विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: स्पेनिश सिने-इतिहास
सरकार के नियंत्रण में नैतिक और राजनैतिक निर्देशों के अंतर्गत स्पेन में फ़िल्में बनाना कठिन था, लेकिन कलाकार रास्ता निकाल लेते हैं। जनरल फ़्रैंकों के आत्मकाथात्मक उपन्यास पर होसे लुई साइन डे हर्डिया ने 1942 में ‘राज़ा’ बनाई जिसे इस काल की स्पेन में बनी असाधारण फ़िल्म का दर्जा हासिल है।
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हर देश में बहुत सारी कमियां-बुराइयां और समस्याएं होती हैं। कला-साहित्य का काम है इनके प्रति लोगों को जागरूक करना। सिनेमा भी इनको उजागर कर जनता को सचेत करती रहती है, मगर ऐसे काम सत्ता-शक्ति को पसंद नहीं आते हैं। वे भरसक इन्हें प्रतिबंधित करने का प्रयास करते हैं।
सचेत करने का ऐसा ही एक काम स्पेन के एक फ़िल्म निर्देशक ने किया और इसका परिणाम उसे भोगना पड़ा। स्पेन में 22 फ़रवरी 1900 को जन्मे लेखक-अभिनेता-निर्देशक सररियलिज्म के जनक लुई बुनुएल ने 1933 में एक फ़िल्म बनाई। उसने अपने देश के किसानों की भयंकर गरीबी का चित्रण अपनी डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘लैंड विथआउट ब्रेड’ में किया। फ़िल्म ने हंगामा मचा दिया। वहां की सरकार ने ‘स्पेन के लोगों के अच्छे नाम को बदनाम’ करने के आधार पर तत्काल इस फ़िल्म को प्रतिबंधित कर दिया।
हालांकि 1936 में नई सरकार आने पर प्रतिबंध उठ गया। इसके पहले पेरिस में बुनुएल-सल्वाडोर डाली की दोस्ती का फ़लित थी- 1929 का ‘एन अंडालुसियन डॉग’, 17 मिनट की इस मूक फ़िल्म जैसा दिखाया गया है, तब तक फ़िल्म जगत ने कुछ नहीं देखा था, खासकर फ़िल्म के शुरुआती सीन में उस्तरे से आँख तराशना। आज भी यह दृश्य देखते हुए दर्शक हिल जाते हैं।
स्पेन में फिल्मों का शुरुआती दौर
स्पेन में शुरू से फ़िल्मों पर ग्रहण लगता आया। यहां फ़िल्म उद्योग बहुत छोटा था और 20वीं सदी के प्रारंभ में वहां सैनिक तानाशाही थी, अत: 1923-30 के बीच इस क्षेत्र में खास उल्लेखनीय सिनेमा नहीं बना। 1931 में चुनाव हुए और फ़िल्म सवाक हुई तो वहां फ़िल्म उद्योग स्थापित करने का काम हुआ। कई बड़े प्रोडक्शन हाउस, वितरक आगे आए, लेकिन बुनुएल जैसे कई निर्देशक देश छोड़ कर हॉलीवुड जा चुके थे।
1939 से फ़्रैंको का दमित शासन व्यवस्था में फ़िल्म बनाना और खुद को इस कला में व्यक्त करना असंभव था, परंतु 36 साल के बाद स्पैनिश सिनेमा ने विश्व को अपना सर्वोत्तम दिया। सरकार के नियंत्रण में नैतिक और राजनैतिक निर्देशों के अंतर्गत स्पेन में फ़िल्म बनाना कठिन था, लेकिन कलाकार रास्ता निकाल लेते हैं। जनरल फ़्रैंकों के आत्मकाथात्मक उपन्यास पर होसे लुई साइन डे हर्डिया ने 1942 में ‘राज़ा’ बनाई जिसे इस काल की स्पेन में बनी असाधारण फ़िल्म का दर्जा हासिल है।
प्रतिबंध के बावजूद अगले दशक में जुआन एंटोनिओ बैर्डेम एंव लुई गार्षा बेर्लैंगा ने मिल कर 1953 में आर्थिक संकट से घिरे कथानक पर ‘दिस हैप्पी पेयर’ निर्देशित की। लुई गार्षा बेर्लैंगा ने अमेरिका की अनुदान नीति का निंदनीय रूप ‘मिस्टर मार्शल’ में प्रस्तुत किया। उसने हास्य में लपेट कर कटु आलोचना करते हुए ‘नॉट ऑन योर लाइफ़’ बनाई जिसे काफ़ी काट-छांट के बाद परदे पर आने का अवसर मिला। बैर्डेम की ‘देथ ऑफ़ ए साइकिलिस्ट’ तत्कालीन स्पेन पर बड़ी कटु टिप्पणी है। इस फ़िल्म को कॉन समारोह में ग्रॉन पी मिला।
