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विश्व साहित्य का आकाश: द जूकीपर्स वाइफ- नाजीकाल का मानवीय चेहरा

Mon, 02 Sep 2024 03:16 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Mon, 02 Sep 2024 03:16 PM IST
सार

2009 में ‘सेफ हेवन: द वार्सा जू’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनी है। 2017 में न्यूजीलैंड की फिल्म निर्देशक निकी कारो ने इस वास्तविक जीवन पर आधारित ‘द जू कीपर'स वाइफ’ नाम से ही फिल्म बनाई है।

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world history of literature The Zookeeper's Wife Book by Diane Ackerman
साहित्य का इतिहास - फोटो : istock

विस्तार

न्यूयॉर्क निवासिनी डाइने ऐकरमैन की किताब ‘द जू़कीपर्स वाइफ’ का मूल पोलिश शीर्षक ‘एजिल’ अर्थात असाइलम या सैंचुरी है। इन्होंने करीब दो दर्जन किताबें लिखी हैं, जिसमें काव्य संग्रह और कथेतर गद्य शामिल हैं। कई अन्य पुरस्कारों के साथ वे अपनी किताब ‘वन हंड्रेड नेम्स फॉर लव’ के लिए पुलित्जर प्राइज की अंतिम सूची में थीं।

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‘द जूकीपर्स वाइफ’

‘द जू़कीपर्स वाइफ’ की बात ऐतिहासिक जीवनी है। 1939 में पोलैंड के वार्सा में अंटोनिया जाबिन्स्की और जू का डॉयरेक्टर, उसका पति डॉक्टर जैन जाबिन्स्की एक खुशहाल चिड़ियाघर चला रह रहे हैं। अंटोनिया उसकी सहायता करती है। जब हिटलर की नाजी सेना उनके देश को अधिकृत कर लेती है, तो चिड़ियाघर बंद कर दिया जाता है और चिड़ियाघर के विशिष्ट जीव-जन्तु प्रयोग करने के लिए नाजी उठा कर ले जाते हैं। बाकी बचे जानवरों को हलाल कर दिया जाता है, जू सूअर बाड़े में बदल जाता है। 

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दम्पति प्रतिकार दस्ते में काम करते हुए, बम वर्षा के बाद अपनी जान की बाजी लगा कर सैकड़ों यहूदियों को वार्सा घेटो से निकाल कर सुरक्षित अपने यहां रखते हैं, यातना शिविर से बचाते हैं। ये लोग इस अत्यंत कठिन समय में करीब 300 यहूदियों की जान बचा पाए।
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नाजी ऑफीसर डॉ. लुज हेक की आंख चिड़ियाघर के अलावा एंटोनिया पर भी है। उसकी सत्ता-शक्ति को जानते हुए वह अपने परिवार की सुरक्षा के लिए उसे बर्दाश्त करती है। पति इस हरकत को देख लेता है। उसे ये हरकतें नागवार गुजरती हैं। पति की प्रतिक्रिया वांच्छित है।

डॉ. लुज हेक पशु प्रजनन के शोध के लिए वार्सा में स्थाई ऑफिस बनाता है। डॉ. लुज हेक क्रूर है, खुद चिड़ियाघर के पक्षी का शिकार करता है, उनमें भूस भरवाने का आदेश देता है।

नाजी क्रूरता की दास्तां

पूरा वार्सा नाजी क्रूरता का शिकार बनता है। लूट-पाट, हत्या, लोगों को उठाकर ले जाना आम घटनाएं बन जाती हैं। यहूदियों के लिए पीला डेविड का स्टार बांह पर लगाना अनिवार्य है। यहूदी घरों के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं। जाबिन्स्की के दो मित्र दूसरों के लिए इन पति-पत्नी से बचाव की गुहार लगाते हैं। जान बचाने के लिए वे माग्दा को अपनी परछत्ती में छुपाते हैं, लेकिन यहीं उनकी दया-ममता रुकती नहीं है।

जाबिन्स्की दम्पति लुज हेक के समक्ष एक प्रस्ताव रखते हैं, वे सूअर पालन करेंगे जो अधिकृत करने वाली सेना के भोजन के काम आएंगे। प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है, वार्सा का नामी-गिरामी चिड़ियाघर सूअर बाड़े में बदल जाता है। जाबिन्स्की दम्पति ने यह सोच-समझ कर एक रणनीति के तहत किया था। सूअरों का खाना इकट्ठा करने के बहाने घेटो में जाकर संग में छिपा कर यहूदियों को ले आते हैं। 

ये यहूदियों को भेष बदलवा कर सीमा पार करा देते हैं, कुछ को नागरिकता दिलवा देते हैं। अब उनका घर और चिड़ियाखाना दो तरह के जीव पाल रहा है। पशु के रूप में सूअर, जो खुल कर घूम-फिर सकते हैं, दूसरे, मनुष्य जो न तो जोर से बोल सकते हैं, न खांस-छींक सकते हैं। यदि कोई आवाज हुई तो सबकी जान खतरे में पड़ जाएगी। अंटोनिया इसे ‘ह्यूमन जू’ की संज्ञा देती है। दड़बों में छिपे हुए लोगों में नाजी बलात्कार की शिकार एक बच्ची उर्सुला भी है। 

world history of literature The Zookeeper's Wife Book by Diane Ackerman
book - फोटो : istock

