन’ उनकी कहानी ‘द फ्रुट ऑफ माई वुमन’ का विस्तार है। इस कहानी और उपन्यास के सूत्र उन्हें कोरियाई रचनाकार यी सान्ग के शब्दों में- ‘मेरा मानना है कि मनुष्य को एक पौधा बन जाना चाहिए’ – से मिले थे। अब नोबेल मिलने के बाद टोन्किन की कही बात का महत्व बढ़ जाता है।
किताबों के साहचर्य में सहजता अनुभव करने वाली, जॉर्ज लुई बोर्खेज, प्रीमो लेवाई, अरुणधती राय, केल्विनो आदि को पढ़ने वाली का संस्मरणात्मक उपन्यास ‘द व्हाइट बुक’ उनके जीवनानुभवों से जुड़ा है, जहां वे बचपन, परिवार, समाज की बात करती हैं।
नवीनतम उपन्यास ‘वी शुड नॉट पार्ट’
‘ह्यूमन एक्ट्स’ मई 1980 में हुए ग्वान्चू नरसंहार के विषय में है, जिसमें सेना क्रूरतापूर्ण अत्याचार के शिकार लोगों की बात छ: लोगों के नजरिए को प्रस्तुत की गई है। इसे 2018 के इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की अंतिम सूचि में शामिल किया गया था। उनका नवीनतम उपन्यास ‘वी शुड नॉट पार्ट’ (शायद यह ‘आई डू नॉट बिड फेयरवेल” अथवा अइम्पॉसीबल गुडबॉयज’ नाम से आए) अगले साल इंग्लिश में प्रकाशित होगा। अपने नए पाठकों के लिए वे इससे ही प्रारंभ करने की अनुसंशा करती हैं।
इसमें शक नहीं कोरिया में अपने अन्य भाषाओं के अनुवाद से बेहतर लिखती होंगी। अपने लेखन की शब्द शक्ति की ताकात से 2014 का दक्षिण कोरिया का साहित्य पुरस्कार तथा 2016 का प्री फेमिना पाने वाली हान कान्ग के पिता ने बेटी को नोबेल पुरस्कार मिलने पर स्थानीय रेडियो पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी को इतना बड़ा सम्मान मिलेगा।
साथ ही जोड़ा, मुझे लगता है, भीतर मन में कहीं ना कहीं एक उम्मीद यह थी, एक दिन अचानक बेटी को इतना बड़ा और सम्मानित पुरस्कार मिल जाएगा, लेकिन मैंने अपनी इस उम्मीद पर कभी भरोसा नहीं किया था।’ बेटी के शिल्प पर पिता की टिप्पणी है, ‘वह त्रासदी को बहुत गहन, सुंदर पर दु:खद तरीके से अपने लेखन में दिखाती है।’
जब उन्हें इंटरनेशनल बुकर मिला था तब मैंने ‘द वेजीटेरियन पढ़ा था और उनकी कई अन्य किताबें अपनी लाइब्रेरी में जमा की थीं। अब ‘ग्रीक लेसन्स’ पढ़ना प्रारंभ किया है। अन्य उपन्यास भी पढ़ने हैं। मात्र 160 पन्नों का ‘ग्रीक लेसन्स’ दो पात्रों – एक पुरुष और एक स्त्री को लेकर चलता है। पात्रों के नाम नहीं हैं। दोनों के संबंध पर आधारित उपन्यास क्या कह रहा है यह तो पूरे पढ़ कर ही जाना जाएगा।
हान कान्ग को नोबेल पुरस्कार की हार्दिक बधाई!
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