विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: स्कैन्डेवियन सिने-इतिहास
स्कैन्डेवियन देशों ने बीसवीं सदी के दूसरे दशक में सिनेमा के उद्भव में काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। हालांकि इस काल में यूरोप के अन्य देशों की तुलना में इनका आर्थिक स्थान बहुत ऊंचा नहीं था। फिर भी सिनेमा कला तथा सिने-उद्योग में इनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
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स्कैन्डेवियन देशों का भूगोल जानना आवश्यक है। जिसे हम स्कैन्डिनेविया कहते हैं, यह उत्तरी यूरोप का एक इलाका है। ऐतिहासिक दृष्टि से इसका नाम स्कैन्डिया था। नॉर्वे तथा स्वीडन देश स्कैन्डिनेविया प्रायद्वीप के इलाके हैं, जिसमें डेनमार्क भी जुड़ा हुआ है। कुछ लोग फ़िनलैंड, आइसलैंड तथा फ़ैरोए टापुओं को भी इसमें शामिल करते हैं, क्योंकि ये हिस्से भाषा की दृष्टि से नॉर्वे तथा स्वीडन से जुड़े हुए हैं। यहां के लोग समान भाषा का उपयोग करते हैं।
डेनमार्क, फ़िनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे तथा स्वीडन देशों को एक समूह में रखा जाता है और इन्हें नॉर्डन संज्ञा से पुकारा जाता है। इन देशों में एक-दूसरे से काफ़ी समानताएं हैं तथा ये देश यूरोप के अन्य देशों से काफ़ी भिन्न हैं। ये कई मामलों में यूरोप से भिन्न हैं, जैसे इनकी जनसंख्या बहुत विरल है, इनकी मुख्य संपदा मछली है और इनके लोगों की आयु बहुत लंबी होती है, साथ ही यहां की साक्षरता दर बहुत ऊंची है।
विरल जनसंख्या के बावजूद इन देशों ने बीसवीं सदी के दूसरे दशक में सिनेमा के उद्भव में काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। हालांकि इस काल में यूरोप के अन्य देशों की तुलना में इनका आर्थिक स्थान बहुत ऊंचा नहीं था। फ़िर भी सिनेमा कला तथा सिने-उद्योग में इनका योगदान उल्लेखनीय है।
इनके योगदान को दो हिस्सों में देखा जाता है। पहला चरण 1910 से 1913 का है, इस चरण में चार साल में डेनमार्क की प्रोड्कशन कंपनी ‘नोर्डिक फ़िल्म’ ने अंतरराष्ट्रीय सफ़लता पाई और दूसरे चरण में 1917-1923 के बीच स्वीडन को इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सफ़लता हासिल हुई।
डेनिश एवं स्वीडिश सिनेमा का जुड़ाव
मजे की बात, सफ़लता का एक राज यह भी है कि स्कैन्डिनेवियन मूक सिनेमा ने स्थानीयता पर जोर नहीं दिया, उसके केंद्र में वृहतर यूरोपियन संदर्भ थे। इसी कारण करीब दस साल डेनिश एवं स्वीडिश सिनेमा रूसी तथा जर्मन सिनेमा से भी जुड़ा रहा। उनका साथ-साथ विकास हुआ। वे वितरण और आदान-प्रदान में भी एक रहे। यहां तक कि इनके निर्देशक एवं तकनीकि विशेषज्ञ भी एक-दूसरे के यहां आते-जाते रहे। सहयोग के इस नेटवर्क में उत्तरी यूरोप के दूसरे देशों की भूमिका नाममात्र की थी।
आइसलैंड जो डेनमार्क का हिस्सा है, वह 1918 तक एक फ़िल्म थियेटर के भरोसे रहा। इस हॉल को 1906 में एल्फ़्रेड लिंड ने खोला था। लिंड आगे चल कर सिने-निर्देशक भी बना। फ़िनलैंड का अपना स्वतंत्र भाषाई सिनेमा था जो 1917 तक ज़ार के रूस से जुड़ा रहा। नॉर्वे की पहली फ़ीचर फ़िल्म ‘द पेरिल्स ऑफ़ फ़िशिंग: ए ड्रामा ऑफ़ द सी’ थी और 1918 तक नॉर्वे ने सत्रह फ़िल्में बनाईं।
