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दिल्ली विधानसभा चुनावः क्या राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में शामिल होगा प्रदूषण का मुद्दा?

Amalendu Upadhyay अमलेंदु उपाध्याय
Updated Thu, 26 Dec 2019 06:05 PM IST
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will the issue of pollution be included in the political parties manifesto
प्रदूषण पर सियासत तो बहुत हुई लेकिन जनता को निजात दिलाने कोई नहीं आया। - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। इस बार भी सर्दियों में दिल्ली का प्रदूषण से दम घुटता रहा और राज्य सरकार ने उपाय के तौर पर वाहनों के लिए ऑड ईवन योजना लागू की। लेकिन जब समस्या सिर पर आ जाए तब उसका समाधान करने के फौरी उपाय फौरी राहत तो दे सकते हैं, लेकिन समस्या का स्थाई समाधान नहीं दे सकते।

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सर्वाधिक अफसोस की बात तो यह है कि प्रदूषण का मसला जो सार्वजनिक महत्व का मसला है, उस पर भी सियासत तो खूब हुई मगर जनता को इस मुसीबत से छुटकारा दिलाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए।
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इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा संचालित ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2019 में नई दिल्ली, दुनिया के 140 प्रमुख शहरों में से 118 वें स्थान पर रही। 2016 के बाद से पीएम के स्तर में कोई कमी नहीं होने के साथ राजधानी की खराब वायु गुणवत्ता ने शहर को हर सर्दियों में वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के साथ एक सामाजिक आपदा में बदल दिया।
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दरअसल, सरकारी दावे कुछ भी हों परन्तु भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा ही 20 राज्यों के राजधानी शहरों से लिए गए पाइप पेयजल के नमूनों से पता चलता है कि दिल्ली शहर के अलग-अलग हिस्सों से एकत्र किए गए 11 पानी के नमूनों में से एक भी नमूना गुणवत्ता परीक्षण में पास नहीं हुआ। और बीआईएस की इसी रिपोर्ट को लेकर केंद्र व राज्य सरकार में खूब तकरार हुई।

अब नागरिकों की एक संस्था ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रदूषण को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने के लिए अभियान शुरू किया है। यूनाइटेड रेजिडेंट्स ज्वाइंट एक्शन या ऊर्जा (URJA), दिल्ली में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWA) की शीर्ष संस्था है। यह नागरिक सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा की कुशल डिलीवरी की मांग के लिए सूचना एकत्र करती है, विश्लेषण करती है और जनता की राय एकत्र करती है जिससे कि एक जवाबदेह, कुशल और उत्तरदायी सरकार से दिल्ली के निवासियों को स्वच्छ हवा और पानी की मांग की जाए।

ऊर्जा ने अब नागरिकों का ग्रीन घोषणापत्र जारी किया है, जिसमें मांग की गई कि सभी राजनीतिक दलों को प्रदूषण खत्म करने का प्रबंधन करने के लिए उनके आगामी पार्टी घोषणा पत्र में प्रदूषण के प्रति दृष्टिकोण और रोडमैप को शामिल करना चाहिए और हर स्तर पर- वायु, जल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन किस तरह किया जाए इसका ब्यौरा देना चाहिए।
 

will the issue of pollution be included in the political parties manifesto
क्या राजनीतिक पार्टियों के एजेंड में शामिल होगा प्रदूषण का मुद्दा। - फोटो : फाइल फोटो

इस मैनिफेस्टो को 'सिटिज़न्स ग्रीन मैनिफेस्टो फॉर ए स्मार्ट एंड सस्टेनेबल दिल्ली' के शीर्षक से तैयार किया गया है। ऊर्जा का दावा है कि वायु प्रदूषण, परिवहन और गतिशीलता, शहरी डिजाइन, जल आपूर्ति और जल निकायों के कायाकल्प और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे विषयों से संबंधित विशेषज्ञों की एक समिति के परामर्श से इस मैनिफेस्टो को तैयार किया गया है।

ऊर्जा के जनघोषणापत्र में वायु, जल और ठोस अपशिष्ट प्रदूषण का प्रबंधन करने के लिए 10 प्रमुख मांगें रखी हैं और चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक लोगों के लिए ने इन चुनावों के लिए दिल्ली में एक दृष्टिकोण और रोडमैप पेश किया है।

