World Environment Day: पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक जागरूकता की आवश्यकता, मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण
पारिस्थितिक संतुलन एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना सबसे कारगर कदम है।
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विज्ञापनक्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार।
मिट्टी, पानी और बयार, जिंदा रहने के आधार।
चिपको आंदोलन का यह नारा आज भी प्रासंगिक है और पर्यावरण के महत्व को दर्शाता है। प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की थीम “Only One Earth” (केवल एक पृथ्वी ) है, इस नारे के माध्यम से पूरी पृथ्वी को एक मान कर इसके संरक्षण के लिए प्रयास करने का संदेश है।
विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत वर्ष 1972 में मानव पर्यावरण पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान हुई थी। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में विश्व का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित हुआ था। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित कुल 119 देश ने इसमें शिरकत किया था।विज्ञापनपर्यावरण को क्षति वाले प्रमुख घटकों में घरेलू अपमार्जकों का प्रयोग (रोजमर्रा के उपयोग के वस्तु), कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ती मात्रा, वायुमंडल में विसर्जित होने वाले गैसीय एवं विषैली पदार्थ, नदियों में विसर्जित गंद, रेडियोधर्मी पदार्थ, पेड़-पौधे का अंधाधुंध कटाई एवं पॉलिथीन का बढ़ता प्रयोग आदि शामिल हैं।
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ये जन-जन के आचार विचार, आहार व्यवहार में तभी आ पायेगा जब मास मीडिया एवं स्कूल कॉलेज इस मुहिम के दो अग्रणी स्तंभ बनेंगे।
पर्यावरण संकट गहराने की आशंका
जैसे-जैसे विश्व विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा पर्यावरण संकट गहराता जाएगा। आज पर्यावरण संरक्षण ज्वलंत मुद्दा है और आज की मीडिया इसे स्थान दे रही है। पर्यावरण संरक्षण संबंधी मुद्दे साझा सरोकार, जन सहभागिता के मुद्दे हैं जिसके लिए मीडिया तंत्र ही सर्वाधिक प्रभावी हो सकता है।
विकास, क्यों, किसका और किसके लिए का सवाल पैदा होता रहता है। अपनी जरूरत की अंधी दौड़ में विकास की अनिवार्यता मानवीयता हीन हो गई है। अपनी भावी पीढ़ी के लिए बचाने और सोचने का समय ही नहीं है। संभवतः पर्यावरण संरक्षण की महत्ता और निरंतर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन मुद्दा ही नहीं है। इस सोच को बदलने में मीडिया प्रमुख भूमिका निभा सकती है।मई 2022 में द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ से प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 2019 में 90 लाख मौतों अर्थात दुनिया भर में हर छह मौतों में से एक के लिए प्रदूषण जिम्मेदार था, पूरे विश्व में सबसे अधिक संख्या भारत से है लगभग 24 लाख।
प्रदूषण, खास कर वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, एवं गरीब (निम्न और मध्यम आय वाले) देश पर इसका सबसे अधिक प्रभाव है।
इस संकट की भयावहता इस बात से पता चलती है कि पिछले वर्ष प्रदूषण से मरने वालों की संख्या सबसे अधिक थी। ताज्जुब इस बात का है कि इस खबर को किसी ने न ध्यान से पढ़ा होगा और न किसी ने प्रमुख अखबार की सुखियों में और न चैनलों की ब्रेकिंग न्यूज में इसे स्थान मिला।
कुल मिला के मानें तो व्यापक स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंडे में प्रदूषण की रोकथाम को बड़े पैमाने पर अनदेखा किया जाता है। इतनी बड़ी खबर से न्यूज पर पैनी नजर रखने वालों ने भी शायद ही ध्यान दिया हो।
व्यापक जागरूकता की आवश्यकता
पारिस्थितिक संतुलन एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना सबसे कारगर कदम है। समाज को विशेष दिशा देना, उसे सशक्त करना, उसमें प्रभाव पैदा करने का काम मीडिया एवं पत्रकारिता का है। वह हमेशा से समाज का पथ प्रदर्शक और जन जन के हितों का सजग प्रहरी रहा है। ग्रामीण इलाके में अभी भी स्थनीय मीडियाकर्मी पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास के कई आयाम से वाकिफ नहीं है।
देश एवं विदेश में मीडिया संगठनों ने समय-समय पर विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को उठा कर जनमानस में जनमत का निर्माण किया।
"पर्यावरण जागरूकता और पहल में परिसर और स्थानीय पत्रकारिता की भूमिका" नामक लेख में लेखक: मर्सिडीज अल्बर्टो का यह मानना है कि पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण के निरंतर क्षरण के मुद्दे को विश्व की गंभीर समस्या के रूप में पहचाना जा रहा है।
पर्यावरण जागरूकता काफी विकृत है लेकिन उचित और व्यापक सूचना प्रसार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।
पर्यावरण जागरूकता में मीडिया का योगदान
पर्यावरण लेख सामान्य पर्यावरणीय मुद्दों जैसे प्रदूषण, बाढ़ और तूफान, वृक्षारोपण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर विषयों पर खबर प्रकाशित करते हैं। इन लेखों के अपने पाठक वर्ग हैं। पर्यावरण जागरूकता और पहल को बढ़ावा देने में समाचार पत्रों पर पर्यावरण पेज निकलना चाहिए, इससे लोगों में जागरूकता जागृत होगी। पहल हो तो पाठक भी बढ़ेंगे।
विश्व प्रसिद्ध न्यूज गार्जियन ने एक साल पहले 2019 से अपनी खबरों में जलवायु संकट को और भी अधिक प्राथमिकता देने का वादा किया था, परिणामस्वरूप एक वर्ष बाद औसतन हर तीन घंटे में पर्यावरण पत्रकारिता का एक अंश प्रकाशित किया जाता है। अक्टूबर 2020 में मीडिया संगठन ने बताया कि एक वर्ष में 3000 से अधिक आर्टिकल के माध्यम से 10 करोड़ पाठक मिले।
इन चुनौतियों पर विजय पर्यावरण के मुद्दों को व्यापक जन चिंता का विषय बना कर ही की जा सकती है। पर्यावरण के अनुकूल सामाजिक, राजनीतिक वातावरण का निर्माण कर ही हम पृथ्वी को बचाने में सक्षम होंगे अर्थात पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जागरूकता के लिए विश्वव्यापी मुहिम चलाने की आवश्यकता है जिस में हर व्यक्ति को प्रकृति का दोस्त बनना होगा दुश्मन नहीं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।