फातिमा तुम खिलखिलाती रहना बस, दुनिया यूं ही खुशनुमा हो जाएगी
हाल ही में आईसीसी वीमेंस वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले से ज्यादा चर्चा में रही पाकिस्तानी टीम की कप्तान बिस्माह मारूफ और उनकी बिटिया फातिमा। मैच में भले ही पाकिस्तानी टीम के हिस्से हार आई हो लेकिन मुहब्बत, भावनाओं और अपनेपन की तो जीत हो गई जब पूरी इंडियन टीम मैच जीतने के बाद फातिमा को खिलाने उसके पास इक्कठी हो गईं। उस एक पल पर करोड़ों पल कुर्बान।
हाल ही में आईसीसी वीमेंस वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले से ज्यादा चर्चा में रही पाकिस्तानी टीम की कप्तान बिस्माह मारूफ और उनकी बिटिया फातिमा। मैच में भले ही पाकिस्तानी टीम के हिस्से हार आई हो लेकिन मुहब्बत, भावनाओं और अपनेपन की तो जीत हो गई जब पूरी इंडियन टीम मैच जीतने के बाद फातिमा को खिलाने उसके पास इक्कठी हो गईं। उस एक पल पर करोड़ों पल कुर्बान।
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जरा पूछो तो क्या सबसे सुंदर है? बोलो क्या रोज सुबह दुनिया को रौशन करता सूरज, या कि फिर सांझ ढले दिलों में अपना उजास भर देने वाला गोल रोटी सा चमकता चांद या फिर पौधों पर सजते फूल और सुरों में गाते पंछी या कि कांच सी झिलमिलाती नदियां, मन को थपकी सी देती ताजा हवा या कि धूप का हीरे से चमकता टुकड़ा। शायद जवाब अलग-अलग हों लेकिन जब नन्हें से बिना दांत वाले एक बच्चे का चेहरा खिलखिलाए तो क्या आपको नहीं लगता कि उक्त तमाम चीजों की खूबसूरती सिमट कर एक जगह आ गई!
हाल ही में आईसीसी वीमेंस वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले से ज्यादा चर्चा में रही पाकिस्तानी टीम की कप्तान बिस्माह मारूफ और उनकी बिटिया फातिमा। मैच में भले ही पाकिस्तानी टीम के हिस्से हार आई हो लेकिन मुहब्बत, भावनाओं और अपनेपन की तो जीत हो गई जब पूरी इंडियन टीम मैच जीतने के बाद फातिमा को खिलाने उसके पास इक्कठी हो गईं। उस एक पल पर करोड़ों पल कुर्बान।
ये पल इसलिए और भी खास है कि यहां वे औरतें अपने होने का जश्न मना रही हैं जो दुनिया भर में अपने हुनर, मेहनत और काबिलियत के लिए जानी जाती हैं। एक ऐसे खेल में जिन्होंने खुद को साबित किया है जिस पर बरसों बरस आदमियों का एकाधिकार रहा। उनके बीच मुस्कुराती नन्ही सी फातिमा उनके आने वाले कल का खूबसूरत सा आईना है। जो इस तसल्ली से अपनी मां की गोदी में बैठी है कि इन मजबूत हाथों से उसका आने वाला कल भी संवरेगा ही। उसे बिना डर मनचाहे काम करने की आजादी मिलेगी, जैसे आज उसकी माँ अपने इरादों से अपनी पसंद को पंख दे रही है।
इस चित्र को देखकर यह आश्वस्ति भी होती है कि बहुत छोटे-छोटे कदमों से ही सही लेकिन महिलाएं मजबूती से अपने कदम बढ़ा रही हैं। इसमें उन लोगों का साथ और सहयोग और भी अधिक महत्वपूर्ण है जो घर, दफ्तर, समाज में महिलाओं के आगे बढ़ते समय उनकी हौसलाअफजाई करते हैं, न कि उनकी राह में रोड़ा बनते हैं। क्रिकेट इज इंडीड अ जेन्टलमैन्स गेम लेकिन अब यहां भद्र महिलाएं भी अपनी फिरकी और स्वीप के जलवे दिखा रही हैं। ये आसान तो नहीं ही रहा होगा। खासकर भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों की महिलाओं के लिए जहां महिलाओं के लिए तयशुदा भूमिकाएं रही हैं।
कहीं साधन नहीं रहे होंगे तो कहीं मजाक भी उड़ाया गया होगा, कहीं उनको औरत मानने से ही इंकार कर दिया गया होगा, लेकिन इन सबके बीच कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के साथ उन्होंने आगे कदम बढ़ाए और खुद को साबित किया है।
औरतों के लिए आगे बढ़ने, खुद को साबित करने का निर्णय लेना और फिर इस निर्णय को सही साबित करना कभी भी आसान नहीं रहा है और आगे भी चुनौतियां तो आएंगी ही। लेकिन वो जिंदगी ही क्या जहां रास्ते में कोई स्पीड ब्रेकर, कोई गड्ढा न मिले। इन सबके पार ही तो है वो आसमान जहां फिनिशिंग लाइन स्वागत कर रही होती है और विजेता का ताज सिर पर सजता है। तो प्यारी फातिमा तुम निश्चिन्त हो, मुस्कुराती रहना। क्योंकि तुम मुस्कुराओगी तो धीरज बंधेगा कि कल की सुबह और भी हसीन होगी, तुम मुस्कुराओगी तो चैन मिलेगा कि कल इस मैदान पर तुम्हारे नाम की भी गूंज उठेगी।
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