इस जनघोषणापत्र में जिन मांगों को हासिल करने के लिए समाधान, रोडमैप और समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं, उनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए 2025 तक वायु प्रदूषण के स्तर में 65 प्रतिशत की कमी लाना शामिल हैं।

इसके साथ ही वर्ष 2025 तक 25 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा व वर्ष 2050 तक सभी के लिए 100 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा का मार्ग सुनिश्चित करना शामिल है। यही नहीं सार्वजनिक परिवहन, जो दिल्ली की कम से कम 80 फीसदी आबादी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता हो, के लिए शहर की सड़कों पर हो रही अत्यधिक भीड़ को कम करने का रोडमैप भी दिया गया है इसके साथ ही कहा गया है कि वर्ष 2025 तक नए वाहनों के पंजीकरण में लगभग 50 प्रतिशत वाहन, इलैक्ट्रिक हों जिससे विद्युत गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा।

कचरा प्रबंधन भी हर मैट्रोपोलिटन सिटी की तरह दिल्ली की भी बड़ी समस्या है। इस जनघोषणापत्र में मांग की गई है कि वर्ष 2025 तक के लिए रोडमैप तैयार हो, ताकि लैंडफिल साइट्स पर शून्य कचरा पहुंचे या इतना पहुंचे कि जिसे संभालना न पड़े।

जल प्रबंधन के लिए भी रोडमैप तैयार करने की मांग इस जनघोषणापत्र में की गई है। इसमें कहा गया है कि 2025 तक जीरो वेस्ट वाटर लॉस और 100 प्रतिशत भूजल रिचार्ज के प्रबंध किए जाएं। इसके साथ ही दिल्ली के जल निकायों और वेटलैंड्स को पुनर्जीवित करने और उनके कायाकल्प करने की योजना बनाई जाए।

ऊर्जा के अध्यक्ष अतुल गोयल का कहना है कि घोषणापत्र में अगले पांच वर्षों के लिए दस सार्वजनिक मांगें प्रस्तुत की गई हैं, जिससे दिल्ली सरकार, दिल्ली को 2025 तक संसाधन युक्त और दीर्घकालिक यानि लंबे समय तक चल सकने वाला बना सके। ऊर्जा ने 2020 के दिल्ली चुनावों में सक्रिय राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से अपेक्षा की है कि वे इन मांगों को अपने घोषणापत्र में ज़रूर सम्मिलित करेंगे और इनको हासिल भी करेंगे।

घोषणापत्र पर विशेषज्ञ समिति का हिस्सा रहीं मनु भटनागर कहते हैं कि चुनी गई सरकार का यह कर्तव्य है कि नागरिकों के सहयोग से इस दिशा में सक्रिय कार्यक्रम शुरू करे और इसको सकारात्मक अंजाम तक पहुंचाए। उनका कहना है कि जो बदलाव आज दिल्ली में होगा, उसी का अनुसरण कल दूसरे राज्य और शहर करेंगे।

ऊर्जा की सीनेट की सदस्य सविता सिंह कहती हैं कि राष्ट्रीय राजधानी के अंदर कचरे के पहाड़ हैं, जो हमारे भूजल और हवा को विषाक्त करते जा रहे हैं। जो देश पांच ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था का उद्देश्य प्राप्त करना चाहता है उसके लिए यह शर्म की बात है कि उसकी राजधानी को बुनियादी सुविधाओं की भी मांग करनी पड़ रही है जो कि एक स्मार्ट, स्थायी और रहने योग्य राष्ट्रीय राजधानी होनी चाहिए।

घोषणा पत्र यह स्पष्ट करता है कि नागरिक बेहतर जीवन स्तर की मांग कर रहे हैं। खाली राजनीतिक वादों से लोग परेशान हैं। यह समय है कि शब्दों के साथ कार्रवाई का भी मेल हो। अब देखना यह है कि क्या कोई भी राजनीतिक दल आने वाले विधानसभा चुनाव में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के अतिमहत्वपूर्ण विषय पर कोई बात भी करता है या नहीं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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