यह मानव विडम्बना है, एक ओर ये लोग अपनी जान की कीमत पर लोगों की जान बचाने में लगे हुए हैं, दूसरी ओर नाजी लोगों को गाड़ियों में भर-भर कर मृत्यु शिविर पहुंचा रहे हैं। अंत में नाजी घेटो में आग लगा कर बचे-खुचे यहूदियों को समाप्त कर डालते हैं।

टोनिया बाल ब्लीच करके, कुछ लोगों को आर्य बना कर, बचा कर बाहर भेज रही थी। एक बार ऐसी दो स्त्रियां पकड़ी जाती हैं। उनके जाली पासपोर्ट का भेद खुल जाता है। दोनों को वहीं सड़क पर फांसी दे दी जाती है। अत: इस तरकीब को तिलांजलि देनी पड़ती है। जैन जाबिन्स्की वार्सा प्रतिरोध में संलग्न था, वहां उसकी गर्दन में गोली लगती है और वह गिरफ्तार कर लिया जाता है। इसके पहले पैदा हुई अपनी बच्ची को ये लोग टेरेसा नाम देते हैं। 

पति का पता लगाने के लिए एंटोनिया हेक के पास जाती है, वह उसका बलात्कार करना चाहता है। किसी तरह वह उसके चंगुल से बच निकलती है। रूसी फौजें आने लगी हैं, नाजी वार्सा खाली कर रहे हैं। डॉ. हेक दीवाल पर ड्राइंग्स देखता है, उसे यहूदियों के वहां छिपे होने का पता चल जाता है। एंटोनिया समय रहते यहूदियों को वहां से निकाल चुकी है।

हेक को जब कुछ नहीं मिलता है तो वह एंटोनिया के बेटे पर आक्रमण करता है, उसे बंदूक की नोंक पर रखता है। एंटोनिया के याचना करने पर वह बेटे को छोड़ देता है, वहां से चला जाता है। एंटोनिया हेक के परीक्षण के लिए कैद साढ़ को मुक्त कर देती है, वह जंगल में भाग जाता है।

वार्सा का पुनर्निर्माण

अब नाजियों ने समर्पण कर दिया है, वार्सा का पुनर्निर्माण प्रारंभ होता है। एंटोनिया बचे-खुचे लोगों के साथ फिर से चिड़ियाघर बनाने में जुट जाती है। आज भी वार्सा का यह जू पर्यटकों का मनोरंजन करता है। 

युद्ध के बाद वार्सा की केवल 6% आबादी जीवित बची थी। युद्ध की समाप्ति के पूर्व हेक बर्लिन लौटता है, तब तक मित्र सेना ने बम वर्षा द्वारा उसका चिड़ियाघर नष्ट कर दिया था। सोचने की बात है, आदमियों के युद्ध में निरपराध पशुओं का वध हुआ, उन्होंने किसी का क्या बिगाड़ा था?

वे न तो यहूदी थे, न ही नाजी। मगर नाजियों ने भी उन्हें नष्ट किया और मित्र सेना ने भी उनकी हत्या की। हेक के बेहूदा प्रयोग बुरी तरह असफल रहे थे। हां, प्रयोगों के नाम पर उसने पशुओं के साथ मनमाना क्रूर व्यवहार अवश्य किया। 

जैन जाबिन्स्की की वापसी पर परिवार-पुनर्मिलन का दृश्य बड़ा मार्मिक और खूबसूरत है। जान जोखिम डाल कर दूसरों की जिंदगी बचाने वाले जैन से किसी ने पूछा, ‘उसने ऐसा क्यों किया? उसका उत्तर था, ‘मैंने केवल अपनी ड्यूटी की – अगर आप किसी की जिंदगी बचा सकते हैं, तो इसकी कोशिश करना आपका कर्तव्य है।’

‘सेफ हेवन: द वार्सा जू’

2009 में ‘सेफ हेवन: द वार्सा जू’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनी है। 2017 में न्यूजीलैंड की फिल्म निर्देशक निकी कारो ने इस वास्तविक जीवन पर आधारित ‘द जू कीपर्स वाइफ’ नाम से ही फिल्म बनाई है। सशक्त स्त्री एंटोनिया के किरदार को परदे पर खूबसूरत और कोमल अभिनेत्री जेसिका चैस्टैन ने कुशलता के साथ अभिनीत किया है। 

किताब और फिल्म दोनों इतिहास के सर्वाधिक जघन्य, अमानवीय काल में स्त्री के उल्लेखनीय सकारात्मक योगदान को प्रदर्शित करती है। 


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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