अगर स्कैन्डेवियन सिने-इतिहास में तनिक और पीछे जाएं तो यहां पहली बार चलती-फ़िरती तस्वीरें 1896 में 6 अप्रैल को प्रदर्शित हुई थीं। यह शुभ कार्य उस समय के क्रिस्टिआनिआ (जिसे आज ओस्लो के नाम से जाना जाता है) के वैरायटी क्लब में हुआ था। यह प्रदर्शन मैक्स तथा एमिल स्क्लाडनोव्स्की– दो जर्मन भाइयों द्वारा किया गया था। इरादा था एक शो का मगर सफ़लता का आलम यह रहा कि वे अपने बायस्कोप उपकरण के साथ 5 मई तक यह काम करते रहे।
आग में जल गए सारे उपकरण
डेनमार्क के एक उद्योगपति, समाजसेवी चित्रकार विल्हम हैट (1843-1912) ने 7 जून 1896 को यह काम किया, उसने कोपेनहेगन में लुमियर सिनेमाटोग्राफ़ एक लकड़ी के पवेलियन पर लगाया और को चलते-फ़िरते चित्रों की प्रदर्शनी की। दुर्भाग्य से एक व्यक्ति की ईर्ष्या का शिकार होकर सारे उपकरण आग की भेंट चढ़ गए। असल में एक इलेक्ट्रिशियन को नौकरी से निकाल दिया गया था और उसने इस तरह अपना बदला लिया था। लेकिन विल्हम भी एक ही जिद्दी व्यक्ति था उसने खूब विज्ञापन और शोर-शराबे के साथ शो को फ़िर चालू किया। उसका शो देखने राजसी परिवार भी आया था।
फ़िनलैंड में 16 मई को पहली बार ये तस्वीरें पहुंचीं। हेल्सिंकी के टाउन हाल में ये मात्र आठ दिन टिकीं। कारण था, शहर की आबादी का कम होना और टिकट का मूल्य अधिक होना। ये आठ दिन 28 जून से शुरू हुए और जल्द समाप्त हो गए। मगर इतने ही दिनों में फ़ोटोग्राफ़र कार्ल एमिल स्टाबर्ग को इसकी धुन सवार हो गई और उसने जनवरी 1897 से लुमियर फ़िल्म्स का वितरण प्रारंभ कर दिया।
हेल्सिंकी के बाहर ऑस्कर अलोनेन ने यही काम शुरू किया और ‘लीविंग पिक्चर्स’ लोगों तक पहुंचने लगीं। 1904 में कार्ल एमिल स्टाबर्ग ने फ़िनलैंड में स्थाई सिनेमा ‘अराउंड द वर्ल्ड’ स्थापित किया।
28 जून 1896 को मालमो में उद्योग मेला-प्रदर्शनी लगी और स्वीडन में पहला प्रोजेक्शन लगा। इस बार लुमियर सामग्री का प्रबंध किया डैनिश शोमैन हैराल्ड लिम्किल्ड ने। जल्द ही सिनेमेटोग्राफ़ उत्तर में फ़ैल गया। इसका श्रेय जाता है पेरिस डेली पत्रिका ‘के सोइर’ के एक पत्रकार चार्ल्स मार्शल को। उसने 21 जुलाई को एडीसन काइनेटोस्कोप की सहायता से स्टॉकहोम के विक्टोरिया थियेटर में यह काम पहली बार किया। बहुत सफ़लता न मिलने के कारण जल्द ही एडीसन के उपकरण को स्कालडानोवस्की भाइयों ने स्थानांतरित कर दिया, उन्होंने स्वीडन में कुछ चलते-फ़िरते चित्र खींचे और उन्हें प्रदर्शित किया।
हेल्सिंकी का सिनेमा से जुड़ाव
1911 में हेल्सिंकी में 17 सिनेमा हॉल थे और पूरे देश में 81 थियेटर थे। दस साल बाद 1921 में यह संख्या हेल्सिंकी में 20 पहुंच गई और पूरे देश में यह संख्या बढ़ कर 118 हो गई। 1907 में पहली फ़िनिश फ़िक्शन फ़िल्म ‘बूटलेगर्स’ नाम से बनी। 1913 में पुरो निर्देशित फ़िनिश फ़िक्शन फ़िल्म ‘सिल्वी’ का टुकड़ा आज भी बचा हुआ है जिसे उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
एरिक एस्टलैंडर ने ‘फ़िन्लैंडिया फ़िल्मी’ की स्थापना की और 1912-1916 के बीच 49 फ़िल्में बनाई जिनमें देश के सुदूर उत्तर में फ़िल्माई गई कुछ शॉर्ट फ़िल्में भी शामिल थीं। यलमार वी. पोजायहेमो ने 1910 से कई सिनेमा हाल लिए और जल्द ही वह प्रोडक्शन भी करने लगा।
प्रायद्वीप की जनसंख्या कम होने के बावजूद दुनिया का सिने-इतिहास बिना स्कैन्डेवियन देशों के सिने-इतिहास के पूरा नहीं हो सकता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।