इसके बाद बैर्डेम ने एक फ़िल्म प्रड्यूस की जिसे निर्देशित करने के लिए 29 साल के बाद बुनुएल अपने देश स्पेन लौटा। 1961 की ‘विरिडिआना’ एक युवा नर्स की कहानी है जो अपने फ़ाइनल वाऊ के पहले मदर सुपीरियर के अनुरोध पर अपने विधुर अंकल से मिलने जाती है।
‘हेल्मा’ उपन्यास पर आधारित फ़िल्म कैथोलिक चर्च की मानसिकता तथा उसके रीति-रिवाजों पर आक्रमण है। नतीजा वही हुआ जिसकी कल्पना की जा सकती है, फ़िल्म स्पेन में प्रतिबंधित हो गई। बुनुएल पुन: बाहर चला गया और बहुत बाद में करीब एक दशक बाद एक बार फ़िल्म ‘ट्रिस्टाना’ (1970) बनाने स्पेन लौटा।
कार्लोस सौरा के निर्देशन की फिल्में
कार्लोस सौरा ने स्पैनिश गृह युद्ध और उसके बाद के समय पर ‘द हंट’ बनाई जिसमें फ़्रैंको के शासन की खुल कर आलोचना की गई, साथ ही बूर्जुआ, चर्च, सेना तथा यौन निषेधों की आलोचना भी इसमें है। उसने इसमें पहली बार अपनी होने वाली पत्नी जेराल्डाइन चैपलिन को अभिनय का अवसर दिया है। आगे चल कर कार्लोस सौरा ने बाल अभिनेत्री आना टोरेंट को लेकर आठ पुरस्कार प्राप्त हुए। बाद में अनूठी आना टोरेंट ने ‘द स्पिरिट ऑफ़ द बीहाइव’ में काम किया।
1973 की ‘द स्पिरिट ऑफ़ द बीहाइव’ का निर्देशन विक्टर एरिस ने किया था। विक्टर एरिस ने अपने तीन दशक के फ़िल्मी जीवन में मात्र तीन फ़िल्में बनाई। ‘द स्पिरिट ऑफ़ द बीहाइव’ के अलावा ‘एल सुर’ एवं ‘क्विन्स ट्री ऑफ़ द सन’ उसकी दो अन्य फ़िल्में हैं। उसकी ये फ़िल्में सिने-कला का बेहतरीन उदाहरण हैं। ऐसा नहीं था कि केवल स्पेन के निर्देशक ही स्पेन में फ़िल्म बना रहे थे। इटली के निर्देशक मार्को फ़ेरेरी ने स्पेन में एक ब्लैक कॉमेडी फ़िल्म ‘द व्हीलचेयर’ बनाई।
अभी फ़्रैंको की मृत्यु में दो महीने बाकी थे तभी होसे लुई बोरा ने 1975 में 12 पुरस्कार पाने वाली फ़िल्म ‘फ़ुर्टिवोज’ बनाई। ‘पोचर्स’ नाम से भी उपलब्ध इस फ़िल्म में फ़्रैंको काल के स्पेन की कठोर वास्तविता को दिखाने के लिए फ़िल्म में एक स्थानीय गवर्नर को अपने पिछलग्गुओं के साथ जंगल में शिकार करते दिखाया गया है, जहां उसकी पूर्व प्रेमिका एक सराय चलाती है। जबकि फ़्रैंको के प्रचार के अनुसार स्पेन ‘शांत जंगल’ था। यह पहली फ़िल्म थी जो बिना सेंसर के लाइसेंस के स्पेन में प्रदर्शित हुई।
पेड्रो अल्माडोवा के अवतरण के साथ स्पेन में सिने-सृजन में अचानक बहुत अधिक गति आ गई। उसकी ‘ऑल अबाउट माई मदर’ (1999) कॉमेडी ने सर्वोत्तम विदेशी फ़िल्म का ऑस्कार जीता। कुछ साल पहले उसने 2002 में ‘टॉक टू हर’ बनाई है और सर्वोत्तम स्क्रीनप्ले का ऑस्कर अपने नाम कर लिया है तथा सर्वोत्तम स्क्रीनप्ले एवं सर्वोत्तम फ़िल्म का बाफ़्टा भी उसकी झोली में आया है।
गरीबी और स्पेन में सिने-शिक्षा बंद होने के कारण पेड्रो अल्माडोवा प्रशिक्षण प्राप्त न कर नौकरी करने लगा तथा किसी तरह एक कैमरा खरीद कर फ़िल्म बनाने लगा। जुनून आदमी से क्या नहीं करवाता है और जुनून अक्सर रंग भी लाता है। पैड्रो ने अब तक 172 पुरस्कार जीते हैं। इसी दशक में फ़ेर्नांडो ट्रूएबा (बेले एपोक), एलेक्जांड्रो एमेनाबार (द सी इनसाइड) ने भी ऑस्कर जीता।
इसी काल में बिगास लुना तथा जुलिओ मेडेम जैसे प्रसिद्ध निर्देशक भी स्पेन में हुए। ‘बैड एजूकेशन’ (2004) तथा ‘वोल्वर’ (2006) स्पेन में बनी इस सदी की कुछ बेहतरीन फ़िल्में हैं। हॉलीवुड में चमकने वाला अभिनेता एंटोनिओ बैंडेरस तथा ऑस्कर पुरस्कृत अभिनेत्री पेनीलोपी क्रूज़, पेनीलोपी क्रूज़ का पति अभिनेता जेवियर बार्डेम सब स्पेन से ताल्लुक रखते हैं। अमेरिका के प्रसिद्ध निर्देशक कार्लोस औरा, मारियो कामू भी स्पेन से ही आते हैं।
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